• मैं और इनकम टैक्स!

    मैं और मेरी कमाई,
    अक्सर ये बातें करते हैं,
    टैक्स न लगता तो कैसा होता?

    तुम न यहाँ से कटती,
    न तुम वहाँ से कटती,

    ना मैं उस बात पे हैरान होता,
    सरकार उस बात पे तिलमिलाती,

    टैक्स न लगता तो ऐसा होता,
    टैक्स न लगता तो वैसा होता...

    मैं और मेरी कमाई,
    "ऑफ़ शोर" ये बातें करते हैं...

    ये टैक्स है या मेरी तिज़ोरी खुली हुई है?
    या आईटी की नज़रों से मेरी जेब ढीली हुई है,

    ये टैक्स है या सरकारी रेन्सम,
    कमाई का धोखा है या मेरे पैसों की खुशबू,

    ये इनकम की है सरसराहट
    कि टैक्स चुपके से यूँ कटा,
    ये देखता हूँ मैं कब से गुमसुम,
    जब कि मुझको भी ये खबर है,
    तुम कटते हो, ज़रूर कटते हो,
    मगर ये लालच है कि कह रहा है,
    कि तुम नहीं कटोगे, कभी नहीं कटोगे,

    मज़बूर ये हालात इधर भी हैं, उधर भी,
    टैक्स बचाई ,कमाई इधर भी है, उधर भी,
    दिखाने को बहुत कुछ है मगर क्यों दिखाएँ हम,
    कब तक यूँही टैक्स कटवाएं और सहें हम,
    दिल कहता है आईटी की हर रस्म उठा दें,
    सरकार जो है उसे आज गिरा दें,
    क्यों टैक्स में सुलगते रहें, आईटी को बता दें,

    हाँ, हम टैक्स पेयर हैं,
    टैक्स पेयर हैं,
    टैक्स पेयर हैं,
    अब यही बात पेपर में इधर भी है, उधर भी...
    ये कहाँ आ गए हम... यूँ ही टैक्स भरते भरते! 
  • मानहानि का दावा!

    एक महिला ने एक आदमी पर मान हानि का दावा ठोक दिया आरोप यह था कि वह आदमी उसे सूअर कहकर बुलाता था, आदमी दोषी पाया गया और उसे जुर्माना चुकाना पड़ा!

    मुकदमे के बाद उस आदमी ने जज से पूछा जज साहब इसका मतलब हुआ कि मैं श्रीमती प्रीतो को सूअर नहीं बुला सकता?

    जज ने कहा: जी, हाँ बिल्कुल!

    फिर उस आदमी ने कहा तो इसका मतलब यह भी हुआ कि मैं किसी सूअर को श्रीमती प्रीतो नहीं बुला सकता?

    जज ने कहा तुम बिना किसी डर के सूअर को श्रीमती प्रीतो बुला सकते हो इस पर कोई मुकदमा भी नहीं कर सकता!

    फिर वह आदमी श्रीमती प्रीतो कि तरफ मुड़ा और उसकी आँखों में आँखें डालकर कहने लगा श्रीमती प्रीतो जी नमस्ते!
  • तारीफ भी पड़ गयी महंगी!

    एक आदमी की शादी को 20 साल हो गए थे लेकिन उसने आज तक अपनी पत्नी के हाथ से बने खाने की तारीफ नहीं की।

    एक दिन जब वो दफ्तर से घर वापस आ रहा था तो रास्ते में उसे एक बाबा मिले। बाबा ने उस आदमी को रोका और कुछ खाने को माँगा तो आदमी ने बाबा को खाना खिला दिया। बाबा आदमी से बहुत प्रसन्न हुए तो उन्होंने आदमी से कहा कि अगर उसे कोई समस्या है तो बताओ, हम उसका हल कर देंगे।

    आदमी बोला, "बाबा जी, बहुत समय से कोशिश कर रहा हूँ लेकिन काम में तरक्की नहीं हो रही।"

    बाबा: बेटा, तुमने अपनी पत्नी के खाने की कभी तारीफ नहीं की। अपनी पत्नी के खाने की तारीफ करो, तुम्हें अवश्य तरक्की मिलेगी।

    आदमी बाबा को धन्यवाद बोल कर चल दिया।

    घर पहुँच कर उसकी पत्नी ने खाना परोसा, आदमी ने खाना खाया और खाने की जम कर तारीफ की।

    पत्नी एक दम से उठी और रसोई घर से बेलन लेकर आई और आदमी की पिटाई शुरू कर दी।

    आदमी: क्या हुआ? मैं तो तुम्हारे खाने की तारीफ कर रहा हूँ।

    पत्नी: 20 साल हो गए आज तक तो खाने की तारीफ नहीं की और आज जब पड़ोसन खाना दे कर गयी है तो तुम्हें ज़िन्दगी का मज़ा आ गया।
  • शर्मीली बुढिया!

    एक बार एक बूढी महिला अपने घर के आँगन मैं बैठी स्वेटर बुन रही थी कि तभी अचानक एक आदमी उसकी आँख बचाते हुए उसकी कुर्सी के नीचे बम रख कर भाग गया।

    आदमी को इतनी जल्दी में भागते हुए देख, कुछ लोगों को शक हुआ तो उन्होंने आँगन में झाँक कर देखा तो उनकी नज़र बुढिया की कुर्सी के नीचे रखे बम पर पड़ी।

    यह देख कर उन लोगों ने बुढिया को आगाह करने के लिए घर के बाहर से ही चिल्लाना शुरू कर दिया "बुढिया बम है, बुढिया बम है।"

    यह शोर-गुल सुन कर बुढिया एक पल के लिए चौंकी और फिर शर्माते हुए बोली, " अरे अब वो बात कहाँ, बम तो मैं जवानी में होती थी।"