• बिना टिकट यात्रा!

    एक पहलवान बस में चढ़ा।

    कंडक्टर: भाई साहब, टिकट!

    पहलवान: हम टिकट नहीं लेते।

    कंडक्टर ने पहलवान की तरफ देखा पर चाहकर भी कुछ न बोल सका।

    ऐसे पहलवान हर रोज चढ़ता, पर टिकट न लेता और यही बात कंडक्टर के दिल पर लग गई।

    ऐसे ही 6 महीने बीत गए और अब कंडक्टर ने भी पहलवान की तरह अपनी बॉडी बना ली।

    अब पहलवान चढ़ा, तो कंडक्टर बोला: टिकट।

    पहलवान: हम टिकट नहीं लेते।

    कंडक्टर (छाती चौड़ी करके): क्यों नहीं लेते?

    पहलवान: क्योंकि हमने पास बनवा रखा है।
  • पुरुष!

    भगवान की ऐसी रचना जो बचपन से ही त्याग और समझौता करना सीखता है।

    वह अपने चॉकलेटस का त्याग करता है अपने दांत बचाने के लिये।

    वह अपने सपनो का त्याग कर माता-पिता की खुशी के लिये उनके अनुसार कैरियर चुनता है।

    वह अपनी पूरी पॉकेट-मनी गर्लफ़्रेंड के लिये गिफ़्ट खरीदने में लगाता है।

    वह अपनी पूरी जवानी बीवी-बच्चों के लिये कमाने में लगाता है।

    वह अपना भविष्य बनाने के लिये लोन लेता है और बाकी की ज़िंदगी उस लोन को चुकाने में लगाता है।

    इन सबके बावज़ूद वह पूरी ज़िंदगी पत्नी, माँ और बॉस से डांट सुनने में लगाता है।

    पूरी ज़िंदगी पत्नी, माँ, बॉस और सास उस पर कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं।

    उसकी पूरी ज़िंदगी दूसरों के लिये ही बीतती है।

    इसलिए हमेशा एक पुरुष का सम्मान करें|
  • मुफ़्त्खोर!

    एक पार्टी में काफी मुफ्त का खाना खाने बहुत लोग घुस गए थे। यह देख मेजबान महिला परेशान हो गयी।

    उसने अपने पति से कहा: मेहमान ज्यादा हैं, खाना कम! कैसे चलेगा?

    पति ने कुछ देर सोचा और बोला कि मैं कुछ करता हूँ।

    इतना कह कर वो बाहर गया और बोला: लड़के वालों की तरफ से जो लोग आए हैं, कृपया अलग खड़े हो जाएं।

    करीब 50 लोग अलग खड़े हो गए।

    इसके बाद उसने कहा: लड़की वालों की तरफ से जो आए हैं, कृपया वे भी अलग खड़े हो जाएं।

    इस बार करीब 40 लोग अलग खड़े हो गए।

    अब वह मुस्कुराते हुए बोला: कृपया आप सभी लोग बाहर निकल जाएं, क्योंकि यह हमारे बच्चे की बर्थडे पार्टी है!
  • खुंखार अपराधी!

    एक दिन संता अपने घर के सामने पौधों को पानी दे रहा था इतने में वहां पुलिस की गाड़ी आयी, गाड़ी से पुलिस वाले उतरे और संता के घर के दूसरी तरफ भागने लगे और फिर थोड़ी देर में वापिस आ गए, पौधों को पानी देते हुए संता वह सब देख रहा था संता को लगा की पुलिस शायद किसी अपराधी का पीछा कर रही है!

    संता ने पौधों को पानी देते हुए पूछा साहब किसे ढूंढ रहे हो?

    पुलिसवाला संता के पास आया उसने जेब से एक तस्वीर निकाली और संता को दिखाते हुए कहा, यह एक खुंखार अपराधी की तस्वीर है और मैं उसी को ढूंढ रहा हूँ, तुमने अभी उसे यहां से जाते हुए देखा तो नही पुलिसवाले ने पूछा:

    संता ने तस्वीर हाथ में ली और गौर से उस तस्वीर की तरफ देखा, तस्वीर पुलिस को वापिस देते हुए संता ने कहा नही... नही देखा साहब!

    पुलिसवाला तस्वीर वापिस लेकर वहां से जाने लगा थोड़ी दूर जाने के बाद संता ने आवाज लगाई, साहब एक मिनट!

    पुलिसवाला पलटकर संता के पास गया जरा वह तस्वीर तो दिखावो पुलिसवाले ने फिर से तस्वीर निकालकर संता को दिखाई!

    संता ने थोड़ी देर तस्वीर की तरफ गौर से देखा और कहा:

    मेरी समझ में एक बात नहीं आती इतना खुंखार अपराधी था तो जब उसकी तस्वीर खिंची तभी उसको क्यों नही पकड़ लिया?