• हरियाणे का भी रिवाज न्यारा है!

    हरियाणे का भी रिवाज न्यारा है।
    उल्टे सीधे नाम निकालने का भी स्वाद न्यारा है;

    किसी कमजोर को पहलवान कहण का,
    दूसरे की गर्ल फ्रैंड को सामान कहण का स्वाद न्यारा है;

    पहलवान को माडू कहण का,
    और फलों में आडू कहण का।स्वाद न्यारा है;

    एक अन्धे को सूरदास कहण का,
    किसी लुगाई न गंडाश कहण का स्वाद न्यारा है।

    चादर को दुशाला कहण का,
    लंगड़े को चौटाला कहण का स्वाद न्यारा है।

    सब्जी को साग कहण का,
    और काले को नाग कहण का स्वाद न्यारा है।
  • बाप बड़ा ना भइया!

    एक दिन माँ अपने बेटे के पास आई और बोली, "बेटा, मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूँ।"

    बेटा: हाँ माँ कहो, क्या बात है?

    माँ: बेटा, मेरे जो पति हैं वो तुम्हारे पिता नहीं हैं।

    बेटा: यह क्या कह रही हो माँ? होश में तो हो तुम?

    माँ: हाँ बेटा, मैं सच कह रही हूँ। 23 साल पहले मेरा तुम्हारे पिता से संबंध था लेकिन मज़बूरी के कारण हमारी शादी नहीं हो सकी। वो फ़ोन पर हैं तुमसे बात करना चाहते हैं।

    बेटा: नहीं माँ, मैं ऐसा नहीं कर सकता। मैं आज तक जिन्हें पिता कहता आ रहा हूँ, वही मेरे पिता हैं।

    माँ: नाराज़ मत हो बेटा, सिर्फ एक बार उनसे बात तो कर लो।

    बेटा: ठीक है, मगर मैं कुछ कह नहीं सकता कि मैं उन्हें अपना पिता मानूंगा या नहीं। सिर्फ तुम्हारे लिए मैं उनसे बात कर रहा हूँ।

    बेटे ने फ़ोन पकड़ा तो दूसरी तरफ से आवाज़ आई। मैं बिल गेट्स बोल रहा हूँ। मैं तुम्हारा असल पिता हूँ।

    बेटा: पापा, पापा भगवान का लाख-लाख शुक्र है। पापा आप समझ नहीं सकते मैं कितना खुश हूँ आप से बात करके। माँ तुम कितनी अच्छी हो। मैं बहुत खुश हूँ माँ। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ पापा।

    शिक्षा: ना बीवी ना बच्चा, ना बाप बड़ा ना भइया;
    सब से बड़ा रूपया।
  • कंजूस का दिमाग!

    एक दिन एक कंजूस आदमी के घर कोई मेहमान आ गया। अब कंजूस को यह चिंता सताने लगी कि इस मेहमान की मेहमान नवाज़ी में बेकार का खर्चा हो जायेगा तो उसने अपने अंदाज़ में हालात को कुछ यूँ संभाला।

    कंजूस: भाईसाहब, ठंडा लेंगे या गरम?

    मेहमान: ठंडा।

    कंजूस: जूस या कोल्ड ड्रिंक?

    मेहमान: कोल्ड ड्रिंक ले लूँगा।

    कंजूस: स्टील के गिलास में लेंगे या काँच के गिलास में?

    मेहमान: काँच के गिलास में ले आओ।

    कंजूस: प्लेन या डिजाइन वाला?

    मेहमान (परेशान होते हुए): अरे यार, डिजाइन वाले में ही ले आओ।

    कंजूस: ओके, कौन सी डिजाइन पसंद है? लाइनों वाली या फूलों वाली?

    मेहमान: फूलों वाली।

    कंजूस: कौन से फूल? गुलाब के या चमेली के?

    मेहमान: गुलाब के।

    कंजूस (अपनी बीवी से): अरे ज़रा देख तो गुलाब के फूलों की डिजाइन वाला गिलास अपने घर में है या नहीं?

    बीवी: नहीं है जी।

    कंजूस: ओ तेरी नहीं है, चल फिर कोल्ड ड्रिंक रहने दे। भाईसाहब को मजा नहीं आएगा।
  • पी रहे हैं...जी रहे हैं!

    एक समय की बात है, करंटपुरा नामक कस्बे में दो दोस्त रहा करते थे। पहला जबर्दस्त पियक्कड़ और दूसरा भला इंसान। दूसरा हमेशा पहले को समझाता रहता था।

    कुछ समय बाद दूसरा दोस्त कामकाज के सिलसिले में कस्बे से शहर जा पहुंचा। कुछ समय कमाई-धमाई की, फिर वापस गांव लौटा। अपनी नई साइकिल के पैडल मारते हुए सीधे अपने दोस्त के घर पहुँचा। पहला हमेशा की तरह धुत्त मिला।

    दूसरे ने पूछा, "और क्या चल रहा है?"

    पहला बोला, "कुछ नहीं बस, पी रहे हैं.. जी रहे हैं... तुम सुनाओ।"

    दूसरा बोला, "बस, बढ़िया, शहर में कामकाज चल निकला है। साइकिल खरीद ली है, तुम साले सुधर जाओ।"

    और पैडल मारते हुए वापस शहर की तरफ निकल लिया।

    कुछ दिनों बाद फिर शहर से कस्बे में पहुंचा। इस बार स्कूटर पर था। सीधे दोस्त के घर का रास्ता लिया। वहां फिर वही क्या चल रहा है? वही पी रहे हैं, जी रहे हैं... सुधर जाओ टाइप बातें हुईं। फिर दूसरे ने स्कूटर को किक लगाई और फिर शहर की दिशा में वापस हो लिए।

    इस बार दूसरा कुछ महीनों बाद कस्बे में पहुंचा। इस बार कार में था। सीधे दोस्त के घर का रास्ता लिया। पता चला कि वो घर पर नहीं हैं, खेत गया हुआ है। तो दूसरे ने कार सीधे खेत की दिशा मे दौड़ा दी। वहां पहुंचा तो देखता क्या है कि पहला खेत के बीचों-बीच खाट पर बैठ पी रहा है। पास में ही एक हेलिकॉप्टर खड़ा है। दूसरा सीधे अपने दोस्त के पास जा पहुँचा और वही पुरानी बातचीत शुरू हो गई, "और क्या चल रहा है?"

    पहला बोला, "बस, कुछ नहीं यार, वही पी रहे हैं, जी रहे हैं... पीते-पीते बोतलें ज्यादा इकट्ठी हो गईं तो बेचकर हेलिकॉप्टर खरीद लिया और पार्किंग के लिए खेत भी खरीद लिया है, और तुम सुनाओ।"

    दूसरा वहीं बेहोश हो गया।