• बताते हैं!

    एक पुलिस वाला रास्ते में चेकिंग कर रहा था तभी सामने से एक आदमी आता दिखा।

    पुलिस वाले ने उससे पूछा कि इस लाल बैग में क्या है?

    आदमी ने कहा, बताते हैं बताते हैं।

    पुलिस वाले ने फिर पूछा, क्या है?

    आदमी ने फिर कहा, बताते हैं बताते हैं।

    पुलिस वाले को थोड़ा शक हुआ और वह उसे थाने ले आया।

    थाने में बम डिफ्यूज करने वालों को बुलाकर उसका बैग खुलवाया तो उसमें बताशे निकले।

    पुलिस वाले ने उससे कहा कि इसमें बताशे हैं तुम बोल क्यों नहीं रहे थे।

    आदमी ने कहा कि इत्ती देल से यही तो तह लहा था ती इतमें बताते हैं बताते हैं।
  • ख़ुशी मिलती है!

    एक आदमी ने एक वकील के ऑफिस में फ़ोन किया और वकील का नाम लेकर कहा कि मैं अपने वकील से बात करना चाहता हूँ।

    रिसेप्शन वाले ने कहा, "जी माफ़ कीजिये, पिछले हफ्ते ही उनका देहांत हो गया।"

    अगले दिन फिर से उस आदमी ने उसी तरह पूछा, "जी, क्या मैं अपने वकील के साथ बात कर सकता हूँ?"

    रिसेप्शन वाले ने फिर से वही बात कही कि माफ़ कीजिये उनका पिछले हफ्ते देहांत हो गया।

    अगले दिन फिर से उस आदमी ने फोन किया, "क्या मैं अपने वकील से बात कर सकता हूँ?"

    रिसेप्शन वाले ने उस दिन दुखी होकर उसे पूछ ही लिया, "सर आज ये आपका तीसरा दिन है, लगातार मैं आपको बता रहा हूँ कि आपके वकील मर चुके हैं। आप फिर भी बार-बार फोन करके क्यों पूछ रहे हैं?"

    उस आदमी ने बड़ी सहजता से जवाब दिया, "क्योंकि यह सुनकर मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है कि अब मेरे पैसे बच जायेंगे।"
  • बीवी हो तो ऐसी!

    पत्नी:खाने में क्या बनाऊँ?

    पति: कुछ भी बना लो क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो।

    पति: दाल चावल बना लो।

    पत्नी: सुबह ही तो खाए थे।

    पति: तो रोटी सब्जी बना लो।

    पत्नी: बच्चे नहीं खायेंगे।

    पति: तो छोले पूरी बना लो।

    पत्नी: मुझे तली हुई चीजों से परहेज़ है।

    पति: तो अंडा भुर्जी बना लो।

    पत्नी: आज बृहस्पतिवार है।

    पति: पराठे?

    पत्नी: रात को पराठे नहीं खाने चाहिए।

    पति: कढी-चावल?

    पत्नी: दही नहीं है।

    पति: इडली सांभर?

    पत्नी: समय लगेगा न, पहले बोलना था।

    पति: होटल से मंगवा लेते हैं।

    पत्नी: रोज़ रोज़ बाहर का खान ठीक नहीं है।

    पति: अच्छा मैग्गी बना लो।

    पत्नी: पेट नहीं भरेगा।

    पति: तो फिर क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो।
  • ग्रुप एडमिन को समर्पित!

    नाम: ग्रुप एडमिन

    हॉबी: बन्दूक से निकली गोली को हाथ से पकड़ना और शेर के दाँत तोड़कर जमा करना।

    रिकॉर्ड: एक बार जिराफ की गर्दन में गाँठ लगा दी थी।

    शर्मनाक पल: एक बार एक ही घूँसे में 100 हाँथियों को नहीं मार पाए। सिफ 99 ही मरे।

    पागलपन: एक बार सुनामी में तैरने निकल गए।

    उपलब्धि: ज्वालामुखी के लावे पर स्केटिंग की।

    खुद पर गर्व: जब इन्हें देख 40 फुट लम्बा अजगर डर कर भाग गया।

    एडमिन के अब तक के पराक्रम:

    विवाह भोज में दो बार भोजन करना।

    दूसरों की बरात में नाचना। परिचित हों अथवा ना हों।

    चुनाव के समय दो पार्टियों से पैसे लेकर तीसरे को वोट देना।

    बच्चों की क्रिकेट टीम का कैप्टन बनना।

    जब कहीं केक काटा जा रहा हो तो सबसे सामने खड़ा रहना।

    एडमिन पद से इस्तीफा देने की सिर्फ धमकी देना।