• उम्मीद पर पानी!

    एक शादीशुदा जोड़ा बाग में टहल रहा था।

    अचानक एक बड़ा सा कुत्ता उनकी तरफ झपटा, दोनों को ही लगा कि ये उन्हें काट लेगा। बचने का कोई रास्ता न देख पति ने तुरंत 'अपनी पत्नी को' गोद में ऊपर तक उठा लिया ताकि कुत्ता काटे तो उसे काटे उसकी पत्नी को नहीं।

    कुत्ता बिलकुल नज़दीक आकर रुका, कुछ देर तो भौंका और फिर पीछे की तरफ भाग गया।

    पति ने चैन की सांस ली और इस उम्मीद में पत्नी को गोद से उतारा कि पत्नी उसे गले लगाएगी। तभी उसकी तमाम उम्मीदों पर पानी फेरते हुए उसकी बीवी चिल्लाई, `मैंने आज तक लोगों को कुत्ते को भगाने के लिए पत्थर या डंडा फेंकते तो देखा था पर ऐसा आदमी पहली बार देख रही हूँ जो कुत्ते को भगाने के लिए अपनी बीवी को फेंकने के लिये तैयार था।`

    शिक्षा: शादीशुदा लोगों को अपनी बीवियों से कभी तारीफ की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
  • खाने में क्या बनाऊं?

    पत्नी: खाने में क्या बनाऊं?

    पति: कुछ भी बना लो, क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो?

    पति: दाल चावल बना लो।

    पत्नी: सुबह ही तो खाये थे।
    पति: तो रोटी सब्जी बना लो।

    पत्नी: बच्चे नहीं खायेंगे।

    पति: तो छोले पूरी बना लो।

    पत्नी: मुझे तली हुई चीज़ें भारी लगती हैं।

    पति: अंडे की भुर्जी बना लो।

    पत्नी: आज वीरवार है।

    पति: परांठे?

    पत्नी: रात को परांठे नहीं खाने चाहिए।

    पति: होटल से मंगवा लेते हैं।

    पत्नी: रोज-रोज बाहर का नहीं खाना चाहिए।

    पति: कढ़ी चावल?

    पत्नी: दही नहीं है।

    पति: इडली सांभर?

    पत्नी: समय लगेगा, पहले बोलना था।

    पति: एक काम करो मैग्गी बना लो।

    पत्नी: पेट नहीं भरता मैग्गी से।

    पति: तो फिर क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप बोलो।
  • तारीफ भी पड़ गयी महंगी!

    एक आदमी की शादी को 20 साल हो गए थे लेकिन उसने आज तक अपनी पत्नी के हाथ से बने खाने की तारीफ नहीं की।

    एक दिन जब वो दफ्तर से घर वापस आ रहा था तो रास्ते में उसे एक बाबा मिले। बाबा ने उस आदमी को रोका और कुछ खाने को माँगा तो आदमी ने बाबा को खाना खिला दिया। बाबा आदमी से बहुत प्रसन्न हुए तो उन्होंने आदमी से कहा कि अगर उसे कोई समस्या है तो बताओ, हम उसका हल कर देंगे।

    आदमी बोला, "बाबा जी, बहुत समय से कोशिश कर रहा हूँ लेकिन काम में तरक्की नहीं हो रही।"

    बाबा: बेटा, तुमने अपनी पत्नी के खाने की कभी तारीफ नहीं की। अपनी पत्नी के खाने की तारीफ करो, तुम्हें अवश्य तरक्की मिलेगी।

    आदमी बाबा को धन्यवाद बोल कर चल दिया।

    घर पहुँच कर उसकी पत्नी ने खाना परोसा, आदमी ने खाना खाया और खाने की जम कर तारीफ की।

    पत्नी एक दम से उठी और रसोई घर से बेलन लेकर आई और आदमी की पिटाई शुरू कर दी।

    आदमी: क्या हुआ? मैं तो तुम्हारे खाने की तारीफ कर रहा हूँ।

    पत्नी: 20 साल हो गए आज तक तो खाने की तारीफ नहीं की और आज जब पड़ोसन खाना दे कर गयी है तो तुम्हें ज़िन्दगी का मज़ा आ गया।
  • एक शादीशुदा की दुखी कलम से योग दिवस

    योग दिवस को मैं कुछ इस तरह से मना रहा हूँ,
    रात उसके पैर दबाए थे अब पोछा लगा रहा हूँ।

    धो रहा हूँ बर्तन और बना रहा हूँ चपाती,
    मेरे ख्याल से यही होती है कपालभाति।

    एक हाथ से पैसे देकर, दुजे हाथ में सामान ला रहा हूँ मैं,
    और इस प्रक्रिया को अनुलोम विलोम बता रहा हूँ मैं।

    सुबह से ही मैं घर के सारे काम कर रहा हूँ,
    बस इसी तरह से यारो प्राणायाम कर रहा हूँ।

    मेरी सारी गलतियों की जालिम ऐसी सजा देती हैं,
    योगो का महायोग अर्थात मुर्गा बना देती हैं।

    हे मोदी, हे रामदेव अगर आप गृहस्थी बसाते,
    तो हम योग दिवस नहीं पत्नी दिवस मनाते।