भूत पार्ट वन: द हौंटेड शिप रिव्यु: 'डरावनी' शब्द इसके लिए सही नहीं है
Saturday, February 22, 2020 13:02 IST
By Santa Banta News Network
कास्ट: विकी कौशल, भूमि पेड्नेकर, आशुतोष राणा, सिद्धांत कपूर, मैहर विज

निर्देशक: भानु प्रताप सिंह

रेटिंग: **

भूत पार्ट वन: द हौंटेड शिप कहानी है पृथ्वी की (विकी कौशल) जो मुंबई की एक शिपिंग कंपनी में कार्यरत है. पृथ्वी कुछ साल पहले एक रिवर राफ्टिंग हादसे के दौरान अपनी पत्नी और बेटी की मृत्यु के कारण अब तक सदमे में है और उन्हें आज भी देखता है. इससे उबरने के लिए वह डॉक्टर्स द्वारा दी गयी दवाइयां नहीं लेता है ताकि पत्नी और बेटी की यादों के साथ कुछ समय और बिता सके. एक दिन मुंबई के समुद्र तट पर तूफ़ान के कारण सी बर्ड नाम का एक पुराना खाली जहाज़ आ पहुँचता है और पृथ्वी की शिपिंग कंपनी को इस शिप को तट से हटाने का काम सौंपा जाता है.

बिना भारी लहरों के इस भारी भरकम शिप को हटाना मुश्किल है और इसलिए लहरें न आने तक पृथ्वी को सी बर्ड का निरिक्षण करने का काम सौंपा जाता है. पृथ्वी के साथ शिप पर अजीबोगरीब घटनाएँ होनी शुरू होती है. शुरुआत में उसे लगता है की वे उसके मन का वहम है मगर धीरे - धीरे सच्चाई उसके सामने आती है और इसके बाद उसकी कहानी में क्या मोड़ आता है ये कहानी है भूत पार्ट वन: द हौंटेड शिप की.

भानु प्रताप सिंह की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म में हॉरर के अलावा बाकी सब कुछ है. फिल्म के कुछ दृश्यों को छोड़ दिया जाए तो 'डरावनी' शब्द इसके लिए सही नहीं है. फिल्म का स्क्रीनप्ले ढीला और औसत है और राइटिंग कमज़ोर है जो फिल्म को और कमज़ोर बना देती है. निर्देशक ने मुख्य कलाकार पृथ्वी का अतीत दिखाने में काफी समय बर्बाद किया है जो की फिल्म में दर्शक की दिलचस्पी घटाने का काम करता है.


एक गम में डूबे हुए पति और पिता पृथ्वी के किरदार में विकी कौशल का प्रदर्शन दमदार है मगर फिल्म की कमज़ोर स्क्रिप्ट उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर देती है और अकेले विकी इस फिल्म को बचाने के लिए काफी नहीं है. भूमि पेड्नेकर का किरदार छोटा ही है मगर उनकी परफॉरमेंस उसमे भी सराहनीय है. आशुतोष राणा और सिधान्त कपूर का किरदार दिलचस्प है और दोनों अपने - अपने किरदारों में ठीक - ठाक लगे हैं.

फिल्म की रफ़्तार बेहद धीमी है और सेकंड हाफ में तो ये रेंगने लगती है जो की निराश करता है. किसी भी हॉरर फिल्म में कैमरा मूवमेंट, विज़ुअल इफेक्ट्स और बेकग्राउंड स्कोर बेहद ज़रूरी होता है और भूत यहाँ भी फेल होती है. विज़ुअल इफेक्ट्स साधारण हैं, कैमरा मूवमेंट बेहद तेज़ है और बेकग्राउंड स्कोर भी बेअसर लगता है.

जब एक हॉरर फिल्म आपको डराने के बजाये हंसाने लगे तो समझ लीजिये की आपके पैसे डूब गए हैं और थिएटर से बाहर निकलने का समय आ गया है. एक बढ़िया हॉरर जौनर की फिल्म बनाना बॉलीवुड के लिए आज भी एक गूढ़ मसला है जिसे कम ही निर्देशक समझ पाए हैं और भानु प्रताप सिंह उनमें से एक नहीं है.

कुल मिलाकार, भूत द हौंटेड शिप: पार्ट वन में अगर कोई चीज़ देखने लायक है तो वो हैं विकी कौशल. उन्हें फिल्म से हटा दें तो भूत नाम के इस का शिप डूबना तय है. आशुतोष राणा जैसे कलाकार के टैलेंट को यहाँ ज़ाया किया गया है और 'घोस्ट स्टोरीज़' के बाद बतौर निर्माता करन जोहर की ये हॉरर फिल्म भी निराश ही करती है.
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