• निशाना चूक गया!

    एक बार एक आश्रम में एक गुरु अपने शिष्यों को धनुष बाण चलाना सिखा रहा होता है, जिसमे से एक शिष्य निशाना लगता है परन्तु उसका निशाना चूक जाता है।

    शिष्य: साला निशाना चूक गया।

    गुरू: आश्रम मैं अपशब्द बोलना मना है अब मत बोलना।

    शिष्य दोबारा निशाना लगता है और उसका निशाना फिर से चूक जाता है।

    शिष्य: साला निशाना चूक गया।

    गुरु: मैंने तुम्हे मना किया था फिर भी तुमने अपशब्द बोला, अब यदि तुमने फिर से यह अपशब्द बोला तो एक आकाशवाणी होगी और आकाश से एक बाण निकलेगा जो तुम्हारी आँख फोड़ देगा।

    शिष्य तीसरी बार निशाना लगता है और तीसरी बार फिर उसका निशाना चूक जाता है।

    शिष्य: साला फिर निशाना चूक गया।

    तभी अचानक बिजली कडकती है और आकाश से एक बाण निकल कर गुरु की आँख मैं जाता है और साथ ही आकाशवाणी होती है;

    आकाशवाणी: साला निशाना चूक गया।
  • एक परेशान आदमी की दास्तान!

    एक आदमी ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने की कोशिश में था तो ड्राइविंग लाइसेंस के लिए चौथी बार ड्राइविंग टेस्ट दिया, इस दौरान वो इतना मशहूर और पसंदीदा हो चुका था कि इस बार अफसर ने उसके लिए एक ही सवाल रखा था।

    सवाल: आप 120 की रफ्तार से एक ऐसी सड़क से गुजर रहे हो जिसके एक ओर ऊंचा पहाड़ और दूसरी तरफ गहरी खाई है, सामने दो औरतें आ जाती हैं एक जवान और एक बूढ़ी तो अब आप किसे मारेंगें?

    आदमी ने तुरंत जवाब लिखा कि मैं बूढ़ी औरत को मारूँगा।

    हस्बे मुताबिक़ आदमी इम्तिहान में फिर फेल हो गया। आदमी अफसर से मिला और वजह पूछी तो उसने आदमी को ध्यान से देखा और ठंडी सांस भर कर कहा, "भाई आपको आखिरी बार बता रहा हूँ कि आप ब्रेक मारेंगे, किसी औरत-वौरत को नहीं।
  • फ़ोन प्रेम!

    कुछ लोग जब रात को अचानक फोन का बैलेंस ख़त्म हो जाता है इतना परेशान हो जाते हैं कि जैसे सुबह तक वो इंसान जिंदा ही नहीं रहेगा जिससे बात करनी थी।

    कुछ लोग जब फ़ोन की बैटरी 1-2% हो तो चार्जर की तरफ ऐसे भागते है जैसे अपने फ़ोन कह रहे हों "तुझे कुछ नहीं होगा भाई, आँखे बंद मत करना मैं हूँ न सब ठीक हो जायेगा।"

    कुछ लोग अपने फोन में ऐसे पैटर्न लॉक लगाते हैं जैसे आई एस आई की सारी गुप्त फाइलें उनके फ़ोन में ही पड़ी हों।

    कुछ लोग जब आपसे बात कर रहे होते हैं तो बार बार अपने फ़ोन को जेब से निकालते हैं, लॉक खोलते हैं और वापस लॉक कर देते हैं। वास्तव में वे कुछ देखते नहीं हैं, बस ये जताते हैं कि वो जाना चाहते हैं।

    और अगर कभी गलती से फ़ोन किसी दूसरे दोस्त के यहाँ छूट जाए तो ऐसा महसूस होता हैं जैसे अपनी भोली-भाली गर्लफ्रेंड को शक्ति कपूर के पास छोड़ आये हों।
  • बीवियों के बहाने!

    बीवी गाँव वाली हो या पढ़ी-लिखी, सभी औरतों का दिमाग ऊपर वाला एक ही फैक्टरी में बनाता है। जानिए उनके कुछ बहाने।

    अगर चावल में पानी ज्यादा हुआ तो... चावल नया था।

    रोटीयाँ कड़क हो गयी तो... कमबख्त ने अच्छा आटा पीस कर ही नहीं दिया।

    चाय ज्यादा मीठी हो गयी... शक्कर ही मोटी थी।

    चाय पतली हो गयी तो... दूध में पानी ज्यादा था।

    शादी या किसी पार्टी में जाते समय... कौन सी साड़ी पहनूं? मेरे पास कोई अच्छी साड़ी ही नहीं है।

    घर पर जल्दी आ गए तो... आज जल्दी कैसे आ गए?

    लेट हो गए तो... इतने वक़्त तक कहाँ थे?

    कोई चीज सस्ती मिल जाए तो... तुमको सभी फंसा देते हैं।

    महंगी लायी तो... तुमको किसने कहा था लाने को?

    खाने की तारीफ़ कर दो तो... मैं तो रोज ऐसा ही खाना बनाती हूँ।

    खाने को गलत कहा तो... तुमको तो मेरी कदर ही नहीं।

    कोई काम करो तो... एक काम कभी ढंग से करते नहीं।

    वो न किया तो... तुम्हारे भरोसे रहे तो कोई काम नहीं होने वाला।