• सचिन बनाम ध्यानचाँद

    सचिन बनाम ध्यानचाँद
    सचिन के क्रिकेट से संन्यास लेने के कुछ घंटों बाद ही यूपीए सरकार ने उन्हें भारत रत्न देने कि घोषणा कर दी। इसमें कोई शक नहीं कि तेंदुलकर इस पुरस्कार के हकदार हैं परन्तु उनका ऐसा पहला खिलाडी होना शायद विरोधाभास पैदा करता है। कुछ लोगों का तो यह तक कहना है कि ध्यानचंद शायद इस पुरस्कार के लिए ज़्यादा उपयुक्त विकल्प होते।
  • फ्लाइंग बैट

    फ्लाइंग बैट
    हॉकी जादूगर 1948 में सेवानिवृत्त हुए। `पीढ़ियों या विभिन्न खेलों की तुलना करना असंभव। 5 फीट 7 इंच लम्बे ध्यानचंद ने भारत को 3 ओलम्पिक स्वर्ण पदक दिलाये। बावजूद इसके कि उन्होंने हॉकी 16 साल की उम्र में सेना में भर्ती होने के बाद शुरू किया उनके खेल आंकड़ों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अगर हॉकी के उस जादूगर ने क्रिकेट में हाथ आज़माया होता तो शायद उनका प्रभाव सर डॉन ब्रैडमैन से कम नहीं होता।