• जानलेवा ख़ुशी!

    90 वर्षीय एक सज्जन की दस करोड़ की लाटरी लग गई। इतनी बड़ी खबर सुनकर कहीं दादाजी खुशी से मर न जाएं, यह सोचकर उनके घरवालों ने उन्हें तुरंत जानकारी नहीं दी। सबने तय किया कि पहले एक डॉक्टर को बुलवाया जाए फिर उसकी मौजूदगी में उन्हें यह समाचार दिया जाए ताकि दिल का दौरा पड़ने की हालत में वह स्थिति को संभाल सके।

    शहर के जानेमाने दिल के डॉक्टर से संपर्क किया गया।

    डॉक्टर साहब ने घरवालों को आश्वस्त किया और कहा, "आप लोग चिंता ना करें, दादाजी को यह समाचार मैं खुद दूंगा और उन्हें कुछ नहीं होगा, यह मेरी गारंटी है।"

    डॉक्टर साहब दादाजी के पास गए कुछ देर इधर उधर की बातें कीं फिर बोले, "दादाजी, मैं आपको एक शुभ समाचार देना चाहता हूं। आपके नाम दस करोड़ की लाटरी निकली हैं।"

    दादाजी बोले, "अच्छा! लेकिन मैं इस उम्र में इतने पैसों का क्या करूंगा पर अब तूने यह खबर सुनाई है तो जा, आधी रकम मैंने तुझे दी।"

    यह सुन डॉक्टर साहब धम् से जमीन पर गिरे और उनके प्राण पखेरू उड़ गए।
  • आधुनिक गरीब परिवार!

    एक गरीब खानदान था।

    बाप गरीब, माँ गरीब।

    बच्चे थे वो भी गरीब।

    खानदान में नौकर थे वो भी गरीब।

    उनके पास एक टूटी ही हुई एकॉर्ड कार थी।

    ड्राईवर भी उसी टूटी हुई कार में बच्चो को स्कूल छोड़कर आता था।

    बच्चो के पास पुराना मोबाइल फोन N95 था।

    बच्चे हफ्ते में सिर्फ तीन बार ही मैकडोनाल्ड जाते थे।

    घर में सिर्फ 4 AC थे वो भी सेकंड हैंड खरीदे हुए थे।

    सारा खानदान बड़ी मुश्किल से ऐश कर रहा था
  • कम नंबर!

    काम पर से थक हार कर घर आया, सोफे पर बैठ गया। पत्नी ने पानी का गिलास दिया और बच्चे ने मार्कशीट सामने रखी।

    हिंदी 44
    अंग्रेजी 35
    गणित 37

    आगे कुछ पढ़ने से पहले... "बेटा ! क्या मार्क है ये ? गधे, शर्म नहीं आती तुझे ? नालायक है तू नालायक..."

    पत्नी: अरे आप सुनो तो?

    "तू चुप बैठ! तेरे लाड़ प्यार ने ही बिगाड़ा है इसे. नालायक,अरे बाप दिनभर मेहनत करता है और तू ऐसे मार्क लाता है।"

    लड़का चुपचाप गर्दन नीचे।

    "अरे सुनो... तो!"

    "तू चुप कर, एक शब्द भी मत बोल. आज इसको बताता हूँ।"

    "अरे!"

    पत्नी का आवाज बढ़ गयी, मैं थोडा रुक गया।"

    "सुन तो लो जरा!"

    "सुबह अलमारी साफ करते समय मिली आपकी ही मार्कशीट है वो..."

    भयानक सन्नाटा!
  • कंजूसी की हद!

    एक कंजूस आदमी जिंदगी भर अपने पुत्रों को कम से कम खर्च करने की हिदायतें देता रहा था। जब वह मरणासन्न स्थिति में पहुंच गया तो पुत्र आपस में मशवरा करने लगे कि किस प्रकार पिता की इच्छा के अनुसार कम से कम खर्च में उनकी अंतिम यात्रा निपटाई जाए।

    एक ने कहा, "ऐम्बुलेंस में ले जाया जाए।"

    दूसरे ने कहा, "नहीं, ऐम्बुलेंस बहुत मंहगी होगी। ठेलागाड़ी में ले चलते हैं।"

    तीसरे ने कहा, "क्यों न साइकिल पर बांधकर ले चलें?"

    यह सब सुनकर कंजूस से रहा नहीं गया। उठकर बोला, "कुछ मत करो, मेरा कुर्ता और जूते ला दो। मैं पैदल ही चला जाऊंगा।