• एक एडमिन का दर्द

    एक तो खुद के मोबाइल पे पैसा खर्च करके इन सब को जोड़ो...

    फिर इन माँ के लाडलो के नखरे उठाओ.... कि कभी कोई लेफ्ट तो कभी कोई लेफ्ट होने की धमकी दे रहा है... जैसे कि मेरे लड़के की बारात मे आए हों।

    कोई कुछ मैसेज करे तो दूसरा बन्दा पहले उसका उल्टा मतलब निकालता है, फिर एडमिन की छाती पे मूंग दलता है कि उसे समझाओ।

    कभी कोई नासपीटा.... चुड़ैल की फोटो डाल कर नीचे लिख देता है, "I Love You Admin" जैसे एडमिन न हो गये सबके फूफा हो गए।

    और तो और पेपर वालों की, अख़बार वालों की भी जय हो...रोज के रोज यही छापते रहते हैं....एडमिन को होगी जेल!

    सालो... ये भी कोई बात हुई ...जैसे गरीब की लुगाई... सबकी भौजाई!

    सालो.... गंदगी कोई करे... समेटने की ठेकेदारी... एडमिन की!
  • यारों की यारी!

    रिजल्ट अगर अच्छा हो तो

    माँ: भगवान की कृपया है।
    पापा: बेटा किसका है।
    दोस्त: चल दारू पीते हैं।

    रिजल्ट अगर बुरा हो तो

    माँ: आग लगे ऐसे कॉलेज में।
    पापा: लाड-प्यार ने बिगाड़ दिया है।
    दोस्त: चल दारु पीते हैं।

    नौकरी लगने पर

    माँ: भगवान का लाख-लाख शुक्र है।
    पापा: मन लगा कर काम करना।
    दोस्त: चल दारु पीते हैं।

    नौकरी छूटने पर

    माँ: नौकरी ही खराब थी।
    पापा: कोई बात नहीं दूसरी मिल जाएगी।
    दोस्त: चल दारु पीते हैं।

    शादी पर

    माँ: सदा सुखी रहो।
    पापा: खुश रहो।
    दोस्त: चल दारु पीते हैं।

    प्यार में दिल टूटने पर

    माँ: बेटा भूल जा उसको।
    पापा: मर्द बन।
    दोस्त: चल दारु पीते हैं।

    दुनिया चाहे कितनी भी बदल जाये दोस्त कभी नहीं बदलते।
  • बुजुर्ग की दूरदृष्टि!

    एक बार रेलवे स्टेशन पर एक बुजुर्ग बैठे रेल का इंतजार कर रहे थे। वहाँ एक नवयुवक आया और उसने बुजुर्ग से पूछा, "अंकल, समय क्या हुआ है?"

    बुजुर्ग: मुझे नहीं मालूम।

    युवक: लेकिन आपके हाथ में घड़ी तो है, प्लीज बता दीजिए न कितने बजे हैं?

    बुजुर्ग: मैं नहीं बताऊँगा।

    युवक: पर क्यों?

    बुजुर्ग: क्योंकि अगर मैं तुम्हें समय बता दूँगा तो तुम मुझे थैंक्यू बोलोगे और अपना नाम बताओगे, फिर तुम मेरा नाम, काम आदि पूछोगे। फिर संभव है हम लोग आपस में और भी बातचीत करने लगें। हम दोनों में जान-पहचान हो जायेगी तो हो सकता है कि ट्रेन आने पर तुम मेरी बगल वाली सीट पर ही बैठ जाओ। फिर हो सकता है कि तुम भी उसी स्टेशन पर उतरो जहाँ मुझे उतरना है। वहाँ मेरी बेटी, जोकि बहुत सुन्दर है, मुझे लेने स्टेशन आयेगी। तुम मेरे साथ ही होगे तो निश्चित ही उसे देखोगे, वह भी तुम्हें देखेगी। हो सकता है तुम दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठो और शादी करने की जिद करने लगो। इसलिए भाई, मुझे माफ करो ! मैं ऐसा कंगाल दामाद नहीं चाहता जिसके पास समय देखने के लिए अपनी घड़ी तक नहीं है।
  • हिंदी के नुक्सान!

    सब लोग हिंदी को प्रोत्साहित कर रहे हों इसलिए मुझे भी आज हिंदी बोलने का शौक हुआ, घर से निकला और एक ऑटो वाले से पूछा, "त्री चक्रीय चालक, पूरे सुभाष नगर के परिभ्रमण में कितनी मुद्रायें व्यय होंगी?"

    ऑटो वाले ने घूर कर मेरी तरफ देखा और बोला,"अबे हिंदी में बोल।"

    मैंने कहा, "श्रीमान मै हिंदी में ही वार्तालाप कर रहा हूँ।"

    ऑटो वाले ने कहा, "मोदी जी पागल करके ही मानेंगे। चलो बैठो, कहाँ चलोगे?"

    मैंने कहा, "परिसदन चलो।"

    ऑटो वाला फिर चकराया, "अब ये परिसदन क्या है?"

    बगल वाले श्रीमान ने कहा, "अरे सर्किट हाउस जाएगा"

    ऑटो वाले ने सिर खुजाया और बोला, "बैठिये प्रभु।"

    रास्ते में मैंने पूछा, "इस नगर में कितने छवि गृह हैं?"

    ऑटो वाले ने कहा, "छवि गृह मतलब?"

    मैंने कहा, "चलचित्र मंदिर।"

    उसने कहा, "यहाँ बहुत मंदिर हैं...राम मंदिर, हनुमान मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, शिव मंदिर।"

    मैंने कहा, "भाई मैं तो चलचित्र मंदिर की बात कर रहा हूँ। जिसमें नायक तथा नायिका प्रेमालाप करते हैं।"

    ऑटो वाला फिर चकराया, "ये चलचित्र मंदिर क्या होता है?"

    यही सोचते सोचते उसने सामने वाली गाडी में टक्कर मार दी। ऑटो का अगला चक्का टेढ़ा हो गया।

    मैंने कहा, "त्री चक्रीय चालक तुम्हारा अग्र चक्र तो वक्र हो गया।"

    ऑटो वाले ने मुझे घूर कर देखा और बोला, "उतर जल्दी उतर! चल... भाग यहाँ से।"

    तब से यही सोच रहा हूँ अब और हिंदी बोलूं या नहीं?