• लम्बी दूरी!

    एक बार संता को एक लड़की से प्यार हो गया। वो रोज़ उसे ऑफिस, जहाँ को काम करती, ले जाने और वापस घर छोड़ के आने लगा।

    एक दिन रास्ते में लड़की बेहद उदास हो कर बोली, "कल लड़के वाले मुझे देखने आये थे।"

    संता: फिर?

    लड़की: मुझे पसंद कर गए।

    संता बेहद दुखी होते हुए बोला, "अब?"

    लड़की रोन लगी और रोते - रोते बोली, "अगले महीने की शादी तय हो गई, उनका घर लक्ष्मी नगर है।"

    संता गहरी सोच में पड़ गया।

    लड़की: अब क्या करना है, सोचो जल्दी।

    संता: सोच ही तो रहा हूँ। अब लक्ष्मी नगर से तुम्हें ऑफिस छोड़ने के लिए मुझे रिंग रोड़ लेनी पड़ेगी, फिर 3 किलोमीटर बाद यू - टर्न, उसके बाद वन वे के कारण राजगुरु रोड़, फिर वो मुखर्जी नगर वाला फ्लाई ओवर... ओये नहीं मेरे बस की बात नहीं है, तू अपने पति को ही बोल कोई इन्तेजाम करे, मुझे बहुत लम्बा पड़ेगा।"
  • गहराई की सच्चाई!

    एक बार संता और बंता एक कोयले की खदान में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं तो मैनेजर पहले बंता को बुलाता है और उसका इंटरव्यू लेता है।

    मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले भी कभी खदान में काम किया है?

    बंता: जी हाँ।

    मैनेजर: अच्छा तो मुझे यह बताओ की उसकी गहराई कितनी थी?

    बंता: जी 20 फुट।

    बंता की बात सुन मैनेजर को गुस्सा आ जाता है तो वह उस से कहता है, "क्या बकवास कर रहे हो 20 फुट गहरी भी कोई खदान होती है, तुम झूठ बोल रहे हो इसीलिए मेरे कमरे से बहार निकल जाओ।"

    मैनेजर की बात सुन बंता बहार आ जाता है और संता को अन्दर हुई सारी बात बताता है और कहता है, "अगर मैनेजर अन्दर तुमसे खदान की गहराई के बारे में पूछे तो ज्यादा से ज्यादा बताना।"

    उसके बाद संता की बारी आती है तो मैनेजर फिर उस से वही सवाल पूछता है।

    मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले कभी खदान में काम किया है?

    संता: जी हाँ।

    मैनेजर: अच्छा तो उस खदान की गहराई कितनी थी?

    संता: जी 20,000 हज़ार फुट।

    मैनेजर: बहुत बढ़िया तो एक बात और बताओ कि इतनी गहराई में काम करते वक्त तुम किस तरह की लाईटों का प्रयोग करते थे?

    संता: जी मुझे कभी लाईटों की ज़रूरत नहीं पड़ी क्योंकि मेरी दिन की शिफ्ट होती थी।

  • आदत से मज़बूर!

    एक आदमी की शादी में जब फेरे लेने की बारी आई तो पहले फेरे के वक्त ही दूल्हा दौड़कर दुल्हन से आगे निकल गया।

    पंडित जी ने दूल्हे को पीछे रहने को कहा।

    दूसरे फेरे के वक्त दुल्हन आगे हुई तो दूल्हा फिर दौड़कर आगे निकल गया।

    दूल्हा बार-बार ऐसे ही तेजी से दुल्हन के आगे निकल जाता।

    बार-बार ऐसा होता देख दुल्हन के पिता को गुस्सा आ गया और वे बोले, "यह कैसा दूल्हा है जो फेरे भी ढंग से नहीं ले सकता। ऐसे यह शादी नहीं हो सकती।"

    दूल्हे के चाचा ने समझाते हुए कहा, "माफ करना भाईसाहब, दरअसल लड़का हरियाणा रोडवेज की बस का ड्राईवर है इसलिए इसे बार - बार ओवरटेक करने की आदत है।
  • हसबैंड की परिभाषा!

    गांव की दो महिलाएं आपस में बात कर रही थी।

    पहली बोली, "बहन यह हसबैंड क्या होता है?"

    दूसरी ने मुस्कुराते हुए कहा, "बहन ये अजीब तरह का बैंड होता है। जो केवल घर के बेलन से ही बजाया जाता है। इस बैंड को बजाने का आनंद केवल शादीशुदा औरतें ही ले सकती हैं और इस बैंड की अच्छाई ये होती है कि इसे जितना बजाओगी उतनी ही मधुर धुन निकलेगी और धुन केवल घर के अंदर ही रहेगी। मजे की बात तो यह है कि इसे कितना भी बजाओ ये हँसता ही रहता है, इसीलिए इसे हसबैंड कहते हैं।"