• बीवी हो तो ऐसी!

    पत्नी:खाने में क्या बनाऊँ?

    पति: कुछ भी बना लो क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो।

    पति: दाल चावल बना लो।

    पत्नी: सुबह ही तो खाए थे।

    पति: तो रोटी सब्जी बना लो।

    पत्नी: बच्चे नहीं खायेंगे।

    पति: तो छोले पूरी बना लो।

    पत्नी: मुझे तली हुई चीजों से परहेज़ है।

    पति: तो अंडा भुर्जी बना लो।

    पत्नी: आज बृहस्पतिवार है।

    पति: पराठे?

    पत्नी: रात को पराठे नहीं खाने चाहिए।

    पति: कढी-चावल?

    पत्नी: दही नहीं है।

    पति: इडली सांभर?

    पत्नी: समय लगेगा न, पहले बोलना था।

    पति: होटल से मंगवा लेते हैं।

    पत्नी: रोज़ रोज़ बाहर का खान ठीक नहीं है।

    पति: अच्छा मैग्गी बना लो।

    पत्नी: पेट नहीं भरेगा।

    पति: तो फिर क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो।
  • ग्रुप एडमिन को समर्पित!

    नाम: ग्रुप एडमिन

    हॉबी: बन्दूक से निकली गोली को हाथ से पकड़ना और शेर के दाँत तोड़कर जमा करना।

    रिकॉर्ड: एक बार जिराफ की गर्दन में गाँठ लगा दी थी।

    शर्मनाक पल: एक बार एक ही घूँसे में 100 हाँथियों को नहीं मार पाए। सिफ 99 ही मरे।

    पागलपन: एक बार सुनामी में तैरने निकल गए।

    उपलब्धि: ज्वालामुखी के लावे पर स्केटिंग की।

    खुद पर गर्व: जब इन्हें देख 40 फुट लम्बा अजगर डर कर भाग गया।

    एडमिन के अब तक के पराक्रम:

    विवाह भोज में दो बार भोजन करना।

    दूसरों की बरात में नाचना। परिचित हों अथवा ना हों।

    चुनाव के समय दो पार्टियों से पैसे लेकर तीसरे को वोट देना।

    बच्चों की क्रिकेट टीम का कैप्टन बनना।

    जब कहीं केक काटा जा रहा हो तो सबसे सामने खड़ा रहना।

    एडमिन पद से इस्तीफा देने की सिर्फ धमकी देना।
  • कुछ घरेलू नुस्खे!

    कुछ ऐसे आयुर्वैदिक उपाय जो आप घर पर ही कर सकते हैं।

    1. कमजोरी: दारू में एक चम्मच शहद और दो बूँद गुलाब जल मिलाकर पिएँ।

    2. खाँसी: दारू में शहद, काली मिर्च और गरम पानी मिलाकर पिएँ।

    3. सर्दी: गरम पानी ब्रांडी मिलाकर पिएँ।

    4. गैस: दारू में थोड़ी हींग मिलाकर पिएँ।

    5. भूख बढ़ाने के लिए: भोजन से एक घंटे पहले, एक गिलास वाइन पिएँ।

    6. उल्टी: दारु में नींबू का रस मिलाकर पिएँ।

    7. और अगर आप पूरी तरह फिट हैं तो दारू में दो आइस क्यूब, थोड़ा सोडा और थोड़ा पानी मिलाकर पिएँ और साथ में मूँग दाल खाएँ।
  • एक मर्द का दर्द!

    पिछले हफ्ते मेरी दाढ़ में दर्द हुआ और मैं जिंदगी में पहली बार दाँतों के डॉक्टर के पास गया। रिसेप्शन में बैठे-बैठे मेरी नजर वहाँ दीवार पर लगी डॉक्टर की डिग्री पर पड़ी और उस पर लिखे डॉक्टर के नाम को पढ़ते ही मानो मुझ पर बिजली गिर पड़ी।

    "डॉ. नंदिता प्रधान" यानि, स्कूल के दिनों की हमारी क्लास की हीरोइन। गोरी-चिट्टी, ऊँची-लम्बी, घुँघराले बालों वाली खूबसूरत लड़की।

    अब झूठ क्या बोलूँ, क्लास के दूसरे लड़कों के साथ साथ मैं खुद भी उस पर मरता था, अपनी नंदू पर।

    मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। मेरा नंबर आने पर मैंने धड़कते दिल से, नंदू के चेम्बर में प्रवेश किया। उसके माथे पर झूलते घुँघराले बाल अब हट चुके थे, गुलाबी गाल अब फूलकर गोल गोल हो गए थे, नीली आँखें मोटे चश्मे के पीछे छुप गयी थीं लेकिन फिर भी नंदू बहुत रौबदार लग रही थी।

    लेकिन उसने मुझे पहचाना नहीं। मेरी दाढ़ की जाँच हो जाने के बाद मैंने ही उससे पूछा, "तुम कान्वेंट में पढ़ती थी ना?"

    वो बोली, "हाँ"

    मैंने पूछा, "10 वीं से कब निकली? 1991 में ना?"

    वो बोली, "करेक्ट! लेकिन आपको कैसे मालूम?"

    मैंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, "अरे, तुम मेरी ही क्लास में थी।"

    फिर
    वो
    भैंस,
    चश्मिश,
    हथनी,
    मोटी,
    भद्दी,
    टुनटुन
    मुझसे बोली... "सर आप कौन सा सब्जेक्ट पढ़ाते थे?"