• एक परेशान आदमी की दास्तान!

    एक आदमी ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने की कोशिश में था तो ड्राइविंग लाइसेंस के लिए चौथी बार ड्राइविंग टेस्ट दिया, इस दौरान वो इतना मशहूर और पसंदीदा हो चुका था कि इस बार अफसर ने उसके लिए एक ही सवाल रखा था।

    सवाल: आप 120 की रफ्तार से एक ऐसी सड़क से गुजर रहे हो जिसके एक ओर ऊंचा पहाड़ और दूसरी तरफ गहरी खाई है, सामने दो औरतें आ जाती हैं एक जवान और एक बूढ़ी तो अब आप किसे मारेंगें?

    आदमी ने तुरंत जवाब लिखा कि मैं बूढ़ी औरत को मारूँगा।

    हस्बे मुताबिक़ आदमी इम्तिहान में फिर फेल हो गया। आदमी अफसर से मिला और वजह पूछी तो उसने आदमी को ध्यान से देखा और ठंडी सांस भर कर कहा, "भाई आपको आखिरी बार बता रहा हूँ कि आप ब्रेक मारेंगे, किसी औरत-वौरत को नहीं।
  • हिसाब बराबर!

    एक बार एक मरता हुआ पति अपनी पत्नी से अपराध स्वीकारोक्ति करते हुए बोला।

    पति: प्रिये, दो साल पहले अलमारी से तुम्हारा गोल्ड सेट मैंने ही चोरी किया था।

    पत्नी (रोते हुए): कोई बात नहीं जी।

    पति: एक साल पहले तेरे भाई ने तुझे जो 1 लाख रूपए दिए थे वो भी मैंने ही गायब किये थे।

    पत्नी: कोई बात नहीं मैंने आपको माफ़ किया।

    पति: तेरी कमेटी के पैसे भी मैंने ही चोरी किये थे।

    पत्नी: कोई बात नहीं जी, आपको ज़हर भी मैंने ही दिया है इसलिए हिसाब बराबर।
  • क्या खाओगे?

    पत्नी:खाने में क्या बनाऊँ?

    पति: कुछ भी बना लो क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो।

    पति: दाल चावल बना लो।

    पत्नी: सुबह ही तो खाए थे।

    पति: तो रोटी सब्जी बना लो।

    पत्नी: बच्चे नहीं खायेंगे।

    पति: तो छोले पूरी बना लो।

    पत्नी: मुझे तली हुई चीजों से परहेज़ है।

    पति: तो अंडा भुर्जी बना लो।

    पत्नी: आज बृहस्पतिवार है।

    पति: पराठे?

    पत्नी: रात को पराठे नहीं खाने चाहिए।

    पति: कढी-चावल?

    पत्नी: दही नहीं है।

    पति: इडली सांभर?

    पत्नी: समय लगेगा न, पहले बोलना था।

    पति: होटल से मंगवा लेते हैं।

    पत्नी: रोज़ रोज़ बाहर का खान ठीक नहीं है।

    पति: अच्छा मैग्गी बना लो।

    पत्नी: पेट नहीं भरेगा।

    पति: तो फिर क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो।
  • अनोखा दौर!

    चाणक्य से जब ये प्रश्न पूछा गया कि - आप भी तो योग्य हैं, फिर चंद्रगुप्त को राजा क्यों बनाना चाहते हैं?

    चाणक्य ने कहा, "राजा सामाजिक जीवन जीने वाला, पत्नी, पुत्र व पुत्रियों से सम्पन्न, समृद्धशाली व्यक्ति ही होना चाहिये, जिससे वो हर रिश्ते के दुःख को समझ सके और जनता से सही व्यवहार कर सके। इसलिए मैं सन्यासी होने के कारण इस पद हेतु सर्वदा अनुचित हूं। जिस राजा का परिवार ही नहीं वो देश के लोगों की मुश्किलें क्या समझेगा।"

    यही कारण है कि 3 साल से भारत के लोग इसी दौर से गुजर रहे हैं।