• नयी पड़ोसन!

    एक नवविवाहित जोड़ा शादी के बाद रहने के लिए शहर में आया वहां उन्होंने एक कमरा लिया और नए पड़ोसियों के साथ रहने लगे।

    एक सुबह महिला ने देखा कि उनकी पड़ोसन ने कपड़े धोकर बाहर सुखाने के लिए डालें है।

    उसने कपड़ों की तरफ देखा और कहा,"लगता है इसे कपड़े साफ़ करना नही आते देखो कितने गंदे रखे हैं उसे कपड़े धोने का अच्छा साबुन इस्तेमाल करना चाहिए उसके पति ने भी देखा और उस वक्त चुप ही रहा।"

    इसके बाद लगातार दो तीन सप्ताह तक वह महिला उसी प्रकार उस महिला के बारे में बोलती रही।

    फिर एक महीने बाद एक सुबह जब महिला ने देखा तो हैरानी के साथ अपने पति से कहने लगी, "देखो लगता है आज इसने अच्छे साबुन का इस्तेमाल किया है और अब इसे कपड़े धोने भी आ गए है, मुझे हैरानी है कि इसे ये सब किसने सिखाया होगा?"

    उसके पति ने कहा, "आज सुबह मैं जल्दी उठ गया था और मैंने अपने कमरे की खिड़कियाँ साफ़ की है।"
  • पत्नी की शायरी!

    पत्नी जब मायके जाती है और फिर जब पति कि याद आती है तो कैसे रोमांटिक मैसेज भेजती है:

    "मेरी मोहब्ब्त को अपने दिल में ढूंढ लेना;
    और हाँ, आटे को अच्छी तरह गूँथ लेना!

    मिल जाए अगर प्यार तो खोना नहीं;
    प्याज़ काटते वक्त बिलकुल रोना नहीं!

    मुझसे रूठ जाने का बहाना अच्छा है;
    थोड़ी देर और पकाओ आलू अभी कच्चा है!

    मिलकर फिर खुशियों को बाँटना है;
    टमाटर जरा बारीक़ ही काटना है!

    लोग हमारी मोहब्ब्त से जल न जाएं;
    चावल टाइम पे देख लेना कहीं गल न जाएं!

    कैसी लगी हमारी ग़जल बता देना;
    नमक कम लगे तो और मिला लेना!
  • काम वाला फ़ोन!

    फ़ोन का बहुत अधिक बिल आने पर एक आदमी ने अपने घर के सभी लोगों को बुलाया और कहने लगा।

    आदमी: देखो, मुझे इस बात पर बिल्कुल भी यकीन नही हो रहा है कि फ़ोन का इतना अधिक बिल कैसे आ सकता है? जबकि मैं तो सारे फ़ोन अपने ऑफिस के फ़ोन से करता हूँ।

    पत्नी: बिल्कुल, मैं भी! मैं तो कभी भी इस फ़ोन से फ़ोन नही करती क्योंकि मेरे पास तो अपना ऑफिस वाला फ़ोन है।

    बेटा: मुझे तो मेरी कंपनी वालों ने बिल्कुल नया फ़ोन दिया है मैं तो उसी से फ़ोन करता हूँ।

    नौकरानी: तो इसमें दिक्कत क्या है साहब? सभी अपने काम वाले फ़ोन से ही फ़ोन करते हैं।
  • चिकन - मटन या मटर पनीर!

    एक आदमी को चिकन - मटन खाने का बहुत शौंक था और वो हर शुक्रवार को चिकन और मटन बनाता था लेकिन जिस मोहल्ले में वो रहता था वहां उसके सभी पडोसी कठोर किस्म के कैथोलिक थे और उन्हे उनके धर्म गुरु ने शुक्रवार के दिन चिकन और मटन खाने के लिए मना किया था। लेकिन अपने पडोसी के घर से आने वाली चिकन और मटनकी खुशबू उन को बहुत विचलित करती थी। इसलिए उन्होने आखिर अपने धर्म गुरु से इस बारे में बात की।

    धर्म गुरु उस आदमी से मिलने के लिए उसके घर आया और उसने उसे भी धर्म परिवर्तन करने की सलाह दी। उस धर्मगुरुके और अपने पडोसियोंके बहुत मनाने और समझाने बुझाने के बाद आदमी रविवार को चर्च में उनकी प्रार्थना सुनने चला गया। फिर अचानक उस धर्म गुरु ने आदमी के शरीर पर पवित्र पानी छिडका और कहा, ''तुम जनम से जो थे और जो भी बन कर बडे हुए उसे भूल जाओ, अब तुम कैथोलिक हो।"

    उस आदमी के सभी पडोसी बहुत खुश थे - लेकिन सिर्फ अगला शुक्रवार आने तक ही।

    अगले शुक्रवार की रात फिर से आदमी के घर से चिकन और मटन कबाब की खुशबू सारे मोहल्ले में फैल गई। पडोसियों ने तुरंत धर्म गुरु को बुलाया। धर्म गुरु जब आदमी के घर के पिछवाडे से उसके घर में दाखिल हुए और उसे डांटने के लिए तैयार ही थे, तब वे अचानक रुक गए और आश्चर्य से आदमी की तरफ देखने लगे।

    वो आदमी छोटी सी पानी की बोतल पकडकर खडा था। उसने वह पानी चिकन और मटन पर छिड़का और बोला, "तुम जनम से चाहे चिकन और मटन थे, और चिकन और मटन बन कर ही बडे हो गए, लेकिन अब मटर और पनीर हो।"