• पठान की होशियारी!

    पठान: हकीम साहब, मेरे दोस्त की तबियत बहुत ख़राब है, उसे नींद नहीं आ रही है।
    कृपया नींद आने की कोई दवाई दे दीजिये।

    हकीम: यह लो पुड़िया और इस में से पच्चीस पैसे के सिक्के पर जितनी आये उतनी रख कर पानी से दे देना।

    अगले दिन पठान घबराया हुआ आया।

    पठान: हकीम साहब, आपने जो दवाई दी थी उसे खाकर मेरे दोस्त की मौत हो गयी।

    हकीम: वो कैसे? यह बताओ तुमने दवाई दी कैसे थी?

    पठान: आपने कहा था कि पच्चीस पैसे के सिक्के पर जितनी आये उतनी रखकर खिला देना।
    मेरे पास पच्चीस पैसे का सिक्का तो नहीं था। इसलिए मैंने पांच पैसे के सिक्के पर रखकर पांच बार दे दी!
  • पठान की बहादुरी!

    एक बार पठान अपनी बेगम के साथ मेला देखने गया। मेले में हवाई जहाज की सैर भी करवाते थे।

    पठान ने सोचा कि चलो हम भी हवाई जहाज की सैर कर लेते हैं लेकिन 200 रुपये की टिकट सुनकर पठान का मुंह लटक गया।

    यह देखकर चालक बोला, "आप हवाई जहाज में आधा घंटा सैर कर सकते हैं। इस दौरान अगर आप के मुंह से आवाज़ निकली तो मैं आप से टिकट के पैसे लूंगा, नहीं तो यह सैर आप के लिए मुफ्त।"

    पठान सुन कर खुश हो गया और मान गया।

    दोनों जहाज में बैठ गए और चालक ने अपने करतब दिखाने शुरू कर दिए।
    चक्कर बनाया, उल्टा घुमाया और कभी डाइव लगायी।

    आखिर में उसने जहाज नीचे उतारा।

    नीचे उतरने के बाद चालक बोला, "मान गए पठान साहब आपको, इस तरह के करतबों के साथ तो किसी की भी चीखें निकल जाती लेकिन आपने तो एक आवाज़ नहीं निकाली।"

    पठान ने अपने माथे से पसीना पोंछा और बोला, "अब आपको कैसे बताऊँ कि किस तरह मैंने अपने आप को रोका यहाँ तक कि बेगम के बाहर गिरने पर भी मैं नहीं बोला क्योंकि 200 रुपये का सवाल था।"