• शर्मीली बुढिया!

    एक बार एक बूढी महिला अपने घर के आँगन मैं बैठी स्वेटर बुन रही थी कि तभी अचानक एक आदमी उसकी आँख बचाते हुए उसकी कुर्सी के नीचे बम रख कर भाग गया।

    आदमी को इतनी जल्दी में भागते हुए देख, कुछ लोगों को शक हुआ तो उन्होंने आँगन में झाँक कर देखा तो उनकी नज़र बुढिया की कुर्सी के नीचे रखे बम पर पड़ी।

    यह देख कर उन लोगों ने बुढिया को आगाह करने के लिए घर के बाहर से ही चिल्लाना शुरू कर दिया "बुढिया बम है, बुढिया बम है।"

    यह शोर-गुल सुन कर बुढिया एक पल के लिए चौंकी और फिर शर्माते हुए बोली, " अरे अब वो बात कहाँ, बम तो मैं जवानी में होती थी।"
  • दोस्ती की परिभाषा!

    लोगों के बहकावे में आकर कछुए और खरगोश में फिर से पाँच मील की दौड़ लग गई!

    तीन मील की दूरी पर जा कर खरगोश ने देखा कि कछुआ बहुत दूर है और उसने सामने के ठेके से एक बोतल ली और पीना शुरू कर दिया!

    दो या तीन पैग पीने के बाद... उसने सामने से कछुए को आता हुआ देखा और बोला, "ले भाई, आज तू भी ले!"

    कछुआ भी बैठ गया और पीते-पीते बोतल खत्म हो गई!

    कछुए ने कहा: तुम मेरे इतने अच्छे दोस्त हो, और मैं तुम्हारे साथ दौड़ने की होड़ के लिए लोगों की बातों में आ गया, तुम्हारे साथ क्या हार क्या जीत? चल भाई एक हॉफ और मँगा ले!"

    फिर दोनों खुशी-खुशी घर चले गए!

    कथासार:अपने दोस्तों के साथ आख़िर किस बात की रेस! हर समय हार-जीत के पीछे ही भागते न रहें, साथ बैठिये, दो पेग लीजिए और देखिए कि ये ज़िन्दगी सच में कितनी ज़्यादा खूबसूरत है!
  • ज्यादा समझदारी भी अच्छी नहीं!

    एक दिन पप्पू ढेर सारी चॉकलेट खा रहा था।

    एक आदमी ने देखा तो उससे रहा नहीं गया और वह पप्पू को सलाह देने लगा।

    आदमी: बेटा इतनी ज्यादा चॉकलेट नहीं खाते, सेहत के लिए ठीक नहीं होती।

    पप्पू: एक बात बोलूं मेरे दादा जी 105 साल के हैं।

    आदमी: अच्छा! क्या वो भी बहुत सारी चॉकलेट खाते हैं?

    पप्पू: नहीं।

    आदमी: तो, फिर?

    पप्पू: उल्लू के पट्ठे, वो अपने काम से काम रखते हैं, तेरी तरह ऊँगलीबाजी नहीं करते।
  • फ़ालतू की बकवास!

    एक सिनेमा घर में कोई किशोर किशोरी लगभग आधा समय आपस में ही बातें करते रहे।

    उनके पास बैठे दर्शकों को यह बहुत बुरा लग रहा था। जब एक दर्शक से रहा ना गया तो बोल उठा, "क्या तोते की तरह टांय-टांय लगा रखी है, कभी चुप ही नहीं होते।"

    इस पर किशोर ने बिगड़कर कहा, "क्या आप हमारे बारे में कह रहे हैं?"

    उत्तर मिला: जी नहीं, फ़िल्म वालों को कह रहा हूँ। शुरू से ही बकवास करे जा रहे हैं। आपकी बातों का एक भी शब्द सुनने नहीं दिया।'