• पप्पू की प्रेमकथा!

    पप्पू अपने दोस्त बंटी से अपनी नयी बनी गर्लफ्रेंड की तारीफ़ कर रहा था।

    पप्पू: कसम से इस बार जो गर्लफ्रेंड बनायी है बहुत मस्त है, पहले वाली तीनो से ज्यादा मस्त।

    बंटी: अच्छा वो कैसे?

    पप्पू: देख मेरी पहली वाली गर्लफ्रेंड दिल्ली से थी एक बार उसको जब मैंने टेडी बियर गिफ्ट किया तो वो बोली, " ओ माइ गोड वाऊ सो क्यूट।"

    बंटी: दूसरी वाली?

    पप्पू: वो लुधियाना से थी, जब उसको मैंने टेडीबियर गिफ्ट किया तो वो बोली, " ओ जी रब दी सौ किन्ना सोना टेडी है।

    बंटी: और तीसरी वाली?

    पप्पू: वो लखनऊ से थी जब उसको टेडी दिया तो वो बोली, " या अल्लाह! कितना खूबसूरत तोहफा है।"

    बंटी: और जो अब है?

    पप्पू: वो हरियाणा से है जब मैंने उसको टेडी दिया तो बोलती, "रे बावड़ी पूँछ ! यो के दे दिया भालू शा।
  • 20-20 परीक्षा!

    एक बार एक स्कूल मास्टर ने अपनी क्लास के बच्चों से पूछा, "बच्चों, जिस तरह आज 20-20 क्रिकेट आने से क्रिकेट का मज़ा बढ़ गया है, उसी तरह अगर तुम्हारी परीक्षाओं का तरीक़ा भी बदल दिया जाए तो किस तरह इन परीक्षाओं को ज़्यादा से ज़्यादा रोमांचक बनाया जा सकता है?"

    सारे बच्चे चुप। किसी को कोई जवाब नहीं सूझा। जब काफ़ी देर तक कोई नहीं बोला तो पप्पू इस सवाल का जवाब देने के लिए खड़ा हो गया। मास्टर जी उसके ख़ुराफ़ाती दिमाग़ को जानते थे। एक बार तो उन्होंने आंखें तरेरीं और न चाहते हुए भी बोले, "अच्छा जल्दी से बताओ क्या सुझाव देना चाहते हो?"

    पप्पू गम्भीर होकर बोला, "मास्टरजी हमारा पेपर एक घंटा 20 मिनट का होना चाहिए।"

    मास्टर जी: और क्या कहना चाहते हो?

    पप्पू: हर बीस मिनट के बाद छात्रों को आपस में बातें करने के लिए दो मिनट का "स्ट्रेटेजिक टाइम आउट" मिलना चाहिए।

    मास्टर जी: और बोलो?

    पप्पू: बच्चों को परीक्षा के दौरान एक "Free Hit" भी मिलनी चाहिए, जिसमें बच्चे किसी भी एक सवाल का उत्तर अपनी मर्ज़ी से लिख सकें।

    मास्टर जी: और?

    पप्पू: पहले 20 मिनट में "पॉवर प्ले" होना चाहिए जिसमें ड्यूटी वाला मास्टर कमरे से बाहर रहे।

    मास्टर जी: बहुत अच्छे! और क्या चाहते हो?

    पप्पू: और हर 20 मिनट बाद "चीयर लीडर्स" कमरे में आकर 02 मिनट तक डान्स प्रस्तुत करें।

    यह सुनते ही मास्टर जी बेहोश हो गए पर क्लास के सभी बच्चों ने पप्पू को कंधों पर बैठा लिया और नाचने लगे।
  • पप्पू की संस्कृत

    संस्कृत की क्लास मे गुरूजी ने पूछा, "पप्पू, इस श्लोक का अर्थ बताओ। 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"

    पप्पू: राधिका शायद रस्ते में फल बेचने का काम कर रही है।

    गुरू जी: मूर्ख, ये अर्थ नही होता है। चल इसका अर्थ बता, 'बहुनि मे व्यतीतानि, जन्मानि तव चार्जुन'।

    पप्पू: मेरी बहू के कई बच्चे पैदा हो चुके हैं, सभी का जन्म चार जून को हुआ है।

    गुरू जी: अरे गधे, संस्कृत पढता है कि घास चरता है। अब इसका अर्थ बता, 'दक्षिणे लक्ष्मणोयस्य वामे तू जनकात्मजा'।

    पप्पू: दक्षिण में खडे होकर लक्ष्मण बोला जनक आज कल तो तू बहुत मजे में है।

    गुरू जी :अरे पागल, तुझे 1 भी श्लोक का अर्थ नही मालूम है क्या?

    पप्पू: मालूम है ना।

    गुरु जी: तो आखिरी बार पूछता हूँ इस श्लोक का सही सही अर्थ बताना, 'हे पार्थ त्वया चापि मम चापि!' क्या अर्थ है जल्दी से बता?

    पप्पू: महाभारत के युद्ध मे श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन से कह रहे हैं कि...

    गुरू जी उत्साहित होकर बीच में ही कहते हैं, "हाँ, शाबाश, बता क्या कहा श्रीकृष्ण ने अर्जुन से?

    पप्पू: भगवान बोले, 'अर्जुन तू भी चाय पी ले, मैं भी चाय पी लेता हूँ। फिर युद्ध करेंगे'।

    गुरू जी बेहोश!
  • अच्छा शिक्षक!

    एक बार गणित के शिक्षक ने पप्पू को बुलाया और अपनी कापी चेक कराने के लिए कहा।

    पप्पू: मास्टरजी मैंने तो होमवर्क किया ही नहीं।

    मास्टर: तुम्हारा तो पढने में मन ही नहीं लगता, अब बताओ की होमवर्क ना करने का तुम्हारे पास क्या बहाना है?

    पप्पू: जी मास्टर जी वो कल आपने जो गुणा-भाग समझाया था ना वो मुझे समझ नहीं आया।

    मास्टर: नालायक तुम्हे वह सामान्य सा गुणा-भाग समझ नहीं आया, मैं जब तुम्हारी उम्र का था तो 15-15 अंकों वाला गुणा-भाग चुटकियों में कर देता था।

    पप्पू: कर देते होंगे मास्टर जी, क्योंकि आपको पक्का कोई अच्छा टीचर पढाता होगे।