• गर्व की बात!

    हिंदी भाषी राज्यों में, दुकानों आदि के जितने भी बोर्ड दिखाई देते हैं, उनमें लिखे हुए पूरे बोर्ड में एक आधा शब्द तो अंग्रेजी का जरूर रहता है। जैसे:

    संजय सर्विस स्टेशन
    अजय मेडिकल स्टोर
    विजय कॉपी सेंटर
    जय बुक शॉप
    संजना माॅल
    बबलू हेयर कटिंग
    शिवा बार एंड होटल
    गणेश लॉज
    ज्योति हॉस्पिटल आदि।

    सिर्फ एक ही बोर्ड ऐसा नजर आया जो हमेशा पूर्ण हिंदी में ही लिखा हुआ होता है जिससे हिंदी भाषी होने का अभिमान महसूस किया जा सकता है एवं हमें भारतीय होने का गर्व महसूस होता है।

    "ठेका देशी शराब"!
  • दामाद और ससुराल दौरा!

    सभी माननीय दामादों की ससुराल दौरे से जुड़ी आवश्यक जानकारी जनहित में जारी

    पहली बार:
    पूरी, 2 सब्ज़ी, चिकन या मटन ( दामाद जी की इच्छानुसार ), फिश फ्राई, रायता,सलाद, मिठाई और अंत में जबरदस्ती दो मिठाई।

    दूसरी बार:
    पूरी, 1 सब्ज़ी, चिकन ( बिना दामाद जी को पूछे),गोभी फ्राई, सलाद, मिठाई

    तीसरी बार:
    पराठा-सब्ज़ी, भिंडी फ्राई, प्याज-टमाटर काट कर और हलवा

    चौथी बार:
    पराठा-आलू का भुजिया सब्ज़ी, प्याज-टमाटर काट कर, और खाना परोसते हुए पूछा जाएगा कि चिकन बनाएँ क्या?

    पांचवी बार
    जल्दी मे लगते हैं, खाना भी खायेंगे क्या?

    छठी बार:
    अरे बाद में बैठिये पहले मुन्नू को स्कूल छोड़ आएये और लौटते समय सब्ज़ी लेते आना फिर खाना बनेगा।
  • अक्ल बड़ी या भैंस!

    एक बार पठान जहाज़ में एक सीट पर बैठ गया और वहाँ से उठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

    लोगों ने बहुत मिन्नत की लेकिन वो न माना और बोला, "पठान का ज़ुबान एक है, हम अपना फैंसला नहीं बदलेगा।"

    तभी एक आदमी आया और पठान के कान में कुछ बोला तो पठान एकदम उठकर अगली सीट पर बैठ गया।

    सब लोग हैरान हो गए और उस आदमी से पूछा कि उसने ऐसा क्या कहा जो पठान मान गया।

    आदमी ने कहा कि मैंने पठान से पूछा कि आप कहाँ जाओगे?

    पठान ने मुझे कहा, "दुबई।"

    तो मैंने पठान से कहा, "दुबई की सीट अगली है, यह तो अमेरिका की सीट है।"
  • केलकुलेटर का धोखा!

    एक डॉक्टर के पास एक बेहाल मरीज़ गया।

    मरीज़: डॉ. साहब पेट में बहुत दर्द हो रहा है।

    डॉ: अच्छा, ये बताओ आखिरी बार खाना कब खाया था?

    मरीज़: खाना तो रोज ही खाता हूँ।

    डॉ: अच्छा-अच्छा, (2 ऊँगली उठाते हुए ) आखिरी बार कब गए थे?

    मरीज़: जाता तो रोज ही हूँ पर होता नहीं है।

    डॉकटर समझ गए कि कब्ज़ है। अन्दर बहुत सारी बोतलें पड़ी थी उस में से एक उठा लाये और साथ ही केल्क्युलेटर भी लेते आये। फिर पूछा, "घर कितना दूर है तुम्हारा?"

    मरीज़: 1 किलोमीटर।

    डॉक्टर ने केलकुलेटर पे कुछ हिसाब किया और फिर बोतल में से चार चम्मच दवाई निकाल कर एक कटोरी में डाली।

    डॉ: गाडी से आये हो या चल कर?

    मरीज़: चल कर।

    डॉ: जाते वक्त भाग के जाना।

    डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से बाहर निकाल ली।

    डॉ: घर कौन सी मंज़िल पे है?

    मरीज़: तीसरी मंज़िल पे।

    डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

    डॉ: लिफ्ट है या सीढियाँ चढ़ के जाओगे?

    मरीज़: सीढियां।

    डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

    डॉ: अब आखिरी सवाल का जवाब दो। घर के मुख्य दरवाजे से टॉयलेट कितना दूर है?

    मरीज़: करीब 20 फुट।

    डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

    डॉ: अब मेरी फीस दे दो मुझे पहले फिर ये दवाई पियो और फटाफट घर चले जाओ, कहीं रुकना नहीं और फिर मुझे फोन करना।

    मरीज़ ने वैसा ही किया। आधे घंटे बाद मरीज़ का फोन आया और एकदम ढीली आवाज में बोला, "डॉक्टर साहब, दवाई तो बहुत अच्छी थी आपकी पर आप अपना केलकुलेटर ठीक करवा लेना। हम 10 फुट से हार गये।