• बादशाह का प्यार!

    एक बार एक बादशाह को एक लड़की पसंद आ गयी। उस लड़की का बाप सुनार था, बादशाह ने सुनार को दरबार में आने के लिए बुलावा भेजा।

    चार दिन गुजरने के बाद भी सुनार बादशाह के दरबार में नहीं आया तो बादशाह ने सुनार को गिरफ्तार करने के लिए अपने सिपाही भेज दिए।

    जब सिपाही सुनार के घर पहुंचे तो घर को ताला लगा हुआ था। बादशाह ने सिपाहियों को हुक्म दिया कि सुनार को ढूँढो।

    सिपाहियों ने सुनार को हर जगह ढूँढा, लेकिन वो उनको कहीं नहीं मिला, फिर उन्होंने एक तरकीब निकाली और ऐलान किया कि जो भी सुनार को ढूँढने में मदद करेगा उसे एक किलो सोना दिया जाएगा, फिर भी सुनार नहीं मिला।

    फिर ऐलान किया गया कि जो भी सुनार को छुपने में मदद करेगा उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा, फिर भी सुनार नहीं मिला, और सिपाहियों का सुनार को ढूँढने में सारा वक़्त ऐसे ही बर्बाद हुआ जैसे आप का इस को पढने में हुआ.... जिस का कोई मतलब नहीं है।

    हँसना मत, गुस्सा भी मत करना मेरे साथ भी ऐसे ही हुआ था। आप भी किसी और के साथ ऐसा करके बदला ले सकते हैं।
  • सपनो का मतलब!

    एक नवविवाहित जोड़ा दोपहर को अपने घर में सो रहा था। जागने पर पत्नी ने अपने पति से कहा, "जानते हो, अभी-अभी मैंने क्या सपना देखा?"

    पति: क्या?

    पत्नी: मैंने देखा कि तुम मेरे लिये नया सोने का हार लेकर आये हो। इस सपने का क्या क्या अर्थ हो सकता है?

    पति: यह तुम आज रात को जान जाओगी।

    रात को जब पति घर लौटा तो उसके हाथ में एक पैकेट था जो उसने अपनी पत्नी को दिया।

    मन ही मन खुश होते हुये, जब पत्नी ने उस पैकेट को खोला तो उसमें एक पुस्तक निकली जिसका नाम था, "1001 सपनों के अर्थ।"
  • एक ख़ास मुरब्बा!

    सामग्री:

    एक पति, कर्कश वाणी, व्यंगात्मक शब्द रचना, स्वाद के लिए धमकी की पत्तियां।

    बनाने की विधि:

    सुबह-सुबह पतिदेव के ऊपर ठण्डा पानी डालकर उन्हें जगाएं।

    जब पतिदेव अच्छी तरह धुल जाएँ तब उन्हें एक दम काली, ठण्डी, बिना शक्कर की बे-जायका चाय निगलने के लिए मजबूर करें साथ ही साथ पतिदेव को धीमे-धीमे कर्कश वचनों की आंच में पकने दें। जब वह थोड़े लाल-पीले होने लगें तो उन पर ससुराल की झूठी-सच्ची मनगढंत शब्दों की व्यंगात्मक संरचना का गरम मसाला डालिए। जब पतिदेव उबलने लगें तथा प्रेशर-कुकर की सीटी की तरह खड़खड़ाने लगें तो चुपचाप पलंग पर लेट कर सिसकियां भरने लगिए। अब पतिदेव को ठण्डा होने के लिए छोड़ दीजिए। आधे घंटे बाद जब दफ्तर जाने के लिए उन्हें देर होगी तो वह खुद ही मनाने चले आएंगे। लीजिए, तैयार हो गया पतिदेव का लजीज मुरब्बा।

    अब इन्हें या तो आप फरमाइशों की चपाती के साथ चखिए या फिर आश्वासनों के ब्रेड पर लगा कर खाइए!

    वैधानिक चेतावनी: यह व्यंजन दांपत्य जीवन के लिए हानिकारक है!!!
  • गीता सार!

    पिता, अपने बेटे से: ओ बेवकूफ़, मैंने तुमको गीता दी थी पढ़ने के लिए क्या तुमने गीता पढ़ी? कुछ दिमाग में घुसा?

    पुत्र: हाँ पिता जी, पढ़ ली और अब आप मरने के लिए तैयार हो जाओ (इतना कहते बेटे ने पिता की कनपटी पर तमंचा रख दिया)।

    पिता: बेटा ये क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारा बाप हूँ।

    पुत्र: पिता जी, ना कोई किसी का बाप है और ना कोई किसी का बेटा। ऐसा गीता में लिखा है।

    पिता: बेटा मैं मर जाऊंगा।

    पुत्र: पिता जी शरीर मरता है, आत्मा कभी नही मरती। आत्मा अजर है, अमर है।

    पिता: बेटा मजाक मत करो गोली चल जाएगी और मुझको दर्द से तड़पाकर मार देगी।

    पुत्र: क्यों व्यर्थ चिंता करते हो? किससे तुम डरते हो? गीता में लिखा है - नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः

    आत्मा को ना पानी भिगो सकता है और ना ही तलवार काट सकती, ना ही आग जला सकती। किस लिए डरते हो तुम?

    पिता: बेटा, अपने भाई बहनों के बारे में तो सोच, अपनी माँ के बारे में भी सोच।

    पुत्र: इस दुनिया में कोई किसी का नही होता। संसार के सारे रिश्ते स्वार्थों पर टिके हैं। ये भी गीता में ही लिखा है।

    पिता: बेटा मुझको मारने से तुझे क्या मिलेगा?

    बेटा: अगर इस धर्म युद्ध में आप मारे गए तो आपको स्वर्ग प्राप्ति होगी। मुझको आपकी संपत्ति प्राप्त होगी।

    पिता: बेटा ऐसा जुर्म मत कर।

    पुत्र: पिता जी आप चिंता ना करें। जिस प्रकार आत्मा पुराने जर्जर शरीर को त्याग कर नया शरीर धारण करती है, उसी प्रकार आप भी पुराने जर्जर शरीर को त्याग कर नया शरीर धारण करने की तयारी करें।

    अलविदा।

    शिक्षा - कलयुग की औलादों को सतयुग, त्रेतायुग या द्वापर युग की शिक्षा ना दें, क्योकि अकड़ हम सहते नहीं और भाव किसी को देते नहीं।