• ख़ुशी की कविता या कुछ और?

    मन था उदास... बड़ी हसरतों से निगाहें दरवाजे पर थीं... सहसा कुछ खटका सा हुआ।
    उल्लसित मन से मैं दरवाजे की ओर बढ़ी कि लेकिन यह क्या।
    वह मन का भ्रम था; दिल बैठने सा लगा, बुझे मन से लौट ही रही थी... कि सहसा एक आवाज आई
    "भाभी"!

    मन की वीणा झंकृत हो उठी।
    मन मयूर नाच उठा।
    यह कोई स्वप्न नहीं तुम साक्षात पधार चुकी थीं।
    धन्य हो भगवन धन्य अब मन नहीं था उदास, माहौल हो गया था ख़ुशगवार, मन मृदंग के बज रहे थे तार, वह आ चुकी थी। सचमुच वो आ चुकी थी।

    यह कविता नहीं... कामवाली बाई के चार दिन की छुट्टी के बाद काम पर आने की ख़ुशी में एक गृहिणी के हृदय से निकले उदगार हैं। चाहें तो फिर से पढ़ लें।
  • मूर्ख बच्चा!

    एक लड़का एक नाई की दुकान में गया और, नाई ने अपने ग्राहक से फुसफुसाते हुए कहा,"ये दुनिया का सबसे मूर्ख बच्चा है तुम देखो मैं अभी कैसे साबित करता हूँ।"

    नाई ने अपने एक हाथ में 10 रूपए का नोट रखा और दूसरे में 2 रूपए का सिक्का, तब उस लड़के को अपने पास बुलाया और कहा, "बेटा तुम्हें कौन सा चाहिए?"

    बच्चे ने 2 रूपए का सिक्का उठाया और बाहर चला गया।

    नाई ने कहा, "मैंने तुमसे क्या कहा था ये लड़का कुछ भी नहीं जानता, बाद में जब वो ग्राहक बाल कटवा कर बाहर निकला तो उसे वही बच्चा दिखा जो आइसक्रीम की दुकान के पास खड़ा आइसक्रीम खा रहा था।"

    ग्राहक: अरे बेटा क्या मैं तुमसे एक बात पूछूँ? तुमने 10 रूपए लेने के बजाय 2 रूपए का सिक्का क्यों लिया?

    बच्चे ने अपनी आइसक्रीम चाटते हुए जवाब दिया, "अंकल जिस दिन मैंने 10 रूपए का नोट ले लिया उस दिन खेल खत्म।"
  • सही खेल गया!

    एक बार बैंक मैनेजर अपने बीवी बच्चों के साथ होटल में गये।

    बैंक मैनेजर: खाने में क्या क्या है?

    वेटर: जी मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, कढ़ाई पनीर, दम आलू, मिक्स वैज, आलू गोभी।

    बैंक मैनेजर: मटर पनीर और रोटी दे दो। दाल कौन कौन सी है?

    वेटर: दाल फ्राइ, दाल तड़का, मूंग की दाल और मिक्स पंचरत्न दाल।

    बैंक मैनेजर: 1 फुल दाल फ्राई दे दो।

    वेटर: सर पापड़ ड्रॉइ दूँ या फ्राई?

    बैंक मैनेजर: फ्राई।

    वेटर (बड़ी शालीनता से): सर मिनरल वाटर ला दूँ।

    बैंक मैनेजर: हाँ ला दे।

    वेटर: सर आपका आर्डर हुआ है - मटर पनीर, रोटी, दाल फ्राई, फ्राई पापड़ और 1 मिनरल वाटर।

    बैंक मैनजर: हाँ भाई, फटाफट लगा दे।

    वेटर: लेकिन सब कुछ खत्म हो चुका है अभी कुछ नहीं है।

    बैंक मैनजर (विनम्रता सेे): तो महाराज आप इतनी देर से बक-बक क्यों कर रहे थे? पहले ही बता देते।

    वेटर: बैंक मैनेजर साहब, मैं रोज एटीएम जाता हूँ। वो एटीएम मुझसे पिन कोड, Saving/Current Account, Amount, Receipt सब कुछ पूछता है और लास्ट में बोलता है "No Cash"। अब समझ में आया मुझे उस टाइम कैसा लगता है?

    बैंक मैनेजर बेहोश!
  • कबीर के आधुनिक दोहे!

    यदि कबीर जिन्दा होते तो आजकल के दोहे यह होते:

    नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात;
    बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात;

    पानी आँखों का मरा, मरी शर्म औ लाज;
    कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज;

    भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास;
    बहन पराई हो गयी, साली खासमखास;

    मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश;
    बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश;

    बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान;
    पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान;

    पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग;
    मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग;

    फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर;
    पापी करते जागरण, मचा-मचा कर शोर;

    पहन मुखौटा धरम का, करते दिन भर पाप;
    भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप।