• उल्टा-पुल्टा!

    एक बार एक आदमी के घोड़े को कब्ज़ हो गयी तो वह जानवरों के डॉक्टर के पास गया बोला, "डॉक्टर साहब मेरे घोड़े को बहुत ही बुरी तरह से कब्ज़ हो गयी है, जिस वजह से वह ठीक तरह से शौच भी नहीं जा पा रहा है।"

    आदमी की बात सुन कर डॉक्टर ने उसे एक गोली दी और बोला, "यह लो यह पेट साफ़ करने की गोली है, तुम इसे पशुओं को दवाई देने वाली नली में रख कर इसका एक सिरा घोड़े के मुंह में डाल देना और दूसरी तरफ से फूंक मार देना ताकि गोली घोड़े के पेट में चली जाए, और कुछ देर बाद ही तुम देखोगे की घोड़े के शौच एकदम सामान्य हो जायेंगे और उसका पेट भी बिल्कुल साफ़ हो जाएगा।"

    डॉक्टर की बात सुन आदमी दवाई लेकर घर चला गया।

    कुछ देर बाद जब डॉक्टर अपने चिकित्सालय में बैठा था तो आदमी बदहवास सा अपना पेट पकडे डॉक्टर के पास आया, जिसे देख कर डॉक्टर ने उस से पूछा, "अरे भाई क्या हुआ तुम्हारी तो हालत बड़ी ही खराब लग रही है?"

    आदमी: अरे डॉक्टर साहब क्या बताऊँ ये सब घोड़े को दवाई देने के चक्कर में हो गया।

    डॉक्टर: वो कैसे?

    आदमी: अरे डॉक्टर साहब आपने घोड़े को दवाई देने का जो तरीका बताया था, मैंने बिल्कुल वैसा ही किया बस किस्मत ही खराब थी की मेरे से पहले घोड़े ने फूँक मार दी।
  • कुछ आधुनिक कबीर दोहे!

    यदि कबीर जिन्दा होते तो आजकल के दोहे यह होते:

    नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात;
    बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात;

    पानी आँखों का मरा, मरी शर्म औ लाज;
    कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज;

    भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास;
    बहन पराई हो गयी, साली खासमखास;

    मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश;
    बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश;

    बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान;
    पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान;

    पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग;
    मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग;

    फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर;
    पापी करते जागरण, मचा-मचा कर शोर;

    पहन मुखौटा धरम का, करते दिन भर पाप;
    भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप।
  • ज़माना बदल गया!

    एक बार एक बूढी महिला अपने घर के आँगन मैं बैठी स्वेटर बुन रही थी कि तभी अचानक एक आदमी उसकी आँख बचाते हुए उसकी कुर्सी के नीचे बम रख कर भाग गया।

    आदमी को इतनी जल्दी में भागते हुए देख, कुछ लोगों को शक हुआ तो उन्होंने आँगन में झाँक कर देखा तो उनकी नज़र बुढिया की कुर्सी के नीचे रखे बम पर पड़ी।

    यह देख कर उन लोगों ने बुढिया को आगाह करने के लिए घर के बाहर से ही चिल्लाना शुरू कर दिया "बुढिया बम है, बुढिया बम है।"

    यह शोर-गुल सुन कर बुढिया एक पल के लिए चौंकी और फिर शर्माते हुए बोली, " अरे अब वो बात कहाँ, बम तो मैं जवानी में होती थी।"
  • पाक-साफ़ चोर!

    एक रात मुल्ला नसरुद्दीन का गधा चोरी हो गया। अगले दिन मुल्ला ने गधे के बारे में पड़ोसियों से पूछताछ की।

    चोरी की खबर सुनकर पड़ोसियों ने मुल्ला को लताड़ना शुरू कर दिया। एक ने कहा, "तुमने रात को अस्तबल का दरवाज़ा खुला क्यों छोड़ दिया?"

    दूसरे ने कहा, "तुमने रात को चौकसी क्यों नहीं बरती। तुम होशियार रहते तो चोर गधा नहीं चुरा पाता!"

    तीसरे ने कहा, "तुम घोड़े बेचकर सोते हो, तभी तुम्हें कुछ सुनाई नहीं दिया जब चोर अस्तबल की कुंडी सरकाकर गधा ले गया।"

    यह सब सुनकर मुल्ला ने फनफनाते हुए कहा, "ठीक है भाइयों! जैसा कि आप सभी सही फरमाते हैं, सारा कसूर मेरा है और चोर बेचारा तो पूरा पाक-साफ़ है।"