• एक सच्ची घटना!

    पड़ोस में सत्यनारायण कथा की आरती हो रही थी।

    आरती की थाली मेरे सामने आने पर, मैंने अपनी जेब में से छाँट कर कटा फटा दस रूपये का नोट कोई देखे नहीं, ऐसे डाला।

    वहाँ अत्याधिक ठसा-ठस भीड़ थी।

    मेरे कंधे पर ठीक पीछे वाली आंटी ने थपकी मार कर मेरी ओर 2000 रूपये का नोट बढ़ाया।

    मैंने उनसे नोट ले कर आरती की थाली में डाल दिया।

    मुझे अपने 10 रूपये डालने पर थोड़ी लज्जा भी आई।

    बाहर निकलते समय मैंने उन आंटी को श्रद्धा पूर्वक नमस्कार किया, तब उन्होंने बताया कि 10 का नोट निकालते समय 2000 का नोट मेरी ही जेब से गिरा था। जो वे मुझे दे रही थी।

    बोलो सत्यनारायण भगवान की जय!
  • बॉस कौन है!

    एक बार कुछ लड़कियां शहर से गाँव घूमने आई थी। जब वो वापस लौट रही थी तो रास्ते में जिस बस में वे सफर कर रहीं थी, कुछ डाकुओं ने उस बस को घेर लिया। बस लूटने वाले दो डाकुओं ने पिस्तौल दिखाकर बस जंगल में रुकवा ली, तो सभी मुसाफिरों में सन्नाटा छा गया।

    एक डाकू ने अपने साथी से कहा, "हम पुरुषों को लूटेंगे और सभी औरतों को अपने साथ ले जाएँगे।"

    दूसरा डाकू जो पहले वाले से कमजोर था बोला, "नहीं, हम सारा सामान लूटेंगे, औरतों को कुछ नहीं कहेंगे।"

    यह सुन पीछे की सीट पर बैठी लड़कियों ने आपस में खुसुर - फुसुर की और फिर उनमे से एक दूसरे डाकू से बोली, "ऐ, तुम अपने बॉस का आदेश मानो। जैसा वो कह रहा है वैसा करो।"
  • प्रेम पत्र!

    एक सुन्दर युवती दवाईयों की एक दुकान के सामने काफी देर तक खडी थी। भीड़ छटने का इंतज़ार कर रही थी। दुकान का मालिक उसे शक की नजर से घूर रहा था।

    बहुत देर बाद जब दुकान मे कोई ग्राहक नही बचा, तो वह लड़की दुकान मे आयी।

    एक सेल्समन को धीरे से एक किनारे बुलाया।

    दुकान मालिक अब और भी ज्यादा चौकन्ना हो गया।

    लड़की ने धीरे से एक कागज़ सेल्समन की ओर बढाया और धीरे से फुसफुसायी,
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    "भैया, मेरी एक डॉक्टर के साथ शादी तय हो गयी है। आज उनकी पहली चिठ्ठी आयी है। थोडा पढ़कर सुनायेंगे क्या?
  • जुगाड़ी इलाज़!

    एक आदमी मनोचिकित्सक के पास गया बोला `डॉक्टर साहब मैं बहुत परेशान हूं। जब भी मैं बिस्तर पर लेटता हूं, मुझे लगता है कि बिस्तर के नीचे कोई है। जब मैं बिस्तर के नीचे देखने जाता हूं तो लगता है कि बिस्तर के ऊपर कोई है। नीचे, ऊपर, नीचे, ऊपर यही करता रहता हूं। सो नहीं पाता । कृपा कर मेरा इलाज कीजिये नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा।"

    डॉक्टर ने कहा, `तुम्हारा इलाज लगभग दो साल तक चलेगा। तुम्हें सप्ताह में तीन बार आना पड़ेगा। अगर तुमने मेरा इलाज मेरे बताये अनुसार लिया तो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे।`

    मरीज: पर डॉक्टर साहब, आपकी फीस कितनी होगी ?

    डॉक्टर: सौ रूपये प्रति मुलाकात।

    आदमी गरीब था इसीलिए फिर आने को कहकर चला गया।

    लगभग छ: महीने बाद वही आदमी डॉक्टर को सड़क पर घूमते हुये मिला, "क्यों भाई, तुम फिर अपना इलाज कराने क्यों नहीं आये ?" मनोचिकित्सक ने पूछा।

    "सौ रूपये प्रति मुलाकात में इलाज करवाऊं ? मेरे पड़ोसी ने मेरा इलाज सिर्फ बीस रूपये में कर दिया` आदमी ने जवाब दिया।

    डॉक्टर:अच्छा! वो कैसे?

    मरीज:दरअसल वह एक बढ़ई है, उसने मेरे पलंग के चारों पाए सिर्फ पांच रूपये प्रति पाए के हिसाब से काट दिये।