• अनोखा दौर!

    चाणक्य से जब ये प्रश्न पूछा गया कि - आप भी तो योग्य हैं, फिर चंद्रगुप्त को राजा क्यों बनाना चाहते हैं?

    चाणक्य ने कहा, "राजा सामाजिक जीवन जीने वाला, पत्नी, पुत्र व पुत्रियों से सम्पन्न, समृद्धशाली व्यक्ति ही होना चाहिये, जिससे वो हर रिश्ते के दुःख को समझ सके और जनता से सही व्यवहार कर सके। इसलिए मैं सन्यासी होने के कारण इस पद हेतु सर्वदा अनुचित हूं। जिस राजा का परिवार ही नहीं वो देश के लोगों की मुश्किलें क्या समझेगा।"

    यही कारण है कि 3 साल से भारत के लोग इसी दौर से गुजर रहे हैं।
  • महिला रक्षा मंत्री बनने के बाद की बातें!

    महिला रक्षा मंत्री बनने के बाद भविष्य में होने वाले रक्षा सौदों के संवाद...

    "इस टैंक में दूसरी डिजाइन है क्या?"

    "यह गोला इस तोप के साथ मैच नहीं हो रहा है।"

    "इस राईफल में लटकन नहीं लगाओगे?"

    "इतने सारे गोले लिए हैं, थोड़े कारतूस फ्री नहीं दोगे?"

    "थोड़ा बाजिब लगाईये भाईसाब।"

    "रुस वाले तो आप से कम भाव में दे रहे हैं।"

    "हमेशा आपके यहाँ से ही लेते हैं।"

    "पिछली बार कैसे गोले दिये थे, एक भी नहीं फूटा।"

    "जो भी हो, बदलना तो पड़ेंगे ही।"

    "इस राईफल को धोने के बाद जंग तो नहीं लगेगी?"

    "अभी नहीं लेना, बस टैंक ही देखना था।"

    "ये मना कर रहे हैं, राईफल वापिस ले लो।"

    "टैंक का कलर तो नहीं जायेगा?"
  • राजनैतिक ज्ञान!

    नेता का बेटा अपने पिता से बोला, "पापा मुझे भी राजनीति में आना हैं, मुझे कुछ टिप्स दो।"

    नेता: बेटा, राजनीति के तीन कठोर नियम होते हैं।

    "चलो पहला नियम समझाता हूँ", यह कहकर नेता जी ने बेटे को छत पर भेज दिया और ख़ुद नीचे आकर खड़े हो गए।

    नेता जी: छत से नीचे कूद जाओ।

    बेटा" पापा, इतनी ऊंचाई से कुदूंगा तो हाथ पैर टूट जायेंगे।

    नेता जी: बेझिझक कूद जा, मैं हूँ ना, पकड़ लूँगा।

    लड़के ने हिम्मत की और कूद गया, पर नेताजी नीचे से हट गए।

    बेटा धड़ाम से ओंधे मुंह गिरा और कराहते हुए बोला, "आपने तो कहा था मुझे पकड़ोगे, फिर हट क्यों गए?"

    नेता जी: ये हैं पहला सबक "राजनीति में अपने बाप का भी भरोसा मत करो।"
  • मोदी की चाय!

    आज पूरा देश मोदी जी कि चाय पी रहा है हालांकि किसी ने मोदी जी को चाय बेचते नहीं देखा पर वो ऐसे बेचते होंगे...

    मोदी: भाइयो-बहनो...बोलो चाय चाहिए की नहीं चाहिए?
    ग्राहक: हाँ भाई एक बना दो।

    मोदी: और जोर से बोलिये चाहिए की नहीं चाहिए?
    ग्राहक: हाँ-हाँ भाई चाहिए।

    मोदी: बोलो भाइयो बहनो चाय के लिए पतीला गैस पर रखना चाहिए या नहीं रखना चाहिए?
    ग्राहक: हाँ-हाँ भाई रख दो।

    मोदी: मेरे साथ बोलिये मित्रो पतीले में पानी डालना चाहिए या नहीं डालना चाहिए?
    ग्राहक: हाँ भाई डाल दो।

    मोदी: पीछे वाले बोलिये पतीले में दूध डालना चाहिए या नहीं डालना चाहिए?
    ग्राहक: अरे यार... डाल दो भाई।

    मोदी: मेरे साथ बोलिये इसमें चाय पत्ती और अदरक डालना चाहिए या नहीं डालना चाहिए?
    ग्राहक: अरे यार तुम करो यार जल्दी।

    थोड़ी देर के बाद:
    ग्राहक: भाई बन गई चाय?
    मोदी: मित्रो... मुझे माफ़ कर दो। मैं गैस जलाना भूल गया था।