• निजी सचिव का गुस्सा!

    एक बार एक सुंदर सी निजी सचिव गुस्से में अपने प्रबंधक के कमरे से बाहर निकली तो उसकी एक सहेली ने उस से पूछा, "अरे क्या हुआ तू गुस्से में क्यों है?"

    सचिव: जब मैं अन्दर गयी तो बॉस ने मुझे बड़े प्यार से कुर्सी पर बैठने के लिए कहा।

    सहेली: फिर?

    सचिव: फिर उन्होंने बड़े प्यार से मुझ से पूछा की क्या मैं आज शाम को फ्री हूँ।

    सहेली:फिर ?

    सचिव: मैंने खुशी के मारे हां कर दी...और...

    सहेली : और?

    सचिव: और क्या....उस कम्बख्त ने मुझे 500 पेज टाइप करने को दे दिए।
  • उम्मीद पर पानी!

    एक शादीशुदा जोड़ा बाग में टहल रहा था।

    अचानक एक बड़ा सा कुत्ता उनकी तरफ झपटा, दोनों को ही लगा कि ये उन्हें काट लेगा। बचने का कोई रास्ता न देख पति ने तुरंत 'अपनी पत्नी को' गोद में ऊपर तक उठा लिया ताकि कुत्ता काटे तो उसे काटे उसकी पत्नी को नहीं।

    कुत्ता बिलकुल नज़दीक आकर रुका, कुछ देर तो भौंका और फिर पीछे की तरफ भाग गया।

    पति ने चैन की सांस ली और इस उम्मीद में पत्नी को गोद से उतारा कि पत्नी उसे गले लगाएगी। तभी उसकी तमाम उम्मीदों पर पानी फेरते हुए उसकी बीवी चिल्लाई, `मैंने आज तक लोगों को कुत्ते को भगाने के लिए पत्थर या डंडा फेंकते तो देखा था पर ऐसा आदमी पहली बार देख रही हूँ जो कुत्ते को भगाने के लिए अपनी बीवी को फेंकने के लिये तैयार था।`

    शिक्षा: शादीशुदा लोगों को अपनी बीवियों से कभी तारीफ की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
  • खाने में क्या बनाऊं?

    पत्नी: खाने में क्या बनाऊं?

    पति: कुछ भी बना लो, क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो?

    पति: दाल चावल बना लो।

    पत्नी: सुबह ही तो खाये थे।
    पति: तो रोटी सब्जी बना लो।

    पत्नी: बच्चे नहीं खायेंगे।

    पति: तो छोले पूरी बना लो।

    पत्नी: मुझे तली हुई चीज़ें भारी लगती हैं।

    पति: अंडे की भुर्जी बना लो।

    पत्नी: आज वीरवार है।

    पति: परांठे?

    पत्नी: रात को परांठे नहीं खाने चाहिए।

    पति: होटल से मंगवा लेते हैं।

    पत्नी: रोज-रोज बाहर का नहीं खाना चाहिए।

    पति: कढ़ी चावल?

    पत्नी: दही नहीं है।

    पति: इडली सांभर?

    पत्नी: समय लगेगा, पहले बोलना था।

    पति: एक काम करो मैग्गी बना लो।

    पत्नी: पेट नहीं भरता मैग्गी से।

    पति: तो फिर क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप बोलो।
  • मरवा दिया पठान ने!

    पठान अपनी बैलगाडी में अनाज के बोरे लादकर शहर ले जा रहा था। अभी गाँव से निकला ही था कि एक खड्डे में उसकी गाड़ी पलट गई। पठान गाड़ी को सीधी करने की कोशिश करने लगा। थोड़ी ही दूर पर एक पेड़ के नीचे बैठे एक राहगीर ने यह देखकर आवाज़ दी, "अरे भाई, परेशान मत हो, आ जाओ मेरे साथ पहले खाना खा लो फिर मैं तुम्हारी गाड़ी सीधी करवा दूंगा।"

    पठान: धन्यवाद, पर मैं अभी नहीं आ सकता। मेरा दोस्त बशीर नाराज़ हो जायेगा।

    राहगीर: अरे तुझसे अकेले नहीं उठेगी गाड़ी। तू आजा खाना खा ले फिर हम दोनों उठाएंगे।

    पठान: नहीं, बशीर बहुत गुस्सा हो जायेगा।

    राहगीर: अरे मान भी जाओ। आ जाओ तुम मेरे पास।

    पठान: ठीक है आप कहते हैं तो आ जाता हूँ।

    पठान ने जमकर खाना खाया फिर बोला, "अब मैं चलता हूँ गाड़ी के पास और आप भी चलिए। बशीर गुस्सा हो रहा होगा।"

    राहगीर ने मुस्कुराते हुए कहा, "चलो पर तुम इतना डर क्यों रहे हो? वैसे अभी कहाँ होगा बशीर?"

    पठान: गाड़ी के नीचे।