• बिका हुआ माल वापस नहीं होगा!

    बीवी शौहर से लड़ रही थी। शौहर ने तंग आकर अपनी सास को मैसेज किया,
    "आप की प्रॉडक्ट मेरे मुताबिक नहीं है और मैं इसे लौटा कर आप से एक्सचेंज की डिमांड करता हूँ।"

    थोड़ी देर बाद सास का जवाब आया,
    "वारंटी खत्म हो चुकी है, रिफंड या एक्सचेंज की ऐसी कोई पॉलिसी नहीं है। प्रॉडक्ट की परफॉरमेंस बेहतर करने के लिए बालों से पकड़ कर दिन में दो दफा धुलाई करें। अब वैसे भी कंपनी ने नया प्रॉडक्ट बनाना बंद कर दिया है।"
  • एक मर्द का दर्द!

    पिछले हफ्ते मेरी दाढ़ में दर्द हुआ और मैं जिंदगी में पहली बार दाँतों के डॉक्टर के पास गया। रिसेप्शन में बैठे-बैठे मेरी नजर वहाँ दीवार पर लगी डॉक्टर की डिग्री पर पड़ी और उस पर लिखे डॉक्टर के नाम को पढ़ते ही मानो मुझ पर बिजली गिर पड़ी।

    "डॉ. नंदिता प्रधान" यानि, स्कूल के दिनों की हमारी क्लास की हीरोइन। गोरी-चिट्टी, ऊँची-लम्बी, घुँघराले बालों वाली खूबसूरत लड़की।

    अब झूठ क्या बोलूँ, क्लास के दूसरे लड़कों के साथ साथ मैं खुद भी उस पर मरता था, अपनी नंदू पर।

    मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। मेरा नंबर आने पर मैंने धड़कते दिल से, नंदू के चेम्बर में प्रवेश किया। उसके माथे पर झूलते घुँघराले बाल अब हट चुके थे, गुलाबी गाल अब फूलकर गोल गोल हो गए थे, नीली आँखें मोटे चश्मे के पीछे छुप गयी थीं लेकिन फिर भी नंदू बहुत रौबदार लग रही थी।

    लेकिन उसने मुझे पहचाना नहीं। मेरी दाढ़ की जाँच हो जाने के बाद मैंने ही उससे पूछा, "तुम कान्वेंट में पढ़ती थी ना?"

    वो बोली, "हाँ"

    मैंने पूछा, "10 वीं से कब निकली? 1991 में ना?"

    वो बोली, "करेक्ट! लेकिन आपको कैसे मालूम?"

    मैंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, "अरे, तुम मेरी ही क्लास में थी।"

    फिर
    वो
    भैंस,
    चश्मिश,
    हथनी,
    मोटी,
    भद्दी,
    टुनटुन
    मुझसे बोली... "सर आप कौन सा सब्जेक्ट पढ़ाते थे?"
  • ये भी बात है!

    एक फ्लैट में घंटी बजती है, और महिला जो घर में अकेली है, दरवाज़ा खोलती है।

    भिक्षुक: माई, भिक्षा दे।

    महिला: ले लो, महाराज।

    भिक्षुक: माई, ज़रा यह द्वार पार करके बाहर तो आना।

    वह द्वार पार करके बाहर आती है।

    भिक्षुक (उसे पकड़ते हुए): हा... हा... हा... मैं भिक्षुक नहीं, रावण हूँ।

    महिला: हा... हा... हा... मैं कहाँ सीता हूँ, कामवाली बाई हूँ।

    रावण: हा... हा... हा... सीता का अपहरण करके आज तक पछता रहा हूँ, तुम्हें ले जाऊंगा तो मंदोदरी खुश हो जायेगी। उसे भी कामवाली बाई की ही ज़रूरत है।

    महिला: हा... हा... हा... पगले, सीता को ढूंढने सिर्फ राम आऐ थे। मुझे ढुंढने सारा मोहल्ला आएगा।
  • क्या ये दिल मांगे मोर?

    संता पेप्सी लेकर सामने रख के उदास बैठा था।

    बंता वहां आया और आते ही संता की पेप्सी पी गया और पूछा, "यार तू उदास क्यों है?"

    संता बोला,"यार आज का दिन ही बुरा है।"

    सुबह -सुबह बीवी से झगड़ा हो गया।

    रास्ते में कार खराब हो गई।

    ऑफिस लेट पहुंचा तो बॉस ने नौकरी से निकाल दिया।

    और अब जब जिंदगी से तंग आकर मैंने आत्महत्या करने के लिए पेप्सी में जहर मिलाया तो वो भी तू पी गया अब बता मैं उदास ना होऊं तो क्या करूँ?