• पक्का भारतीय होने के लक्षण!

    1. होटल में खाने के बाद मुट्ठी भर सौंफ खाना।

    2. हवाई यात्रा के बाद बैग से टैग नहीं उतारना।

    3. सब्जी लेने के बाद मुफ़्त धनिये की मांग करना।

    4. दीवाली पर मिले गिफ्ट को रिश्तेदार को सरका देना।

    5. छह साल के बच्चे को 3 साल का बता कर आधा टिकट लेना।

    6. रिमोट से लेकर मोबाइल तक का पीठ ठोंक कर चलाना।

    7. शादी के कार्ड से गणेश जी उतारकर फ्रिज पर चिपकाना।

    8. मोलभाव करते वक्त पिछली दुकान का हवाला देना।

    9. गोलगप्पे खाने के बाद मुफ़्त में सुखी पापड़ी की जिद करना।

    10. नई कार लेने के बाद छह महीने तक सीट की पन्नी नहीं उतारना।
  • देहाती की नम्रता!

    गॉंव का एक आदमी पहली बार अपने गाँव से कहीं बाहर जाने के लिए बस में सवार हुआ।

    कंडक्टर ने ठीक ड्राइवर के पास वाली सीट पर उसे बैठा दिया।

    बस चलते समय वह आदमी बड़े आश्चर्य से इतनी विशाल बस को चलाते ड्राइवर को ही देखता रहा।

    एक घंटे बाद चाय पानी के लिए एक ढाबे के सामने बस रुकी और ड्राइवर भी चाय पीने चला गया।

    वापस लौटा तो देखा कि गियर चेंज करने वाली रॉड गायब थी।

    वो गुस्से से चिल्लाया, "यहाँ लगी गियर रॉड किसने निकाली?"

    उसके पास की सीट पर बैठा वो देहाती आदमी बड़ी नम्रता से बोला, "साहब नाराज क्यों होते हो, रास्ते भर मैं कब से देख रहा हूँ कि, आप बस चलाते चलाते बार बार ये रॉड निकालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन निकाल नही पाए बस आप हिला ही पाए... मैंने अपनी पूरी ताकत से निकाल दी। ये लो।"

    . ड्राईवर अभी कोमा में है और होश आते ही फिर बेहोश होने की सम्भावना है।
  • स्मार्ट वकील!

    वैलेंटाइन डे के पहले दिन गिफ्ट शॉप पर वकील साहब मिल गए। वो 40 कार्ड ले रहे थे। सब पर उन्होंने भेजने वाले की जगह लिखा -

    `तुम्हारी जान !! पहचान गए ना? शाम को मिलो। लव यू।`

    पूछने पर बताया - पिछले वैलेंटाइन डे पर आस पास की कालोनी में ऐसे ही 20 कार्ड भेजे थे। कुछ ही दिन में तलाक के चार केस मिल गए थे। इस बार 40 कार्ड भेज रहा हूँ।

    धन्धे में सब जायज है।
  • रामायण और पप्पू!

    अध्यापक कक्षा में रामायण के इतिहास के बारे में बता रहे थे।

    अध्यापक: बच्चों रामचंद्र ने समुन्द्र पर पुल बनाने का निर्णय लिया।

    पप्पू: सर मैं कुछ कहना चाहता हूँ।

    अध्यापक: कहो बेटा।

    पप्पू: रामचन्द्र का पुल बनाने का निर्णय गलत था।

    अध्यापक: कैसे?

    पप्पू: सर उनके पास हनुमान थे जो उड़कर लंका जा सकते थे तो उनको पुल बनाने की कोई जरुरत ही नही थी।

    अध्यापक: हनुमान ही तो उड़ना जानते थे बाकी रीछ और वानर तो नही उड़ते थे।

    पप्पू: सर वो हनुमान की पीठ पर बैठकर जा सकते थे। जब हनुमान पूरा पहाड़ उठाकर ले जा सकते थे तो वानर सेना को भी तो उठाकर ले जा सकते थे।

    अध्यापक: भगवान की लीला पर सवाल नही उठाया करते।

    पप्पू: वैसे सर एक उपाय और था।

    अध्यापक: क्या?

    पप्पू: सर हनुमान अपने आकार को कितना भी छोटा बड़ा कर सकते थे जैसे सुरसा के मुँह से निकलने के लिए छोटे हो गए थे और सूर्य को मुँह में देते समय सूर्य से बड़े तो वो अपने आकार को भी तो समुन्द्र की चौड़ाई से बड़ा कर सकते थे और समुन्द्र के ऊपर लेट जाते। सारे बंदर हनुमान जी की पीठ से गुजरकर लंका पहुँच जाते और रामचंद्र को भी समुन्द्र की अनुनय विनय करने की जरुरत नही पड़ती। वैसे सर एक बात और पूछूँ?

    अध्यापक: पूछो।

    पप्पू: सर सुना है समुन्द्र पर पुल बनाते समय वानरों ने पत्थर पर राम राम लिखा था जिससे पत्थर पानी पर तैरने लगे थे।

    अध्यापक: हाँ तो ये सही है।

    पप्पू: सवाल ये है बन्दर भालुओं को पढ़ना लिखना किसने सिखाया था?

    अध्यापक: हरामखोर बंद कर अपनी बकवास और मुर्गा बन जा।