सेक्रेड गेम्स सीजन 2: 'जंग का वक़्त आ गया है'
Friday, August 16, 2019 17:08 IST
By Vikas Tiwari, Santa Banta News Network
कास्ट: नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, सैफ अली खान, पंकज त्रिपाठी, सुरवीन चावला, कल्कि कोच्लिन, अमृता सुभाष, एल्नाज़ नोरुज़ी, रणवीर शोरे

डायरेक्टर: अनुराग कश्यप, नीरज घयवान

रेटिंग: ****

सेक्रेड गेम्स सीजन 1 की सफलता के बाद फैन्स बेसब्री से सीजन 2 का इंतज़ार कर रहे थे और इंतज़ार आखिरकार कल ख़तम हो गया.

सेक्रेड गेम्स के सीजन 2 में हमें मिलवाया जाता है गणेश गायतोंडे के अन्तर्यामी अवतार से लेकिन ये गायतोंडे वो नहीं है जिसे देख कर लोग डर से थर थर कांपने लगते है. ये वो गायतोंडे हैं जो समंदर के बीच में खुद ही कहीं खोया हुआ है. वो एक छोटी मछली है जिसकी लगाम उससे भी बड़े और ताकतवर किरदारों के हाथ में है.

जहाँ सीजन 1 में हमने ये देखा की एक छोटे से गाँव से भागा हुआ लड़का कैसे बड़ा हो कर मुंबई पर राज करने वाला गणेश गायतोंडे बनता है. वहीँ इस सीजन में हमें ये देखने को मिलता है की कैसे गायतोंडे का किरदार सरताज को राह दिखता है, सैफ ने भी सरताज के किरदार के को इमोशंस और इंटेंसिटी के साथ निभाया है. इस सीजन में सरताज का किरदार अपने असली रूप में हमें नज़र आता है जो परफेक्ट नहीं है.

पुराना गायतोंडे अपने इरादों पर अडिग था जो बदला लेने के लिए उतारू था, मगर ये जो गायतोंडे अपनी खोयी हुई इज्ज़त वापस पाने में जुटा हुआ है जिसका अन्दर ही अन्दर इस ज़िन्दगी से मन भर चूका है और यही चीज़ उसे उसके 'तीसरे बाप', गुरूजी तक लेकर जाती है जो गायतोंडे की ज़िन्दगी में एक धमाकेदार बदलाव लेकर आता है.

सीजन 1 जहाँ ख़त्म हुआ था वहीँ से सीजन 2 शुरू होता है, गायतोंडे के नुक्लीअर बंकर की जांच चल रही है और दांव पर लगी है मुंबई. इस तरह शुरू होता है मुंबई को बचाने का सफ़र जो हमें लेकर जाता है शाहीद खान तक जो इस पहेली में और करप्ट राजनेताओं, पुलिसवालों और नए किरदारों को उजागर करता है.

सेक्रेड गेम्स का 'सेक्रेड' हिस्सा हमें इस सीजन में 'गुरूजी' के इंट्रोडक्शन के साथ देखने को मिलता है, जिसे पंकज त्रिपाठी ने पूरी धिद्दत के साथ निभाया है. 'गुरुजी' का किरदार एक - एक कदम सोच समझ कर रखता है और धीरे धीरे अपना समर्थकों को दुनिया का अंत करने के लिए तैयार करता है.

उसका मनना है की हमारे आस पास की दुनिया धीरे धीरे ख़त्म हो रही है और इसे ख़त्म होने से बचाने का एक ही तरीका है की पृथ्वी से जन-जीवन का ही सफाया कर दिया जाए ताकि सब कुछ दोबारा शुरू से शुरू हो सके.

इंसानों के प्रकृति के संरक्षण में नाकाम होने पर गुरूजी का किरदार हमसे सवाल करता है की क्या कभी हमारी सभ्यता को मुक्ति मिल पाएगी? अपने बीते कल के सामने आने पर कहानी के किरदार अपने आप से जूझते हुए नज़र आते हैं, कुछ जो अपने पिता द्वारा किये कर्मों का अब तक पश्चाताप कर रहे हैं.

कुल मिलकर ये सीजन अपनी ज़मीन तैयार करने में वक़्त लेता है और जिस तरह तीसरे सीजन के लिए रास्ता बनाया गया है वो दर्शकों को निराश कर सकता है.. सीजन 2 का सबसे मज़बूत पहलु है परफॉरमेंस. शुरू से अंत तक किसी भी किरदार की कहानी को अधूरा नहीं छोड़ा गया है. सीजन 1 के मकाबले सीजन 2 सिर्फ एंटरटेनमेंट पर फोकस न करके जिस दुनिया में हम रहते हैं उसके प्रति हमें अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देने पर मजबूर करता है.
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