मिशन मंगल रिव्यु: बॉलीवुड की बेहतरीन क्रिएटिविटी
Friday, August 16, 2019 13:14 IST
By Santa Banta News Network
कास्ट: अक्षय कुमार, विद्या बालन, सोनाक्षी सिन्हा, तापसी पन्नू, नित्या मेनन, कीर्ति कुल्हारी, शर्मन जोशी, संजय कपूर, मोहम्मद ज़ीशान अयूब, एच जी दत्तात्रेय, दिलीप ताहिल, पूरब कोहली, मोहन कपूर, रोहन जोशी, कश्मीरा परदेशी

डायरेक्टर: जगन शक्ति

रेटिंग: ****1/2

मिशन मंगल कहानी है साइंटिस्ट्स के एक ग्रुप की जिन्होंने पहले ही प्रयास में मंगल पर सेटेलाइट भेजने का सपना देखा था वो भी सिर्फ 465 करोड़ के छोटे से बजट में.

कहानी शुरू होती है 25 दिसम्बर 2010 से, प्रोजेक्ट डायरेक्टर राकेश धवन (अक्षय कुमार) का 'जीएसएलवी-एफ06' का लॉन्च प्रोजेक्ट मेनेजर तारा शिंदे (विद्या बालन) की एक गलती की वजह से फेल हो जाता है. प्रूजेक्ट की सारी ज़िम्मेदारी राकेश अपने ऊपर ले लेता है, सजा के तौर पर उन्हें इसरो के तब नामुमकिन लगते 2022 के मार्स मिशन प्रोग्राम में शिफ्ट कर दिया जाता है.

तारा जो की एक क्रिएटिव साइंटिस्ट है इस नयी टीम का हिस्सा है, अब मार्स मिशन में भी दिक्कतें आती हैं जिसे तारा अपने घरेलु तरीके से सॉल्व करती है. तारा एक शादी शुदा औरत है जिसके पति सुनील (संजय कपूर) तारा के काम पर ज्यादा और घर पे कम ध्यान देने की वजह से खुश नहीं है. सुनील बेरोजगार है और तारा और अपने बच्चों, दिलीप (रोहन जोशी) और आन्या (कश्मीर परदेशी) की ज़िन्दगी में कुछ ज्यादा ही दखल देता है. घर में अकेली कमाने औरत होने की वजह से तारा को कम पैसों में घर चलाने में दिक्कतें भी आती हैं लेकिन यही मार्स मिशन की कामयाबी की वजह भी बनती है.


जब तारा की मेड पूरियां टालते समय उसे कहती है की गैस ख़तम होने वाली है, तो तारा कहती है की तेल गरम है गैस बंद कर दो और पूरियां तल लो, ठंडा होने पर फिर गैस ऑन कर लेना और यहीं से तारा को कम बजट में मार्स मिशन लॉन्च कर का आईडिया आता है.

इसरो डायरेक्टर (विक्रम गोखले) को आईडिया पसंद आता है और रुपर्ट देसाई (दिलीप ताहिल) जोकि नासा रिटर्न साइंटिस्ट है उनके विरोध के बाद भी प्रोजेक्ट आगे बढ़ जाता है, हालांकि 800 करोड़ के शुरूआती बजट को काट कर आधा कर दिया जाता है बाकि 'चंद्रयान 2' को चला जाता है. रुपर्ट देसाईं राकेश के लिए इस मिशन के लिए सिर्फ जूनियर साइंटिस्ट्स अलौट करते हैं जो राकेश के लिए और बड़ा चैलेंज बन जाता है. टीम में ज़्यादातर फीमेल साइंटिस्ट्स होने की वजह से मिशन का नाम 'मॉम्स ओवर मार्स' रखा जाता है.

इस टीम में तारा के साथ हैं एक तेज़ तर्रार लड़की एका गाँधी (सोनाक्षी सिन्हा) जो कम्युनिकेशन एक्सपर्ट है, प्रोपल्शन इंजिनियर कृतिका अगरवाल (तापसी पन्नू) जो एक आर्मी ऑफिसर ऋषि अगर्वल (मोहम्मद ज़ीशान अयूब) से मैरिड है, नेहा सिद्दीकी (कीर्ति कुल्हारी) जिसे मुस्लिम और तलाकशुदा होने की वजह से एक अच्छा घर मिलने में दिक्कत आ रही है और पेलोड एक्सपर्ट वर्षा पिल्लई (नित्या मेनन) जो अपने पति विवेक पिल्लई के साथ 1 बेडरूम अपार्टमेंट में रहती है और उसकी सास चाहत है की वो जल्दी से मां बन जाए.

2 और इंटरेस्टिंग करैक्टर हैं इस टीम में, परमेश्वर जोशी (शर्मन जोशी) जिसकी शादी न हो पाने की वजह से वो ज्योतिषियों के चक्कर में पड़ा है और एका को पसंद करता है जिससे एका परेशान है और अनंत नायर, (एच जी दत्तात्रेय) 59 साल के साइंटिस्ट जिनकी रिटायरमेंट नज़दीक है.

टीम के लीड साइंटिस्ट्स राकेश और तारा के बजाये कोई और मेम्बर मिशन के लिए ख़ास उत्सुक नहीं है और सब टाइम पास कर रहे हैं जिन्हें तारा का किरदार देशभक्ति के ज़रिये मोटीवेट करता है. मिशन के दौरान टीम को बहुत से चैलेंजेस का भी सामना करना पड़ता है और हर बार किसी न किसी जुगाड़ से काम हो जाता है.


सभी दिक्कतों के बावजूद, आखिरकार 'पीएसएलवी सी25' 5 नवम्बर, 2013 को लांच होता है और 24 सितम्बर 2014 को मंगल कि कक्षा में स्थापित होता है राकेश और तारा की टीम जिसकी कामयाबी पर सब को शक था, इतिहास रच देती है. पहले ही प्रयास में मंगल पहुचने वाला देश बन्ने की वजह से ये मिशन भारत, इसरो के सभी साइंटिस्ट्स और 'मॉम' की टीम के लिए और भी ख़ास बन जाता है.

राइटर जगन शक्ति जिन्होंने इस फिल्म से डायरेक्शन में भी डेब्यू किया है, बहुत बढ़िया काम किया है. क्रिएटिव डायरेक्टर के तौर पर आर बल्कि ने भी सराहनीय काम किया है. फिल्म में दो गाने हैं 'शाबाशियाँ' और 'ओ मंगलम मिशन मंगलम' दोनों ही स्क्रीन प्ले पर अच्छे लगते हैं. स्क्रीनप्ले और एडिटिंग तारीफ के हक़दार हैं जिनमे कोई भी कमी ढूँढना मुश्किल काम है. फिल्म के सभी कलाकारों ने किरदारों को उत्कृष्ट तरीके से उतारा है, हालांकि अक्षय, विद्या और तापसी का काम सबसे बढ़िया है.

अक्षय कुमार को अगर आज का भारत कुमार कहा जाए तो गलत नहीं होगा इस फिल्म से अक्षय अब एक अलग ही लीग में शामिल हो गए हैं.

फिल्म का सब्जेक्ट काफी टेक्निकल होने के बावजूद राइटर्स ने फिल्म की कहानी बहुत सरल तरीके से ऑडियंस तक पहुँचाने का काम किया है. फिल्म का ह्यूमन और इमोशनल एंगल दर्शकों को फिल्म से रिलेट करने में मदद करता है और इन सब पर फिल्म का ह्यूमर और हाज़िरजवाबी फिल्म को एक कम्पलीट पैकेज बनाती है.

15 अगस्त 1969 को स्थापित हुई इसरो की 50वीं वर्षगाँठ पर ये फिल्म एक परफेक्ट श्रद्धांजलि देने के साथ साथ हमें भारत को स्पेस रिसर्च में सुपरपावर बनाने में विक्रम साराभाई, सतीश चन्द्र धवन, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, और यु.जी. राव के योगदान की भी याद दिलाती है.

जगन शक्ति के इस मास्टरपीस को इस वीकेंड अपने परिवार के साथ मिशन मंगल ज़रूर देखने जाएँ.
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