• सच्ची सोच!

    एक पति पत्नी अपनी शादी की पचासवीं सालगिरह मना रहे थे कि अचानक पति रोने लगा । पति को रोते देख पत्नी ने कारण पूछा।

    पति: प्रिये क्या तुम्हें याद है आज से पचास साल पहले तुम्हारे पिता ने हमें तुम्हारे घर के पीछे वाले बगीचे में छुपकर मिलते हुये रंगे हाथों पकड़ा था ?

    पत्नी: हाँ।

    पति: क्या तुम्हें यह भी याद है कि उस वक्त तुम्हारे पिता ने मुझसे क्या कहा था?

    पत्नी: क्या कहा था ? मुझे याद नहीं आ रहा।

    पति: उन्होनें कहा था कि अगर मैंने तुमसे शादी नहीं की तो वे मुझे पचास सालों के लिये जेल में डलवा देंगे।

    पत्नी: तो क्या हुआ ? तुमने तो शादी कर ली ना।

    पति: यही तो सोच रहा हूं कि अगर मैंने उनकी बात नहीं मानी होती तो कम से कम आज मैं आजाद हो गया होता।
  • कबूतर का शिकार

    एक बार चम्पकलाल ने एक कबूतर का शिकार किया। वह कबूतर जाकर एक खेत में गिरा। जब चम्पकलाल उस खेत में कबूतर को उठाने पहुंचा तभी एक किसान वहां आया और चम्पकलाल को पूछने लगा कि वह उसकी प्रोपर्टी में क्या कर रहा है?

    चम्पकलाल ने कबूतर को दिखाते हुए कहा - `मैंने इस कबूतर को मारा और ये मर कर यहाँ गिर गया मैं इसे लेने आया हूँ!`

    किसान - `ये कबूतर मेरा है क्योंकि ये मेरे खेत में पड़ा है!`

    चम्पकलाल - `क्या तुम जानते हो तुम किससे बात कर रहे हो?`

    किसान - `नहीं मैं नहीं जानता और मुझे इससे भी कुछ नहीं लेना है कि तुम कौन हो!`

    चम्पकलाल - `मैं हाईकोर्ट का वकील हूँ, अगर तुमने मुझे इस कबूतर को ले जाने से रोका तो मैं तुम पर ऐसा मुकदमा चलाऊंगा कि तुम्हें तुम्हारी जमीन जायदाद से बेदखल कर दूंगा और रास्ते का भिखारी बना दूंगा!`

    किसान ने कहा - `हम किसी से नहीं डरते ... हमारे गाँव में तो बस एक ही कानून चलता है... लात मारने वाला!`

    चम्पकलाल - `ये कौनसा क़ानून है ... मैंने तो कभी इसके बारे में नहीं सुना!`

    किसान ने कहा -`मैं तुम्हें तीन लातें मारता हूँ अगर तुम वापिस उठकर तीन लातें मुझे मार पाओगे तो तुम इस कबूतर को ले जा सकते हो!`

    चम्पकलाल ने सोचा ये ठीक है ये मरियल सा आदमी है, इसकी लातों से मुझे क्या फर्क पड़ेगा ! ये सोचकर उसने कहा - `ठीक है मारो!`

    किसान ने बड़ी बेरहमी से चम्पकलाल को पहली लात टांगों के बीच में मारी जिससे चम्पकलाल मुहं के बल झुक गया!

    किसान ने दूसरी लात चम्पकलाल के मुहं पर मारी जिसके पड़ते ही वह जमीन पर गिर गया!

    तीसरी लात किसान ने चम्पकलाल की पसलियों पर मारी।

    बड़ी देर बाद चम्पकलाल उठा और जब लात मारने के लायक हुआ तो किसान से बोला - `अब मेरी बारी है!`

    किसान - `चलो छोड़ो यार! ये कबूतर तुम ही रखो!`
  • पाँच मूर्ख!

    अकबर और बीरबल सभा मे बैठ कर आपस में बात कर रहे थे। अकबर ने बीरबल को आदेश दिया कि मुझे इस राज्य से 5 मूर्ख ढूंढ कर दिखाओ। बादशाह का हुक्म सुन बीरबल ने खोज शुरू की।

    एक महीने बाद बीरबल वापस आये लेकिन सिर्फ 2 लोगों के साथ।

    अकबर: मैने तो 5 मूर्ख लाने के लिये कहा था।

    बीरबल: जी हुजुर लाया हूँ, मुझे पेश करने का मौका दिया जाये।

    अकबर: ठीक है।

    बीरबल: हुजुर यह पहला मूर्ख है। मैने इसे बैलगाडी पर बैठ कर भी बैग सिर पर ढोते हुए देखा और पूछने पर जवाब मिला कि कहीं बैल के उपर ज्यादा भार ना हो जाए, इसलिये बैग सिर पर ढो रहा हूँ। इस हिसाब से यह पहला मूर्ख है।

    दूसरा मूर्ख यह आदमी है जो आप के सामने खडा है। मैने देखा इसके घर के ऊपर छत पर घास निकली थी। अपनी भैंस को छत पर ले जाकर घास खिला रहा था। मैने देखा और पूछा तो जवाब मिला कि घास छत पर जम जाती है तो भैंस को ऊपर ले जाकर घास खिला देता हूँ। हुजुर, जो आदमी अपने घर की छत पर जमी घास को काटकर फेंक नहीं सकता और भैंस को उस छत पर ले जाकर घास खिलाता है, तो उससे बडा मूर्ख और कौन हो सकता है।

    अकबर: और तीसरा मूर्ख?

    बीरबल: जहाँपनाह अपने राज्य मे इतना काम है। पूरी नीति मुझे संभालनी है, फिर भी मैं मूर्खों को ढूढने में एक महीना बर्बाद कर रहा हूॅ इसलिये तीसरा मूर्ख मै ही हूँ।

    अकबर: और चौथा मूर्ख?

    बीरबल: जहाँपनाह पूरे राज्य की जिम्मेदारी आप के ऊपर है। दिमाग वालों से ही सारा काम होने वाला है। मूर्खों से कुछ होने वाला नहीं है, फिर भी आप मूर्खों को ढूंढ रहे हैं। इस लिए चौथे मूर्ख जहाँपनाह आप हुए।

    अकबर: और पांचवा मूर्ख?

    बीरबल: जहाँ पनाह मैं बताना चाहता हूँ कि दुनिया भर के काम धाम को छोड़कर, घर परिवार को छोड़कर, पढाई लिखाई पर ध्यान ना देकर, यहाँ पूरा ध्यान लगा कर और पाँचवें मूर्ख को जानने के लिए जो इसे पढ़ रहा है वही पाँचवा मूर्ख है। इससे बडा मूर्ख दुनिया में कोई नहीं।
  • मदारी का बन्दर!

    एक मदारी सड़क के किनारे ढोल बजाकर बंदर का तमाशा दिखा रहा था।

    जैसे जैसे मदारी ढोल बजाता था, बंदर 25 फीट के बांस पर फटाफट चढ़ उतर रहा था।

    यह देखकर दो चोरों ने सोचा कि यह बंदर अगर उनके पास हो तो चोरी करने के लिए दरवाजा तोड़ने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। बंदर अंदर जाकर पहले ही चिटखनी खोल देगा।

    उन्होंने मदारी से बंदर खरीद लिया। फिर बंदर को ट्रेनिंग दी कि कैसे छत के रास्ते जाकर अंदर से चिटखनी खोलनी है।

    सारी तैयारी कर के रात को एक हवेली के पीछे पहुंच गए। बांस को दीवार के सहारे लगाया और दोनों दरवाजे के पास खड़े हो गए।

    बंदर ने चार फुट तक चढ़ाई की, फिर वहीं लटककर चोरों की ओर ताकने लगा।

    एक चोर यह देख कर दांत पीसते हुए बोला, 'अबे साले अब चढ़ भी जा।'

    बंदर गाली सुनते ही नीचे कूदकर आया और बोला, `अबे, चढूंगा तो तब ना, जब तुम ढोल बजाओगे!"