• होशियारी पड़ गयी भारी!

    नए-नए रईस हुए एक साहब को लोगों के ऊपर अपनी अमीरी का रौब झाड़ने का शौक चढ़ गया। इसी के चलते एक रोज उनके घर मेहमान आने वाले थे तो उन्होंने अपने नौकर को बुलाया और समझाने लगे, "मेहमानों के सामने मैं किसी भी चीज़ को तलब करूँ तो उसकी 2-3 किस्मों के नाम लेना ताकि उन पर रौब पड़ सके, समझ गए।"

    नौकर: जी हुज़ूर बिल्कुल समझ गया।

    अगले रोज मेहमान आ गए। साहब ने नौकर से कहा, "ठाकुर साहब के लिए शरबत लाओ।"

    नौकर: हुज़ूर, कौन सा शरबत लेंगे, खस का, केवड़े का या बादाम का?

    नौकर की समझदारी पर साहब मन ही मन खुश होते हुए बोले, "केवड़े का ले आओ।"

    फिर थोड़ी देर बाद-
    साहब: ठाकुर साहब के लिए खाना लगवाओ।

    नौकर: हुज़ूर, कौन सा खाना खायेंगे इंडियन, कांटिनेंटल या चाइनीज?

    खाने के बाद-
    साहब: पान ले आओ।

    नौकर: कौन सा पान हुज़ूर लखनवी, मुरादाबादी या बनारसी?

    फिर थोड़ी देर बाद शहर घूमने का प्रोग्राम बन गया।
    साहब: हमारी गाड़ी निकलवाओ।

    नौकर: कौन सी गाड़ी हुज़ूर, सफारी, ऑडी, मर्सिडीज़, या बेंटली?

    साहब: ऑडी निकलवाओ और सुनो हमारे पिताजी से कह देना कि हम ज़रा देर से आयेंगे।

    नौकर: कौन से पिताजी से कहूँ हुज़ूर आगरा वाले, दिल्ली वाले या चंडीगढ़ वाले?
  • पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट!

    एक दिन दफ्तर से घर आते हुए पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट हो गयी,
    और जो बीवी से मिलने की जल्दी थी वह ज़रा सी लेट हो गयी;

    जाते ही बीवी ने आँखे दिखाई - आदत अनुसार हम पर चिल्लाई;
    तुम क्या समझते हो मुझे नहीं है किसी बात का इल्म;
    जरुर देख रहे होगे तुम सक्रेटरी के साथ कोई फिल्म;

    मैंने कहा, "अरी पगली, घर आते ही ऐसे झिडकियां मत दिया कर;
    कभी तो छोड़ दे, मुझ बेचारे पर इस तरह शक मत किया कर";

    पत्नी फिर तेज होकर बोली, "मुझे बेवकूफ बना रहे हो;
    6 बजे दफ्तर बंद होता है और तुम 10 बजे आ रहे हो";

    मैंने कहा, "अब छोड़ यह धुन -
    मेरी बात ज़रा ध्यान से सुन";
    एक आदमी का एक हज़ार का नोट खो गया था;
    और वह उसे ढूंढने के जिद्द पर अड़ा था";

    पत्नी बोली, "तो तुम उसकी मदद कर रहे थे';
    मैंने कहा, "नहीं रे पगली मै ही तो उस पर खड़ा था";

    सुनते ही पत्नी हो गयी लोट-पोट;
    और बोली, "कहाँ है वह हज़ार का नोट";

    मैंने कहा, "बाकी तो खर्च हो गया यह लो सौ रुपये का नोट";

    वह बोली, "क्या सब खा गए बाकी के 900 कहाँ गए";

    मैंने कहा, "असल में जब उस नोट के ऊपर मै खडा था;
    तो एक लडकी की निगाह में उसी वक़्त मेरा पैर पडा था;
    कही वह कुछ बक ना दे इसलिए वह लडकी मनानी पडी;
    उसे उसी की पसंद के पिक्चर हाल में फिल्म दिखानी पडी;
    फिर उसे एक बढ़िया से रेस्टोरेन्ट में खाना खिलाना पड़ा;
    और फिर उसे अपनी बाइक से घर भी छोड़कर आना पड़ा;
    तब कहीं जाकर तुम्हारे लिए सौ रुपये बचा पाया हूँ;
    यूँ समझो जानू तुम्हारे लिए पानी पूरी का इंतजाम कर लाया हूँ";

    अब तो बीवी रजामंद थी - क्योंकि पानी पूरी उसे बेहद पसंद थी;

    तुरंत मुस्कुराकर बोली, "मै भी कितनी पागल हूँ इतनी देर से ऐसे ही बक बक किये जा रही थी;
    सच में आप मेरा कितना ख़याल रखते है और मै हूँ कि आप पर शक किये जा रही थी"!
  • शादी के बाद पति - पत्नी!

    शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है, जरा गौर कीजिए:

    पहले साल: मैंने कहा जी खाना खा लीजिए, आपने काफी देर से कुछ खाया नहीं।
    दूसरे साल: जी खाना तैयार है, लगा दूं?
    तीसरे साल: खाना बन चुका है, जब खाना हो तब बता देना।
    चौथे साल: खाना बनाकर रख दिया है, मैं बाजार जा रही हूं, खुद ही निकाल कर खा लेना।
    पांचवे साल: मैं कहती हूं आज मुझ से खाना नहीं बनेगा, होटल से ले आओ।
    छठे साल: जब देखो खाना, खाना और खाना, अभी सुबह ही तो खाया था।

    शादी के बाद पति कैसे बदलते हैं, जरा गौर कीजिए:

    पहले साल: जानू संभलकर उधर गड्ढा है।
    दूसरे साल: अरे यार देख के उधर गड्ढा है।
    तीसरे साल: दिखता नहीं उधर गड्ढा है।
    चौथे साल: अंधी है क्या गड्ढा नहीं दिखता।
    पांचवे साल: अरे उधर - किधर मरने जा रही है गड्ढा तो इधर है।
  • गुरु, गुरु ही होता है!

    एक रात, चार कॉलेज विद्यार्थी देर तक मस्ती करते रहे और जब होश आया तो अगली सुबह होने वाली परीक्षा का भूत उनके सामने आकर खड़ा हो गया।

    परीक्षा से बचने के लिए उन्होंने एक योजना बनाई। मैकेनिकों जैसे गंदे और फटे पुराने कपड़े पहनकर वे प्रिंसिपल के सामने जा खड़े हुए और उन्हें अपनी दुर्दशा की जानकारी दी।

    उन्होंने प्रिंसिपल को बताया कि कल रात वे चारों एक दोस्त की शादी में गए हुए थे। लौटते में गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया। किसी तरह धक्का लगा-लगाकर गाड़ी को यहां तक लाए हैं। इतनी थकान है कि बैठना भी संभव नहीं दिखता, पेपर हल करना तो दूर की बात है। यदि आप हम चारों की परीक्षा आज के बजाय किसी और दिन ले लें तो बड़ी मेहरबानी होगी।

    प्रिंसिपल साहब बड़ी आसानी से मान गए। उन्होंने तीन दिन बाद का समय दिया। विद्यार्थियों ने प्रिंसिपल साहब को धन्यवाद दिया और जाकर परीक्षा की तैयारी में लग गए।

    तीन दिन बाद जब वे परीक्षा देने पहुंचे तो प्रिंसिपल ने बताया कि यह विशेष परीक्षा केवल उन चारों के लिए ही आयोजित की गई है। चारों को अलग-अलग कमरों में बैठना होगा।

    चारों विद्यार्थी अपने-अपने नियत कमरों में जाकर बैठ गए। जो प्रश्नपत्र उन्हें दिया गया उसमें केवल दो ही प्रश्न थे:

    प्र.1 आपका नाम क्या है? (2 अंक)

    प्र.2 गाड़ी का कौन सा टायर पंक्चर हुआ था? (98 अंक)