• अच्छा पडोसी!

    पठान अपनी बेगम को हॉस्पिटल में दाखिल करवाने गया तो वहां उसे उसका सिंधी दोस्त मिल गया।

    सिंधी: अरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

    पठान: वो मैं तुम्हारी भाभी को यहाँ दाखिल करवाने लाया हूँ।

    सिंधी: क्यों क्या हुआ भाभी को?

    पठान: ओए क्या बताऊँ यार, बाथरूम में नहा रही थी और अचानक चक्कर खा कर गिर गयी। सिर ज़मीन से जा टकराया, खून ही खून बस यार।

    सिंधी: ओह यार यह तो बहुत बुरा हुआ। अब कैसी हैं?

    पठान: अब तो ठीक है। डॉक्टर ने कहा कि अगर और थोडी देर हो जाती तो कोमा में जा सकती थी।

    सिंधी: फिर भाभी ने आवाज लगाई कैसे?

    पठान: ओ पागल, आवाज कहाँ से लगाती, बेहोश पडी थी वो।

    सिंधी: फिर तुम्हें कैसे पता चला?

    पठान: अरे वो तो अच्छा हुआ सामने वाले मकान से खान उसको नहाते हुए देख रहा था। उसी ने आकर हमको बताया वरना ना जाने क्या हो जाता? खुदा भला करे उस खान का, वरना आज-कल तू बता यार अच्छा पडोसी कहाँ मिलता है?
  • देरी के लिए खेद!

    पठान अपने बेटे के लिए एक खिलौना रेलगाड़ी खरीद कर लाया।

    खिलौना देने के कुछ देर बाद जब वह बेटे के कमरे में गया तो देखा कि बच्चा रेलगाड़ी से खेल रहा है और कह रहा है कि जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए। रेलगाड़ी दो मिनट से ज्यादा नहीं रुकेगी।

    बच्चे के मुंह से यह भाषा सुनकर पठान को गुस्सा आ गया। उसने बच्चे को जोर से दो तमाचे लगाए और फिर कभी इस तरह से न बोलने की चेतावनी दी और बोला, "मैं दो घंटे के लिए बाजार जा रहा हूं। तब तक तुम सिर्फ पढ़ोगे, समझे।"

    दो घंटे बाद बाद जब पठान लौटकर आया तो बच्चे को पढ़ते हुए देखा। यह देखकर उसका दिल पसीज गया और उसने बच्चे को फिर रेलगाड़ी से खेलने की इजाजत दे दी।

    अबकी बार उसने बच्चे को कहते हुए सुना जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए। गाड़ी पहले ही एक उल्लू के पट्ठे की वजह से दो घंटे लेट हो चुकी है।
  • मैं कौन हूँ?

    पठान ट्रेन में एक सीट पर अकेला लेटा हुआ था।

    एक यात्री आया और बोला, "भाई साइड में हो जायें, मुझे भी बैठना है।"

    पठान: तुझे पता नहीं मैं कौन हूँ?

    यात्री डर के दूसरी जगह पर जाकर बैठ गया।

    फिर एक पहलवान आया और बोला, साइड में हो जा छोटू मुझे भी बैठना है।

    पठान ने उसे भी रोब दिखाते हुए बोला, "तुझे पता नहीं मैं कौन हूँ?"

    पहलवान ने पठान की गर्दन पकड़ के उठा लिया और बोला, "हाँ, बोल तू कौन है?"

    पठान: जी मैं 'बीमार' हूँ, 2 दिन से तेज़ बुखार है।
  • टूट गया पठान का भरोसा!

    पठान एक बार में बैठा शराब पी रहा था। थोड़ी देर बाद उसके साथ वाली कुर्सी पर एक और आदमी आकर बैठ गया। दोनों मस्ती में शराब पी रहे थे और टीवी देख रहे थे।

    ख़बरों का समय हो गया था तो दोनों खबरें देखने लगे। ख़बरों में दिखा रहे थे कि एक आदमी एक बिल्डिंग पर चढ़ कर कूदने की तैयारी कर रहा था।

    पठान: तुम्हें क्या लगता है वो कूदेगा?

    आदमी: हाँ बिलकुल, वो कूद जायेगा।

    पठान: नहीं मुझे नहीं लगता।

    आदमी: शर्त लगा लो, वो कूद जायेगा।

    पठान: ठीक है, यह रहे 500/- रुपये वो नहीं कूदेगा।

    आदमी ने भी 500/- रुपये निकाल कर मेज़ पर रखे और बोला, "वो कूद जायेगा।"

    थोड़ी देर बाद ही बिल्डिंग पर चढ़े आदमी ने छलांग लगा दी और नीचे गिरते ही मर गया।

    पठान बहुत उदास हो गया और आदमी को 500/- रुपये पकड़ाने लगा।

    आदमी: मैं यह नहीं ले सकता। मैंने इससे पहले वाले बुलेटिन में देखा था कि वो आदमी कूद गया था।

    पठान: वो तो मैंने भी देखा था। पर यह नहीं पता था कि वो दोबारा भी ऐसा कर सकता है।