• दिखावों पे ना जाओ अपनी अक्ल लगाओ!

    एक ट्रेन मेँ एक पंडित एक गुज्जर एक बनिया और एक जाट सफर कर रहे थे।

    पंडित ने रौब झाडते हुऐ 100 का नोट निकाला और उस पर तम्बाकू डाल कर उसको बीडी बना कर पीने लगा।

    फिर गुज्जर ने 500 का नोट निकाला उसने भी पंडित की तरह बीडी बनायी और पीने लगा।

    अब बनिया कहाँ पीछे रहने वाला था, उसने 1000 का नोट निकाला और बीडी बनाकर पीने लगा।

    अब आ गयी जाट की बारी।

    जाट ने चेकबुक निकाली एक करोड की रकम भर के चेक की बीडी बनायी और पीने लगा।

    सब बेहोश और जाट मदहोश!
  • जरूरी निवेदन!

    सेवा में,
    मुख्य अध्यापक जी,

    श्रीमान जी,

    बात नयुं ए कि इब श्कूल मा जी नई लगता अर रात ने नींद भी ना आती। दरअसल श्कूल में छोरियों की भारी कमी हो रही है। अर मारी क्लास मा तो छोरी है ही कोइनी। बाकी क्लासां मा जो थोड़ी बहुत हैं पूरी भूंडी शक्ल की हैं। देखने ने भी जी ना करता अर नखरे मेरी ससुरियों के आसमान ते ऊँचे सै। इस्ते अलावा कोई माषटरनी भी कोई ख़ास ना सै।

    कुछ नी ते चार-पांच सुथरी सुथरी काम आली ही रख लियो।

    आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

    आपका आज्ञाकारी बालक।
  • सेर पे सवा सेर!

    एक छोरा नया नया ब्याहा था, पहली बार ससुराल गया।

    उसनै घणा बोलण की आदत थी, चुपचाप ना रहया जाया करता। उसकी सासू भी कुछ कम ना थी, सारा दिन फिजूल की बात करती रही।

    सांझ नै सास परेशान होगी, छोरा तै उसतैं भी घणा बोलै था। वा आपणे उस बटेऊ तैं बोली, "बेटा, सुसराड़ में घणा ना बोल्या करते।"

    छोरे नै फट जवाब दिया, "तू के आपणी बूआ कै आ रही सै? तेरी भी तै ससुराड़ सै!!"
  • ज़ुल्मी तोता!

    अपने हरयाणे आले तो तोते बी जुल्मी होवे सै।

    दिल्ली आला आदमी अपने हरयाणे में आ रहा था एक मेले में घुमण।

    उड़े उसने एक तोता पसंद आ जा से तो वो दुकान आले ते बुझे से, "अक इसमें के खासियत से?"

    दुकानदार उस तोते की एक टाँग खीच दे सै तो तोता बोल्या, "गुड मॉर्निंग।"

    भाई वो आदमी उस तोते ने घणा ऐ राजी होके खरीद लेजा से अपने घरा।

    आगले दिन तड़के ऐ तड़क वो आदमी तोते की एक टाँग खीच दे सै तो तोता बोल्या, "गुड मॉर्निंग।"

    इब उस आदमी ने सोची अक इसकी दूसरी टाँग और खीच दू तो यो और भी बढ़िया बोलेगा, जुकर हैव ए नाईस डे।

    उसने तोते की दूसरी टाँग भी खीच दी तो तोता बोल्या, "मेरी सासु के गेरे गा के"