• संता की समझदारी!

    एक बार संता गाड़ी में अपने दोस्त बंता के साथ पिकनिक पर जा रहा था। गाड़ी के सामने के काँच से बंता को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन संता सड़क के तमाम गड्ढे बचाता हुआ बड़ी सफाई से गाडी चला रहा था।

    बंता ने हैरान होकर पूछा, "संता, सामने काँच से कुछ भी साफ़ नजर नहीं आ रहा। फिर भी गाड़ी इतनी परफेक्ट कैसे चला रहे हो?"

    संता: क्या बताऊँ यार? अपनी भूलने की आदत के कारण अब तक मेरे 180 चश्मे गुम चुके हैं।

    बंता: अरे संता मैं ड्राइविंग के बारे में पूछ रहा हूँ।

    संता: वही तो बता रहा हूँ कि चश्मे बनवा बनवा कर मैं परेशान हो गया तब मैंने गाड़ी का काँच ही चश्मे के नंबर वाला बनवाकर गाड़ी में लगवा लिया।
  • इंजीनियर!

    एक पादरी, वकील और इंजीनियर को विद्रोह के कारण मौत की सजा मिली। जब सजा देने का वक़्त आया तो अपराधियों को आखिरी ख्वाहिश की प्रथा बताई तो उन्हें गर्दन ऊपर और नीचे रखने के विकल्प मिले।

    पादरी ने ऊपर देखना स्वीकारा ताकि भगवान को देख सके और जैसे ही बटन दबाया गया तो आरी, गर्दन से सिर्फ दो इंच ऊपर रुक गई। अधिकारियों ने इसे ईश्वर की मर्जी समझ के उसे छोड़ दिया।

    वकील ने भी ऊपर देखा और जब आरी रुकी तो वह बोला कानूनन एक व्यक्ति को दो बार सजा नहीं दी जा सकती और वह भी छूट गया।

    इंजीनियर ने भी ऊपर ही देखने का फैंसला किया। जब बटन दबाया जा रहा था तो वो चिल्लाया, "एक मिनट रुको, अगर आप उस हरे और लाल तार को आपस में बदल देंगे तो काम हो जायेगा।"

    बस काम तमाम हो गया।
  • 10 लाख रूपए!

    एक बैंक बिल्कुल जेल के सामने था एक दिन बैंक के सेफ का लॉक नही खुल रहा था बैंक वालों ने हर तरह कोशिश की मैकनिक बुलाये पर फिर भी वे सेफ का लॉक नही खोल पाए।

    तब बैंक मैनेजर ने जेल में जाकर कैदियों से मदद मांगी एक कैदी सेफ का लॉक खोलने के लिए तैयार हो गया।

    उसे पुलिस सुरक्षा में बाहर लाया गया और उसने थोड़ी ही देर में बिना किसी तोड़फोड़ के सेफ खोल दिया।

    बैंक मैनेजर उसके उस कारनामे से बहुत खुश हुआ।

    मैनेजर ने सेफ खोलने वाले कैदी से कहा, "मैं आपसे बहुत खुश हूँ, आपने बिना किसी क्षति के सेफ खोल दिया आप बताईये की इस काम के लिए हम आपको कितने रूपए दें।"

    सेफ खोलने वाले कैदी ने कहा, "पिछली बार तो जब मैंने ऐसा ही एक सेफ खोला था तो मुझे 10 लाख रूपए मिले थे तभी तो मैं यहाँ हूँ।"
  • बेचारा पठान!

    पठान को किसी जुर्म में पुलिस पकड़ कर ले गयी।

    पुलिस अफसर ने पठान से पूछा, "क्या तुम लिख-पढ़ सकते हो?"

    पठान ने उत्तर दिया, "हुजूर, लिख तो सकता हूँ, पर पढ़ नहीं सकता।"

    "अच्छा! कागज पर अपना नाम लिखो।" पुलिस अफसर ने कहा।

    पठान ने कागज उठाकर उस पर टेढ़ी- मेढ़ी लकीरे खींच दी और कागज वापस कर दिया।

    "यह तुमने क्या लिखा है?" झुंझलाकर पुलिस अफसर ने कहा।

    पठान: साहब , मैंने पहले ही कहा था कि मैं लिख सकता हूं, पढ़ नहीं सकता।