• विदेशी भाषा का चक्कर!

    एक दिन संता और बंता दोनों टैक्सी स्टैंड पर बैठे बातें कर रहे थे कि तभी एक विदेशी उनके पास पहुँचा और उनसे अंग्रेजी भाषा में कुछ पूछा। संता - बंता दोनों बेवकूफों की तरह उस विदेशी के चेहरे को देखते रहे।

    विदेशी समझ गया कि दोनों को अंग्रेजी नहीं आती। अब उसने वही प्रश्न उनसे स्पेन की भाषा स्पेनिश में पूछा।

    दोनों फिर बेवकूफों की तरह विदेशी का चेहरा देखते रहे।

    तीसरी बार विदेशी ने वही प्रश्न उनसे रूस की भाषा रशियन में पूछा।

    दोनों का वही हाल रहा।

    चौथी बार विदेशी ने वही प्रश्न उनसे जर्मनी की भाषा जर्मन में पूछा।

    दोनों फिर वैसे ही उसका चेहरा ताकते रहे।

    आखिर तंग आकर विदेशी चला गया। उसके जाने के बाद बंता, संता से बोला, "यार संता, हम लोगों को भी अपनी भाषा के अलावा कोई दूसरी भाषा सीखनी चाहिए। हमारे काम आएगी।"

    संता ने एक जोर का झापड़ बंता को लगाया और बोला, "साले, उसको चार चार आती थी, उसके कोई काम आई?"
  • शराबी की शालीनता!

    शराब का हमारी अर्थव्यवस्था में बडा महत्व है, क्योंकि शराबी एक मॉडल टैक्सपेयर होता है। किसी भी आइटम पर टैक्स लगाया जाये, उसे देने वाला बवाल मचा देता है। पैट्रोल पर एक डेढ़ रुपया बढ़ जाऐ, मार ड्रामा शुरु हो जाता है। बीएमडब्ल्यु वाला भी हुड़की लगाकर चैनलों को बयान देने लगता है कि हम मर गये, लुट गये, तबाह हो गये।

    पर शराब का खरीदार अत्यंत शालीन होता है। औसतन हर साल शराब के भाव 15-20 परसेंट तो बढ़ते ही है, दिखा दे मुझे कोई कि कभी किसी शराबी ने चिक-चिक मचायी हो। इतिहास में एक भी जुलूस ऐसा नहीं दर्ज है, जिसमें शराब के खरीदारों ने डीएम को जुलूस निकालकर ज्ञापन दिया हो कि प्लीज दारु सस्ती कर दो। ऐसे उद्विग्न समय में शराबी का संयम सराहनीय है, ये इतनी दुर्लभ विशेषता है कि सिर्फ शराबियों में ही पायी जाती है।

    प्रदेश में शराब का कारोबार करीब 14,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखा रहा है, करीब 17,000 दुकानें हैं, सभी पर अनवरत लाईन लगी हुई है, कई की जालीदार खिडकियाँ तो सुबह ब्रह्मकाल मे ही खडका दी जाती है।

    इसलिए लोगो को अनुशासन, शालीनता और संयम का पाठ अगर लेना हो तो किसी शराबी से लें।

    जारी कर्ता: शराबी संघ
  • अनोखा परीक्षण!

    एक बदसूरत काला सा आदमी जुकाम की शिकायत लेकर डाक्टर के पास गया। डाक्टर ने उसे सरसरी निगाह से देखकर कहा कि वो अपने कपडे उतार दे और दोनों हाथों को जमीन पर टिका दे।

    आदमी हैरान परेशान हो गया पर उसने वैसा ही किया जैसा कि डॉक्टर ने उसे करने के लिए कहा।

    डाक्टर: ठीक है, अब जानवरों की तरह चलिए, और कमरे के दायें कोने में जाएं।

    आदमी ने यही किया।

    डाक्टर: ठीक अब बाएँ कोने में जाएं।

    आदमी उधर चला गया।

    डॉक्टर: अब इस कोने में, अब उस कोने में, अब सामने, अब बीच में।

    आदमी घबरा के उठ खड़ा हुआ और बोला, "डाक्टर साहब, कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हो गयी मुझे?"

    डॉक्टर: अरे नहीं, मामूली जुकाम है, ये दो गोली लो सुबह तक ठीक हो जाओगे।

    आदमी: पर डॉक्टर साहब आपने ये मेरा एक घंटे तक इस तरह परीक्षण क्यों किया?

    डॉक्टर: कुछ नहीं यार, बात यह है कि मैंने एक काले रंग का सोफा ख़रीदा है, मैं देखना चाहता था इस कमरे में वो किस जगह ठीक दिखेगा।
  • सुखी जीवन के 10 सूत्र:

    1) जानवरों से प्यार करो, वो स्वादिष्ट भी होते हैं।

    2) पानी बचाओ दारू पियो।

    3) फल और सलाद बहुत स्वास्थ्य प्रद होते हैं, उन्हें बीमारों के लिए रहने दो।

    4) किताबें पवित्र होती हैं, उन्हें मत छुओ।

    5) कक्षा में हंगामा नहीं करना चाहिए, जो सो रहे हैं वो जाग सकते हैं।

    6) पड़ोसियों से प्यार करो, लेकिन पकडे मत जाओ।

    6) ज़िंदगी से कोई चीज़ ऐसे मांगो जैसे तुम्हारे बाप की हो। अगर नहीं मिले तो दुखी मत हो, कौनसी तुम्हारे बाप की थी।

    8) शराब पीने से ज़िंदगी की मुश्किलें हल नहीं होती जूस पीने से भी नहीं होती। इसलिए पियो और पीने दो।

    9) अगर कोई हमे अच्छा लगता है तो अच्छा वो नहीं हम हैं और अगर कोई बुरा लगता है तो बुरे हम नहीं वो है, क्योंकि हम तो अच्छे हैं।

    10) अगर आप अपनी उँगलियाँ को इस्तेमाल अपनी गलतियां गिनने में करेंगे तो दूसरों को ऊँगली करने का वक़्त ही नहीं मिलेगा।