• पत्नी की मासूमियत!

    एक दंपत्ति की शादी को साठ वर्ष हो चुके थे। उनकी आपसी समझ इतनी अच्छी थी कि इन साठ वर्षों में उनमें कभी झगड़ा तक नहीं हुआ। वे एक दूजे से कभी कुछ भी नहीं छिपाते थे। हां, पत्नी के पास उसके मायके से लाया हुआ एक डिब्बा था जो उसने अपने पति के सामने कभी नहीं खोला था। उस डिब्बे में क्या है वह नहीं जानता था। कभी उसने जानने की कोशिश भी की तो पत्नी ने यह कह कर टाल दिया कि सही समय आने पर बता दूंगी।

    आखिर एक दिन बुढि़या बहुत बीमार हो गई और उसके बचने की आशा न रही। उसके पति को तभी ख्याल आया कि उस डिब्बे का रहस्य जाना जाये। बुढि़या बताने को राजी हो गई। पति ने जब उस डिब्बे को खोला तो उसमें हाथ से बुने हुये दो रूमाल और 50,000 रूपये निकले। उसने पत्‍‌नी से पूछा, "यह सब क्या है?"

    पत्नी ने बताया, "जब उसकी शादी हुई थी तो उसकी दादी ने उससे कहा था कि ससुराल में कभी किसी से झगड़ना नहीं। यदि कभी किसी पर क्रोध आये तो अपने हाथ से एक रूमाल बुनना और इस डिब्बे में रखना।"

    बूढ़े की आंखों में यह सोचकर खुशी के मारे आंसू आ गये कि उसकी पत्नी को साठ वर्षों के लम्बे वैवाहिक जीवन के दौरान सिर्फ दो बार ही क्रोध आया था। उसे अपनी पत्‍‌नी पर सचमुच गर्व हुआ। खुद को संभाल कर उसने रूपयों के बारे में पूछा, "इतनी बड़ी रकम तो मैंने तुम्हे कभी दी ही नहीं थी, फिर ये कहां से आये?"

    "रूपये! वे तो मैंने रूमाल बेच बेच कर इकठ्ठे किये हैं।" पत्नी ने मासूमियत से जवाब दिया।
  • अच्छा पडोसी!

    पठान अपनी बेगम को हॉस्पिटल में दाखिल करवाने गया तो वहां उसे उसका सिंधी दोस्त मिल गया।

    सिंधी: अरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

    पठान: वो मैं तुम्हारी भाभी को यहाँ दाखिल करवाने लाया हूँ।

    सिंधी: क्यों क्या हुआ भाभी को?

    पठान: ओए क्या बताऊँ यार, बाथरूम में नहा रही थी और अचानक चक्कर खा कर गिर गयी। सिर ज़मीन से जा टकराया, खून ही खून बस यार।

    सिंधी: ओह यार यह तो बहुत बुरा हुआ। अब कैसी हैं?

    पठान: अब तो ठीक है। डॉक्टर ने कहा कि अगर और थोडी देर हो जाती तो कोमा में जा सकती थी।

    सिंधी: फिर भाभी ने आवाज लगाई कैसे?

    पठान: ओ पागल, आवाज कहाँ से लगाती, बेहोश पडी थी वो।

    सिंधी: फिर तुम्हें कैसे पता चला?

    पठान: अरे वो तो अच्छा हुआ सामने वाले मकान से खान उसको नहाते हुए देख रहा था। उसी ने आकर हमको बताया वरना ना जाने क्या हो जाता? खुदा भला करे उस खान का, वरना आज-कल तू बता यार अच्छा पडोसी कहाँ मिलता है?
  • काम वाला फ़ोन!

    एक साहब के घर फ़ोन का बहुत अधिक बिल आने पर उन्होंने अपने घर के सभी लोगों को बुलाया और बोले, "देखो, मुझे इस बात पर बिल्कुल भी यकीन नही हो रहा है कि फ़ोन का इतना अधिक बिल कैसे आ सकता है? जबकि मैं तो सारे फ़ोन अपने ऑफिस के फ़ोन से करता हूँ।"

    पत्नी: जी बिल्कुल, मैं भी। मैं तो कभी भी इस फ़ोन से फ़ोन नही करती क्योंकि मेरे पास तो अपना ऑफिस वाला फ़ोन है।

    बेटा: मुझे भी तो मेरी कंपनी वालों ने बिल्कुल नया फ़ोन दिया है और मैं भी तो उसी से फ़ोन करता हूँ।

    आदमी: अगर सभी अपने काम वाले फ़ोन से फ़ोन करते हैं तो फिर इतना ज्यादा बिल कैसे आ सकता है?
    (यह कहते हुए साहब अपनी नौकरानी की तरफ देखने लगे।)

    नौकरानी: तो इसमें क्या दिक्कत है साहब? अगर सभी अपने काम वाले फ़ोन से ही फ़ोन करते हैं तो मैं भी तो वही करती हूँ।
  • मांग का महत्त्व!

    क्या आपने कभी सोचा है कि औरतें मांग क्यूं भरती हैं?
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    नहीं पता न...
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    मैं बताता हूँ।

    औरतें मांग इसलिए भरती हैं ताकि लोगों को पता चल जाए कि इस प्लाट की रजिस्ट्री हो चुकी है।

    पुरुष कभी मांग नहीं भरते क्योंकि ये तो गोचर भूमि है, इसकी रजिस्ट्री नही हो सकती।

    शादी के समय आपने देखा होगा वरमाला का समय होता है तब दुल्हन के साथ तीन चार और लडकियां आती हैं, उसका क्या तात्पर्य है?

    उसका तात्पर्य है कि जिस प्लाट की रजिस्ट्री हो रही होती है उसके नक्शे में आस-पास खाली प्लाट दिखाने पड़ते हैं।

    इसमे भी एक समस्या है कि कुछ की रजिस्ट्री हो चुकी होती है और बाकियों पर अवैध कब्जा चल रहा होता है।