• शराबी की मज़बूरी!

    शराब की लत से प्रेशान एक शख्स डॉक्टर के पास गया और बोला, "डॉक्टर साहब मेरी शराब छुडाओ।"

    डॉक्टर ने पूछा: रोजाना कितनी पीते हो?

    शराबी बोला: चार पैग।

    डॉक्टर बोला: धीरे-धीरे एक पैग कम कर दो।

    शराबी एक हफ्ते बाद डॉक्टर के पास पहुंचा।

    डॉक्टर ने पूछा: अब कितनी शराब पीते हो?

    शराबी ने जवाब दिया: तीन पैग।

    डॉक्टर ने कहा: अब एक पैग और कम कर दो।

    दो हफ्ते बाद शराबी फिर डॉक्टर के पास गया।

    डॉक्टर ने पूछा: अब कितनी पीते हो मेरे भाई।

    शराबी बोला: सर दो पैग।

    डॉक्टर ने बोला: बस अब एक पैग और कम कर दो।

    शराबी ने उदास होकर जवाब दिया: सॉरी डॉक्टर साहब पूरी बोतल को एक पैग में तो नहीं खत्म कर सकता मैं।
  • पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट!

    एक दिन दफ्तर से घर आते हुए पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट हो गयी,
    और जो बीवी से मिलने की जल्दी थी वह ज़रा सी लेट हो गयी;

    जाते ही बीवी ने आँखे दिखाई - आदत अनुसार हम पर चिल्लाई;
    तुम क्या समझते हो मुझे नहीं है किसी बात का इल्म;
    जरुर देख रहे होगे तुम सक्रेटरी के साथ कोई फिल्म;

    मैंने कहा, "अरी पगली, घर आते ही ऐसे झिडकियां मत दिया कर;
    कभी तो छोड़ दे, मुझ बेचारे पर इस तरह शक मत किया कर";

    पत्नी फिर तेज होकर बोली, "मुझे बेवकूफ बना रहे हो;
    6 बजे दफ्तर बंद होता है और तुम 10 बजे आ रहे हो";

    मैंने कहा, "अब छोड़ यह धुन -
    मेरी बात ज़रा ध्यान से सुन";
    एक आदमी का एक हज़ार का नोट खो गया था;
    और वह उसे ढूंढने के जिद्द पर अड़ा था";

    पत्नी बोली, "तो तुम उसकी मदद कर रहे थे';
    मैंने कहा, "नहीं रे पगली मै ही तो उस पर खड़ा था";

    सुनते ही पत्नी हो गयी लोट-पोट;
    और बोली, "कहाँ है वह हज़ार का नोट";

    मैंने कहा, "बाकी तो खर्च हो गया यह लो सौ रुपये का नोट";

    वह बोली, "क्या सब खा गए बाकी के 900 कहाँ गए";

    मैंने कहा, "असल में जब उस नोट के ऊपर मै खडा था;
    तो एक लडकी की निगाह में उसी वक़्त मेरा पैर पडा था;
    कही वह कुछ बक ना दे इसलिए वह लडकी मनानी पडी;
    उसे उसी की पसंद के पिक्चर हाल में फिल्म दिखानी पडी;
    फिर उसे एक बढ़िया से रेस्टोरेन्ट में खाना खिलाना पड़ा;
    और फिर उसे अपनी बाइक से घर भी छोड़कर आना पड़ा;
    तब कहीं जाकर तुम्हारे लिए सौ रुपये बचा पाया हूँ;
    यूँ समझो जानू तुम्हारे लिए पानी पूरी का इंतजाम कर लाया हूँ";

    अब तो बीवी रजामंद थी - क्योंकि पानी पूरी उसे बेहद पसंद थी;
    तुरंत मुस्कुराकर बोली, "मै भी कितनी पागल हूँ इतनी देर से ऐसे ही बक बक किये जा रही थी;
    सच में आप मेरा कितना ख़याल रखते है और मै हूँ कि आप पर शक किये जा रही थी"!
  • तीन ठेकेदार!

    तीन भवन निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों की मौत के बाद वे तीनों स्वर्ग के दरवाजे पर मिले पहला पाकिस्तान का था दूसरा चीन का और तीसरा भारत का।

    जैसे ही वे स्वर्ग के अंदर जाने लगे दूत ने उन्हें रोका और कहा,"अन्दर जाने से पहले आप तीनों को मैं बता दूँ कि अन्दर जाने वाले इस गेट की मरम्मत करनी है तो आप तीनों ही मुझे थोड़ा सा अनुमान लगाकर बताएं कि इस पर कितना खर्चा आ सकता है।"

    सबसे पहले पाकिस्तानी ठेकेदार ने गेट को देखा और सोच कर बोला, "मेरे ख्याल से इसमें जितनी मरम्मत होनी है उस हिसाब से तो पूरा खर्चा 9000 रूपए आना चाहिए।"

    दूत ने उसे पूछा,"कि ये किस तरह से इतना अनुमान लगाया आपने ठेकेदार ने कहा 3000 रूपए का मैटीरीअल, 3000 रूपए मजदूर के और 3000 का मुनाफा।"

    दूत ने चीन के ठेकेदार को कहा कि, "तुम अपना अनुमान लगाओ।"

    थोड़ी देर उसने भी गेट को देखा और बोला, "33000 रूपए दूत ने कहा ये किस तरह हुआ।"

    चीन का ठेकेदार बोला, "11000 का मैटीरीअल, 11000 मजदूरों के और 11000 का मुनाफा।"

    जब दूत ने भारत के ठेकेदार को पूछा तो उसने बिना किसी निरीक्षण के झट से कह दिया 29000 रूपए।

    दूत ने पूछा, "किस हिसाब से आपने ये अनुमान लगाया।"

    ठेकेदार बोला, "10000 आपके 10000 मेरे और....

    9000 रूपए पाकिस्तानी ठेकेदार को दे देते है वह 9000 में बहुत अच्छा काम कर लेगा।"
  • गुरु, गुरु ही होता है!

    एक रात, चार कॉलेज विद्यार्थी देर तक मस्ती करते रहे और जब होश आया तो अगली सुबह होने वाली परीक्षा का भूत उनके सामने आकर खड़ा हो गया।

    परीक्षा से बचने के लिए उन्होंने एक योजना बनाई। मैकेनिकों जैसे गंदे और फटे पुराने कपड़े पहनकर वे प्रिंसिपल के सामने जा खड़े हुए और उन्हें अपनी दुर्दशा की जानकारी दी।

    उन्होंने प्रिंसिपल को बताया कि कल रात वे चारों एक दोस्त की शादी में गए हुए थे। लौटते में गाड़ी का टायर पंक्चर हो गया। किसी तरह धक्का लगा-लगाकर गाड़ी को यहां तक लाए हैं। इतनी थकान है कि बैठना भी संभव नहीं दिखता, पेपर हल करना तो दूर की बात है। यदि आप हम चारों की परीक्षा आज के बजाय किसी और दिन ले लें तो बड़ी मेहरबानी होगी।

    प्रिंसिपल साहब बड़ी आसानी से मान गए। उन्होंने तीन दिन बाद का समय दिया। विद्यार्थियों ने प्रिंसिपल साहब को धन्यवाद दिया और जाकर परीक्षा की तैयारी में लग गए।

    तीन दिन बाद जब वे परीक्षा देने पहुंचे तो प्रिंसिपल ने बताया कि यह विशेष परीक्षा केवल उन चारों के लिए ही आयोजित की गई है। चारों को अलग-अलग कमरों में बैठना होगा।

    चारों विद्यार्थी अपने-अपने नियत कमरों में जाकर बैठ गए। जो प्रश्नपत्र उन्हें दिया गया उसमें केवल दो ही प्रश्न थे:

    प्र.1 आपका नाम क्या है? (2 अंक)

    प्र.2 गाड़ी का कौन सा टायर पंक्चर हुआ था? (98 अंक)