• प्रेम पत्र!

    एक सुन्दर युवती दवाईयों की एक दुकान के सामने काफी देर तक खडी थी। भीड़ छटने का इंतज़ार कर रही थी। दुकान का मालिक उसे शक की नजर से घूर रहा था।

    बहुत देर बाद जब दुकान मे कोई ग्राहक नही बचा, तो वह लड़की दुकान मे आयी।

    एक सेल्समन को धीरे से एक किनारे बुलाया।

    दुकान मालिक अब और भी ज्यादा चौकन्ना हो गया।

    लड़की ने धीरे से एक कागज़ सेल्समन की ओर बढाया और धीरे से फुसफुसायी,

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    "भैया, मेरी एक डॉक्टर के साथ शादी तय हो गयी है। आज उनकी पहली चिठ्ठी आयी है। थोडा पढ़कर सुनायेंगे क्या?
  • शेर और बंदर!

    एक बार जंगल में एक बहुत बड़े से गड्ढे में एक शेर गिर गया। परेशान होकर शेर यहाँ वहां देखने लगा पर उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।

    तभी वहां एक पेड़ पे एक बंदर आ गया। शेर को इस हाल में फंसा देखकर बंदर शेर का मजाक उडाने लगा।

    "क्यों शेर तू तो राजा बना फिरता है, अब तो तेरी अकल ठिकाने आ गयी न, अब शिकारी तुझे मारेंगे, तेरी खाल निकालकर दीवार पर सजायेंगे, तेरे नाखून और दांत निकाल कर दवाई बनायेंगे।

    तभी अचानक वो डाल जिस पे बंदर बैठा था, टूट गयी और बन्दर सीधे शेर के सामने आ गिरा।

    और गिरते ही बोला, "माँ कसम... माफ़ी मांगने के लिए कूदा हूँ।"
  • एक भेलपुरी अलग अलग दाम!

    एक भेलपुरी वाले का मेनू:

    1) भेलपुरी 10 रू
    2) स्पेशल भेलपुरी 12 रू
    3) व्हेरी स्पेशल भेलपुरी 15 रु
    4) एक्सट्रा स्पेशल भेलपुरी 16 रु
    5) डबल एक्सट्रा स्पेशल भेलपुरी 20 रु
    6) संडे स्पेशल भेलपुरी 25 रु
    (सिर्फ रविवार)

    भेलपुरी की अलग अलग टेस्ट चखने के लिए मैं रोज एक अलग भेलपुरी खाने लगा। पर जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि, हर एक भेलपुरी की एक ही टेस्ट है। आखिरकार एक दिन मैने उससे इस का कारण पुछा, "हर एक भेल की एक जैसा टेस्ट है?"

    भेलवाला: भेलपुरी मतलब भेलपुरी. . . सिर्फ 10 रु.
    स्पेशल भेलपुरी मतलब चमच धोया हुआ।
    व्हेरी स्पेशल भेलपुरी मतलब चमच और प्लेट, दोनों ही धोये हुए।
    एक्सट्रा स्पेशल भेलपुरी मतलब भेल देने से पहले हात धुले हुए।
    डबल एक्सट्रा स्पेशल भेलपुरी मतलब पीने का साफ पानी अलग से दिया जाता है।

    इतना बोलकर वह चुप हो गया।

    मैं: फिर संडे स्पेशल मतलब क्या?

    भेलवाला: संडे को मैं नाहता हूँ, इसलिए संडे स्पेशल अलग से।
  • समझदारी के नुक्सान!

    एक बार दो दोस्त गोरखपुर से दिल्ली जा रहे थे।

    डिब्बे में भीड़ ज्यादा थी तो उन्हें सीट नहीं मिल रही थी तो सीट के लिए उन्हें शरारत सूझी।

    उन्होंने अपने बैग से रबड़ का एक सांप निकाला और चुपके से डिब्बे में छोड़ दिया और चिल्लाने लगे।

    सांप... सांप!

    थोड़ी देर में डिब्बा खाली हो गया और उन्होंने जल्दी से बिस्तर जमाकर जगह रोक ली।

    सुबह जब आंख खुली, तो पांच बजे थे और गाड़ी किसी स्टेशन पर खड़ी थी।

    उन्होंने खिड़की से बाहर झांककर रेलवे के कर्मचारी से पूछा: यह कौन सा स्टेशन है?

    जवाब मिला: गोरखपुर।

    उन्होंने पूछा: क्या गाड़ी दिल्ली नहीं गई?

    कर्मचारी बोला: गाड़ी दिल्ली गई, लेकिन गाड़ी में सांप निकलने के कारण इस डिब्बे को काट दिया गया।