• पत्नी और घड़ी के बीच का संबंध!

    समानताएं:
    1. घड़ी चौबीस घंटे टिक-टिक करती रहती है, और पत्नी चौबीस घंटे किट-किट करती रहती है।

    2. घड़ी की सूइयाँ घूम-फिर कर वहीं आ जाती हैं। उसी प्रकार पत्नी को आप कितना भी समझा लो, वो घूम- फिर कर वहीं आ जायेगी और अपनी ही बात मनवायेगी।

    3. घड़ी बिगड़ जाये तो मैकेनिक के यहाँ जाती है। पत्नी बिगड़ जाये तो मायके जाती है।

    4. घड़ी को चार्ज करने के लिये सेल (बैटरी) का प्रयोग होता है, और पत्नी को चार्ज करने के लिये सैलेरी का प्रयोग होता है।

    विषमतायें:
    1. घड़ी में जब 12 बजते हैं तो तीनों सूइयाँ एक दिखाई देती हैं, लेकिन पत्नी के जब 12 बजते हैं तो एक पत्नी भी 3-3 दिखाई देती है।

    2. घड़ी के अलार्म बजने का फिक्स टाइम है, लेकिन पत्नी के अलार्म बजने का कोई फिक्स टाइम नहीं है।

    3.घड़ी बिगड़ जाये तो रूक जाती है, लेकिन जब पत्नी बिगड़ जाये तो शुरू हो जाती है।

    4. सबसे बड़ा अंतर ये कि घड़ी को जब आपका दिल चाहे बदल सकते हैं, मगर पत्नी को चाह कर भी बदल नहीं सकते, उल्टा पत्नी के हिसाब से आपको खुद को बदलना पड़ता है।
  • पत्नी की मासूमियत!

    एक दंपत्ति की शादी को साठ वर्ष हो चुके थे। उनकी आपसी समझ इतनी अच्छी थी कि इन साठ वर्षों में उनमें कभी झगड़ा तक नहीं हुआ। वे एक दूजे से कभी कुछ भी नहीं छिपाते थे। हां, पत्नी के पास उसके मायके से लाया हुआ एक डिब्बा था जो उसने अपने पति के सामने कभी नहीं खोला था। उस डिब्बे में क्या है वह नहीं जानता था। कभी उसने जानने की कोशिश भी की तो पत्नी ने यह कह कर टाल दिया कि सही समय आने पर बता दूंगी।

    आखिर एक दिन बुढि़या बहुत बीमार हो गई और उसके बचने की आशा न रही। उसके पति को तभी ख्याल आया कि उस डिब्बे का रहस्य जाना जाये। बुढि़या बताने को राजी हो गई। पति ने जब उस डिब्बे को खोला तो उसमें हाथ से बुने हुये दो रूमाल और 50,000 रूपये निकले। उसने पत्‍‌नी से पूछा, "यह सब क्या है?"

    पत्नी ने बताया, "जब उसकी शादी हुई थी तो उसकी दादी ने उससे कहा था कि ससुराल में कभी किसी से झगड़ना नहीं। यदि कभी किसी पर क्रोध आये तो अपने हाथ से एक रूमाल बुनना और इस डिब्बे में रखना।"

    बूढ़े की आंखों में यह सोचकर खुशी के मारे आंसू आ गये कि उसकी पत्नी को साठ वर्षों के लम्बे वैवाहिक जीवन के दौरान सिर्फ दो बार ही क्रोध आया था। उसे अपनी पत्‍‌नी पर सचमुच गर्व हुआ। खुद को संभाल कर उसने रूपयों के बारे में पूछा, "इतनी बड़ी रकम तो मैंने तुम्हे कभी दी ही नहीं थी, फिर ये कहां से आये?"

    "रूपये! वे तो मैंने रूमाल बेच बेच कर इकठ्ठे किये हैं।" पत्नी ने मासूमियत से जवाब दिया।
  • शादी के बाद पति - पत्नी!

    शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है, जरा गौर कीजिए:

    पहले साल: मैंने कहा जी खाना खा लीजिए, आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं।
    दूसरे साल: जी खाना तैयार है, लगा दूं?
    तीसरे साल: खाना बन चुका है, जब खाना हो तब बता देना।
    चौथे साल: खाना बनाकर रख दिया है, मैं बाजार जा रही हूं, खुद ही निकाल कर खा लेना।
    पांचवे साल: मैं कहती हूं आज मुझ से खाना नहीं बनेगा, होटल से ले आओ।
    छठे साल: जब देखो खाना, खाना और खाना, अभी सुबह ही तो खाया था।

    शादी के बाद पति कैसे बदलते हैं, जरा गौर कीजिए:

    पहले साल: जानू संभलकर उधर गड्ढा है।
    दूसरे साल: अरे यार देख के उधर गड्ढा है।
    तीसरे साल: दिखता नहीं उधर गड्ढा है।
    चौथे साल: अंधी है क्या गड्ढा नहीं दिखता।
    पांचवे साल: अरे उधर - किधर मरने जा रही है गड्ढा तो इधर है।
  • सास से प्यार!

    यह एक जग प्रसिद्ध सच है कि सभी बहुओं को अपनी सास से परेशानी रहती है।

    ऐसे ही एक दिन सभी बहुएं इकट्ठी हुई और उन्होंने फैसला किया कि, वे सब अपनी सास से माफ़ी मांगेगी और कहेंगी, उन्होंने जो भी किया उनसे वो गलती से हुआ।

    एक हफ्ते बाद सभी बहुओं ने पिकनिक जाने का कार्यक्रम बनाया, जिसमें पूरे परिवार के साथ अपनी अपनी सास को भी ले गयी।

    सारी सास एक ही बस में थी जो सबसे आगे चली थी रास्ते में उनकी बस का एक्सिडेंट हो गया।

    और सभी सास मर गयी, सारी बहुएं जोर-जोर से बिलख-बिलख कर रो रही थी।

    पर एक बहु को शायद कुछ ज्यादा ही दुःख हुआ वो जमीन पर हाथ पटक पटक कर रो रही थी। सभी उसे सांत्वना देकर कह रहे थे, कम से कम तुम्हारी सास बिना किसी चिंता के मरी है। तुम्हारा उससे कोई झगड़ा नहीं था पर वो अभी भी जोर-जोर से चिल्ला रही थी।

    जब वो बार-बार बोलने पर चुप नहीं हो रही थी तो एक औरत ने उसे पूछा, "तुम इतना क्यों चिल्ला रही हो, क्या तुम्हारी सास ज्यादा खास थी?"

    उस औरत ने अपने आप को थोड़ा संभाला और सिसकते हुए कहा, "नहीं, उनसे बस छूट गयी है।"