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पत्नी-वन्दना!

हाथ जोड़ कर कीजिये,पत्नी जी का ध्यान।
घर में खुशहाली रहे ,हो जाये कल्यान।।

घरवाली को नमन कर, माला लेकर हाथ।
मुख से पत्नी-वन्दना बोलो मेरे साथ।।

जय पत्नी देवी कल्यानी।
माया तेरी ना पहचानी।।

तुमसे सारे देवता हारे।
डर से थर-थर कांपें सारे।।

नहीं चरित्र तुम्हरा कोई जाना।
नर क्या ईश्वर ना पहचाना।।

अपरम्पार तुम्हारी माया।
कोई इसका पार न पाया।।

लगो देखने में तुम गुड़िया।
हो लेकिन आफत की पुड़िया।।

हे मेरे बच्चों की माता।
तुम हो मेरी भाग्यविधाता।।

है बेलन हथियार तुम्हारा।
जब चाहा सिर पर दे मारा।।

ऐसी तेरी निकले बोली।
जैसे हो बंदूक की गोली।।

हम तुमसे डरते हैं ऐसे।
चोर पुलिस से डरता जैसे।।

ऐसा है आतंक तुम्हारा।
बिच्छू जैसा डंक तुम्हारा।।

करे पती जो पत्नी-सेवा।
मिलती उसको सच्ची मेवा।।

पत्नी-वन्दना जो कोई गावे।
जीवन में कोई कष्ट न पावे।।

प्रभु दीक्षित कर पत्नी-वन्दन।
पत्नी का कर लो अभिनन्दन।।

वन्दहु पत्नी मुख-कमल,गुणअवगुण की खान।
मिले नहीं बिन आपके पतियों को सम्मान।।

।।बोलो पत्नी रानी की जय।।

गुरु, गुरु ही होता है!

एक रात, चार कॉलेज विद्यार्थी देर तक मस्ती करते रहे और जब होश आया तो अगली सुबह होने वाली परीक्षा का भूत उनके सामने आकर खड़ा हो गया।

परीक्षा से बचने के लिए उन्होंने एक योजना बनाई। मैकेनिकों जैसे गंदे और फटे पुराने कपड़े पहनकर वे प्रिंसिपल के सामने जा खड़े हुए और उन्हें अपनी दुर्दशा की जानकारी दी।

उन्होंने प्रिंसिपल को बताया कि कल रात वे चारों एक दोस्त की शादी में गए हुए थे। लौटते में गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया। किसी तरह धक्का लगा-लगाकर गाड़ी को यहां तक लाए हैं। इतनी थकान है कि बैठना भी संभव नहीं दिखता, पेपर हल करना तो दूर की बात है। यदि आप हम चारों की परीक्षा आज के बजाय किसी और दिन ले लें तो बड़ी मेहरबानी होगी।

प्रिंसिपल साहब बड़ी आसानी से मान गए। उन्होंने तीन दिन बाद का समय दिया। विद्यार्थियों ने प्रिंसिपल साहब को धन्यवाद दिया और जाकर परीक्षा की तैयारी में लग गए।

तीन दिन बाद जब वे परीक्षा देने पहुंचे तो प्रिंसिपल ने बताया कि यह विशेष परीक्षा केवल उन चारों के लिए ही आयोजित की गई है। चारों को अलग-अलग कमरों में बैठना होगा।

चारों विद्यार्थी अपने-अपने नियत कमरों में जाकर बैठ गए। जो प्रश्नपत्र उन्हें दिया गया उसमें केवल दो ही प्रश्न थे:

प्र.1 आपका नाम क्या है? (2 अंक)

प्र.2 गाड़ी का कौन सा टायर पंक्चर हुआ था? (98 अंक)

शाश्वत सत्य वचन!

लीजिये कुछ शाश्वत सत्य वचन:

1. अगर किसी लडके ने किसी लड़की से 'हाय/हैलो' कहा है तो वो इसे केवल 'हाय/हैलो' ही समझती है। इसके उल्ट अगर किसी लड़की ने किसी लडके को 'हैलो' कहा तो लड़का इसको केवल 'हैलो' नहीं समझेगा।

2. अगर लड़का 'हैलो' को केवल 'हैलो' समझना भी चाहेगा तो उसके दोस्त ऐसा नहीं होने देंगे, आख़िर दोस्त होते ही किस दिन के लिए हैं।

3. लड़के जिनकी गर्लफ्रेंड होती है और जिनकी नहीं होती है, में केवल एक फर्क होता है, पहले वाले लोग 'लड़कियों से बात करते हैं' और दूसरे वाले 'लड़कियों के बारे में बात करते हैं'।

4. इंजीनियरिंग कालेज छोड़ दिए जाएँ तो संसार में सुन्दर लड़कियों की कोई कमी नहीं है।

5. जो इंजीनियरिंग कालेज जितना अच्छा होगा वहाँ लड़कियों की गुणवत्ता कालेज की रैंक के व्युत्क्रमानुपाती होगी।

6. आपके मित्र कभी नहीं चाहते कि आपकी कोई गर्लफ्रेंड बने, वरना वो कैंटीन में किसके साथ बैठ कर मौज करेंगे।

7. कालेज में लड़कियों के पीछे पंजीकरण बिल्कुल मुफ्त होता है, बन्दा साल में दो बार लड़की से बात नहीं करेगा लेकिन कैंटीन में हमेशा 'मेरी वाली'/'तेरी वाली' संबोधन से ही बात होगी।

शराब का सुरूर

एक बार पठान बार में गया। वहां जाकर उसने बार में मौजूद सभी लोगों, जिनमें बार मालिक भी शामिल था, के लिए अपनी तरफ से एक-एक पैग व्हिस्की का ऑर्डर दिया।

"आज सभी लोग मेरी तरफ से पियो।" पठान ने झूमते हुए घोषणा की।

आधे घण्टे बाद पठान ने फिर से सभी लोगों के लिए एक-एक पैग व्हिस्की का ऑर्डर दिया। बार मालिक को भी एक पैग और मिला।

फिर तो हर आधे घण्टे बाद यही क्रम चलने लगा। पांचवें पैग के बाद बार मालिक को चिंता होने लगी। उसने पठान को एक तरफ बुलाकर कहा, "भाईसाहब, आपका अभी तक का बिल तीन हजार पांच सौ रुपये हो गया है।"

"बिल, कैसा बिल? मेरे पास तो फूटी कौड़ी भी नहीं है।" पठान ने जेबें उल्टी करके दिखाते हुए कहा।

अब तो बार मालिक का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उसने लात घूंसों से पठान की जमकर पिटाई की और आखिर में बार के कर्मचारियों से कहकर पठान को बाहर फिंकवा दिया।

अगले दिन शाम को बार अभी खुला ही था कि पठान अंदर आया और बोला, "एक पैग व्हिस्की मेरे लिए और एक-एक यहां मौजूद सभी लोगों के लिए मेरी तरफ से।"

फिर बार मालिक की तरफ उंगली करके बोला, "सिर्फ तुमको छोड़कर। तुम चार पैग के बाद बहक जाते हो।"

Quotes

कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता। कर्तव्य-पालन में ही चित्त की शांति है।

Trivia

The Iglesia Maradoniana (English: Church of Maradona; literally Maradonian Church) is a religion, created by fans of the retired Argentine football player Diego Maradona, who they believe to be the best player of all time.

Graffiti

Nowadays whatever is not worth saying is sung.