• 4 नंबर और हम!

    4 दिनों का प्यार ओ रब्बा बड़ी लंबी जुदाई।

    4 दिनों की चाँदनी फिर अँधेरी रात।

    4 किताबें तो पढ़ ली, अब 4 पैसे भी कमा लो।

    आखिर हमारी भी 4 लोगों में इज़्ज़त है।

    ये बात 4 लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे कि 4 दिन की आई बहु ने ये कमाल कर दिया।

    4 दिन तो घर में टिक के बैठ जाती।

    तुम से क्या 4 कदम भी नहीं चला जाता?

    वो आई और 4 बातें सुना कर चली गयी।

    4 बोतल वोडका काम मेरा रोज़ का।
  • पत्नी तो पत्नी ही होती है!

    कार से किसी शादी मे जा रहे थे। रास्ते में कार पंक्चर हो गयी। बेचारा पति उतरा और स्टेपनी बदलने के काम पर लग गया। पत्नी भी उतरी और भुनुर भुनुर करने लगी।

    सुनिये उसका भुनुर भुनुर:

    देख कर तो चला ही नही सकते हो

    नुकीले पत्थर पर ही गाड़ी चढा दी

    पंक्चर तो हुआ ही डेंट भी लगा दिया

    पता नही कैसे ड्राईवर हो

    बीवी को बिठाकर भी रफ चलाते हो

    जरूर नजर इधर उधर होगी

    पता नही किसने तुमको लाईसेंस दिया

    एक काम ठीक से कर नही सकते

    पता नहीं स्टेपनी ठीक है भी कि नहीं

    अब शादी मे भी देर से पहुँचेंगे

    सोंचा था मेरी नयी साड़ी से सब जलेगी

    अब तो वरमाला के बाद ही पहुँचेंगे

    तुमसे तो मेरी कोई खुशी देखी नही जाती

    अरे बड़े अजीब आदमी हो

    कुछ कहोगे भी कि गूँगे ही बने रहोगे

    मेरी तो किस्मत ही फूटी थी कि तुम मिले

    बोलते बोलते बेचारी कांपने भी लगी

    इतने में एक साइकिल सवार आकर रूका और पूछा, "भाई साहब कुछ मदद करूँ?"

    पति: भाई तू इस मैडम से थोड़ी देर बात कर ले तो मैं ये स्टेपनी लगा लूँ।
  • थोड़ी सी नोंक-झोंक!

    थोड़ी सी नोंक-झोंक! निवेदन है सभी शादी-शुदा पतियों से कि ये सवांद अवश्य पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।

    पति: अजी सुनती हो?

    पत्नी: नहीं, मैं तो जनम से बहरी हूँ। बोलो?

    पति: मैंने ऐसा कब कहा?

    पत्नी: तो अब कह लो, पूरी कर लो एक साथ कोई भी हसरत अगर अधूरी रह गयी हो।

    पति: अरी भाग्यवान!

    पत्नी: सुनो एक बात... अब मुझे भाग्यवान तो कहना मत, फूट गए नसीब मेरे तुमसे शादी करके और कहते हो भाग्यवान हूँ।

    पति: एक कप चाय मिलेगी?

    पत्नी: एक कप क्यों? लोटा भर मिलेगी और सुनो किसको सुना रहे हो? मैं क्या चाय बना के नहीं देती?

    पति: अरे यार कभी तो सीधे मुँह बात...

    पत्नी: बस... आगे मत बोलना, नहीं आता मुझे सीधे मुँह बात करना। मेरा तो मुँह ही टेढ़ा है, यही कहना चाहते हो ना?

    पति: हे भगवान!

    पत्नी: हाँ... माँग लो भगवान जी से एक कप चाय। मैं चली नहाने, और सुनो मुझे शैम्पू भी करना है देर लगेगी। बच्चों को स्कूल से ले आना मेरे अकेले के नहीं हैं।

    पति: अरे ये सब क्या बोलती हो?

    पत्नी: क्यों झूठ बोल दिया क्या? मैं क्या दहेज़ में ले कर आयी थी इनको?

    पति: अरे मैं कहाँ कुछ बोल रहा हूँ?

    पत्नी: अरे मेरे भोले बाबा, तुम कहाँ बोलते हो? मैं तो चुप थी। बोलना किसने शुरू किया? बताओ?

    पति: अरे मैंने तो एक कप चाय मांगी थी।

    पत्नी: चाय मांगी थी या मुझे बहरी कहा था? क्या मतलब था तुम्हारा? "अजी सुनती हो?" का क्या मतलब था बताओगे?

    पति: अरे श्रीमती जी, कभी तो मीठे से बोल लिया करो।

    पत्नी: अच्छा? मीठा नहीं बोली मैं कभी तो ये दो-दो नमूने क्या पड़ोसी के हैं? देख लिया है बहुत मीठा बोल कर। बस अब और मीठा बोलने कि हिम्मत नहीं है मेरी।

    पति: भूल रही हो मैडम।

    पत्नी: क्या भूल रही हूँ?

    पति: अरे मुझे बात तो पूरी करने दो। मैं कह रहा था कि पति हूँ तुम्हारा।

    पत्नी: अच्छा... मुझे नहीं पता था। सूचना के लिए धन्यवाद।

    पति: अरे नहीं चाहिए मुझे तुम्हारी चाय। बक बक बंद करो।

    पत्नी: अरे वाह! तुम्हें तो बोलना भी आता है। बहुत अच्छे, चाय पी के जाओ। बाद में नहा लूँगी।

    पति: गज़ब हो तुम भी। पहले तो बिना बात लड़ती हो फिर बोलती हो चाय पी के जाओ।

    पत्नी: तो क्या करूँ? तुम लड़ने का मौका कहाँ देते हो? लड़ने का मन करे तो क्या पड़ोस में लड़ने जाऊँ?

    नोट - पत्नियों के अधिकारों का हनन ना करें और उन्हें लङने का मौका अवश्य दें।
  • हथेली पे बाल!

    एक बार बादशाह अकबर का दरबार लगा हुआ था। राजा टोडरमल, राजा मानसिंह, तानसेन, राजा बीरबल और बाकी नवरत्नों सहित अन्य सभासद बैठे हुए थे।

    अचानक अकबर को न जाने क्या सूझा कि उन्होंने एक अटपटा सवाल बीरबल की ओर दाग दिया। बोले, `बीरबल, तुम अपने आपको बहुत चतुर समझते हो तो बताओ कि हथेली पर बाल क्यों नहीं होते ?`

    बीरबल समझ गए कि बादशाह आज फिर उनसे ठिठोली करने के मूड में हैं पर उन्होंने बड़े ही शांतचित्त होकर पूछा, `महाराज, किसकी हथेली में ?`

    अकबर ने जवाब दिया, `मेरी हथेली में ...`

    बीरबल ने जवाब दिया, `महाराज, क्योंकि आप दान बहुत देते हैं इसीलिए आपकी हथेली पर बाल नहीं हैं।`

    अकबर ने फिर पूछा, `अच्छा, चलो मैं दान देता हूँ इसलिए मेरी हथेली पर बाल नहीं हैं, पर तुम्हारी हथेली पर बाल क्यों नहीं हैं ?`

    बीरबल ने फिर तपाक से जवाब दिया, `महाराज, आप दान देते हैं और मैं दान लेता हूँ इसलिए मेरी हथेली पर बाल नहीं हैं।`

    बीरबल की बात सुनकर अकबर चक्कर में आ गया पर उसने हार नहीं मानी। उसने फिर पूछा, `चलो यह बात तो समझ में आ गई कि मेरी और तुम्हारी हथेली पर बाल क्यों नहीं हैं पर ये तो बताओ कि यहाँ जो इतने दरबारी बैठे हैं उन सबकी हथेलियों पर बाल क्यों नहीं हैं ?`

    बीरबल हाथ जोड़कर बोले, `अन्नदाता, सीधी सी बात है। जब आप दान देते हैं और मैं दान लेता हूँ तो इन दरबारियों से देखा नहीं जाता। इसलिए मारे जलन के हथेलियाँ मलते रहते हैं, इसीलिए इनकी हथेलियों पर भी बाल नहीं हैं।`

    अब अकबर समझ चुका था कि बीरबल को बातों में हराना मुमकिन नहीं है। वह बहुत प्रसन्न हुआ और अपने गले से सोने की माला उतारकर उन्हें इनाम में दे दी।