• शराबी की दास्ताँ!

    एक बार एक शराबी रात के 12 बजे शराब की दुकान के मालिक को फ़ोन करता है और कहता है;

    शराबी: तेरी दुकान कब खुलेगी?

    दुकानदार: सुबह 9 बजे!

    शराबी फिर थोड़ी देर बाद दोबारा दुकानदार को फ़ोन करके पूछता है;

    शराबी: तेरी दुकान कब खुलेगी?

    दुकानदार: कहा ना सुबह 9 बजे!

    कुछ देर बाद शराबी फिर से दुकानदार को फ़ोन कर देता है और पूछता है;

    शराबी: भाईसाहब आपकी दुकान कब खुलेगी?

    दुकानदार: अबे तुझे कितनी बार बताऊँ सुबह 9 बजे खुलेगी इसीलिए सुबह 9 बजे आना और जो भी चाहिए हो ले जाना!

    शराबी: अबे, मैं तेरी दुकान के अन्दर से ही बोल रहा हूँ!
  • नई मधुशाला!

    मैं औऱ मेरी तनहाई, अक्सर ये बाते करते हैं;
    ज्यादा पीऊं या कम, व्हिस्की पीऊं या रम।

    या फिर तोबा कर लूं... कुछ तो अच्छा कर लूं।
    हर सुबह तोबा हो जाती है, शाम होते-होते फिर याद आती है।
    क्या रखा है जीने में, असल मजा है पीने में।

    फिर ढक्कन खुल जाता है, फिर नामुराद जिंदगी का मजा आता है।
    रात गहराती है, मस्ती आती है। कुछ पीता हूं, कुछ छलकाता हूँ।

    कई बार पीते-पीते, लुढ़क जाता हूँ।
    फिर वही सुबह, फिर वही सोच।
    क्या रखा है पीने में, ये जीना भी है कोई जीने में!
    सुबह कुछ औऱ, शाम को कुछ और।

    थोड़ा गम मिला तो घबरा के पी गए,
    थोड़ी ख़ुशी मिली तो मिला के पी गए;
    यूँ तो हमें न थी ये पीने की आदत...
    शराब को तनहा देखा तो तरस खा के पी गए।
  • नई मधुशाला!

    मैं औऱ मेरी तनहाई, अक्सर ये बाते करते हैं;
    ज्यादा पीऊं या कम, व्हिस्की पीऊं या रम।

    या फिर तोबा कर लूं... कुछ तो अच्छा कर लूं।
    हर सुबह तोबा हो जाती है, शाम होते-होते फिर याद आती है।
    क्या रखा है जीने में, असल मजा है पीने में।

    फिर ढक्कन खुल जाता है, फिर नामुराद जिंदगी का मजा आता है।
    रात गहराती है, मस्ती आती है। कुछ पीता हूं, कुछ छलकाता हूँ।

    कई बार पीते-पीते, लुढ़क जाता हूँ।
    फिर वही सुबह, फिर वही सोच।
    क्या रखा है पीने में, ये जीना भी है कोई जीने में!
    सुबह कुछ औऱ, शाम को कुछ और।

    थोड़ा गम मिला तो घबरा के पी गए,
    थोड़ी ख़ुशी मिली तो मिला के पी गए;
    यूँ तो हमें न थी ये पीने की आदत...
    शराब को तनहा देखा तो तरस खा के पी गए।
  • शराबी की व्यथा!

    एक बार एक शराबी रात के 12 बजे शराब की दुकान के मालिक को फ़ोन करता है और कहता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: सुबह 9 बजे।

    शराबी फिर थोड़ी देर बाद दोबारा दुकानदार को फ़ोन करके पूछता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: कहा ना सुबह 9 बजे।

    कुछ देर बाद शराबी फिर से दुकानदार को फ़ोन कर देता है और पूछता है,"भाई साहब आपकी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: अबे तुझे कितनी बार बताऊँ सुबह 9 बजे खुलेगी इसीलिए सुबह 9 बजे आना और जो भी चाहिए हो ले जाना।

    शराबी: अबे, मैं तेरी दुकान के अन्दर से ही बोल रहा हूँ।