• मोदी और जनता!

    चुनाव से पहले:
    मोदी : यस, अब सही समय आ गया है
    जनता : क्या आप विदेश यात्राओं पर जाओगे?
    मोदी : नहीं
    जनता : हमारे लिए काम करोगे?
    मोदी : हाँ , बहुत
    जनता : महगांई बढ़ाओगे?
    मोदी : इसके बारे में तो सोचो भी मत
    जनता : आप हमे जॉब दिलाने में मदद करोगे?
    मोदी : हां, जहाँ कहाँ कर सकता हूँ, वहाँ वहाँ करूंगा
    जनता : क्या आप अडानी अम्बानी के लिए काम करोगे?
    मोदी : पागल हो गए हो क्या? बिलकुल नहीं
    जनता : क्या हम आप पर भरोसा कर सकते है?
    मोदी : यस.
    जनता : नमो नमो
    चुनाव के बाद : अब नीचे से ऊपर पढ़ो
  • नेताओं का विश्वास!

    नेताओं से भरी एक बस जा रही थी अचानक बस सड़क से नीचे उतरकर खेत में एक पेड़ से जा टकराई।

    खेत मालिक दौड़ता हुआ आया सब कुछ देखकर उसने एक गढ्ढा खोदना शुरू किया और फिर उसमें नेताओं को दफना दिया।

    कुछ दिन बाद पुलिस को बस के एक्सीडेंट के बारे में पता लगा पुलिस ने किसान से पूछा कि सारे नेता कहां गए?

    आदमी ने बताया कि उसने सभी को दफना दिया है पुलिस ने पूछा, सब मर गए थे क्या?

    आदमी बोला, "नही, कुछ कह रहे थे कि वे नही मरे, पर आप तो जानते ही हैं कि ये नेता झूठ कितना बोलते हैं। अब उनकी बात का विश्वास नहीं किया जा सकता न?"
  • मज़बूरी की मार!

    बचपन में मेरे गाँव में 5 - 6 तगड़े कुत्ते थे। उन की आपस में ज़बरदस्त दुश्मनी थी। सब एक दूसरे के खून के प्यासे। लेकिन जब कई सालों बाद मैं गांव गया तो देखा वो कुत्ते एक दूसरे को चाट रहे थे, साथ में अठखेलियां कर रहे थे।

    एक बुजुर्ग से जब इस बारे में बात की तो बुजुर्ग ने बड़ा ही मज़ेदार ज़वाब दिया। उन्होंने कहा, "गली के कुते, जवानी के दिनों में भले ही एक दूसरे के कट्टर शत्रु हों, किन्तु बुढ़ापे में दाद - खुजली‬ से ग्रस्त बेदम और बेकार होते ही वे दोस्त बनकर एक दूसरे के सारे ज़ख्म चाटने लगते हैं।"

    नोट: इस कहानी का लालू, नितीश, मुलायम, शरद यादव या देवगौड़ा आदि से कोई संबंध नही है पर फिर भी आप जोड़ना चाहें तो मेरी तरफ से पूर्ण स्वतंत्रता है।
  • बाकी पैसे कहाँ हैं?

    एक मंत्री जी भाषण दे रहे थे उसमें उन्होंने एक कहानी सुनाई:

    एक व्यक्ति के तीन बेटे थे, उसने तीनों को 100-100 रूपए दिए और ऐसी वस्तु लाने को कहा जिससे कमरा पूरी तरह भर जाये।

    पहला पुत्र 100 रूपए की घास लाया पर उससे पूरी तरह कमरा नही भरा।

    दूसरा पुत्र 100 रूपए का कपास लाया उससे भी कमरा पूरी तरह नही भरा।

    तीसरा पुत्र 1 रूपए की मोमबती लाया और उससे पूरा कमरा प्रकाशित हो गया।

    आगे उस मंत्री ने कहा हमारे प्रधानमंत्री उस तीसरे पुत्र की तरह है, जिस दिन से राजनीति में आये है उसी दिन से हमारा देश उज्जवल प्रकाश और समृद्धि से जगमगा रहा है।

    तभी पीछे से किसी आदमी की आवाज आई वो सब तो ठीक है बाकी के 99 रूपए कहाँ है?