• एक प्रेम कहानी!

    पत्नी: अगर मैं अचानक मर गई तो तुम क्या दूसरी शादी करोगे?
    पति: नो डार्लिंग, ऐसा तो मैं सोच भी नहीं सकता।

    पत्नी: क्यों, नहीं क्यों? अरे आपके अच्छे बुरे पलों को बांटने के लिए कोई तो साथी चाहिए। प्लीज शादी कर लेना डार्लिंग।
    पति: ओह माय शोना... मरने के बाद की भी मेरी इतनी फ़िक्र?

    पत्नी: तो वादा? आप दूसरी शादी कर लोगे ना?
    पति: ओके बाबा, लेकिन सिर्फ तुम्हारी खातिर करूँगा।

    पत्नी: तुम अपनी नई पत्नी को इस घर में रखोगे ना?
    पति: हाँ, लेकिन उसे तुम्हारा कमरा कभी इस्तेमाल नहीं करने दूंगा।

    पत्नी: उसे अपनी कार चलाने दोगे?
    पति: नो, नेवर... उस कार को तो तुम्हारी यादगार बना के रखूंगा। उसको दूसरी कार दिला दूंगा।

    पत्नी: और मेरे ज़ेवर?
    पति: वो उसे कैसे दे सकता हूँ। उनसे तुम्हारी यादें जुड़ीं होंगी। वो अपने लिए नई ज्वेलरी मांगेगी ना।

    पत्नी: वो मेरी चप्पलें पहनेगी तो?
    पति: नहीं उसका नंबर 7 है और तुम्हारा 9।

    कमरे में एक दम चुप्पी छा गई।
    पति: ओ नो।

    पति का अंतिम संस्कार कल दोपहर 3:00 बजे होगा।
  • नाराज़ पत्नी का प्यार!

    एक बार एक पति अपनी पत्नी के पास गया और बड़े ही प्यार से उसका हाथ अपने हाथों में थाम कर बोला;

    पति: जानू तुम मुझे कितना प्यार करती हो?

    पत्नी जो की पहले से ही किसी बात पर नाराज़ बैठी थी चिड़ते हुए बोली;

    पत्नी: बहुत सारा!

    पत्नी की बात सुन पति फिर बोला;

    पति: अच्छा तो जानू कुछ ऐसी बात कहो जो सुनने के बाद मेरे पाँव ज़मीन पर ना लगें!

    पत्नी: जा के पंखे से फांसी लगा लो!
  • संता की समझदारी!

    एक बार संता गाड़ी में अपने दोस्त बंता के साथ पिकनिक पर जा रहा था। गाड़ी के सामने के काँच से बंता को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन संता सड़क के तमाम गड्ढे बचाता हुआ बड़ी सफाई से गाडी चला रहा था।

    बंता ने हैरान होकर पूछा, "संता, सामने काँच से कुछ भी साफ़ नजर नहीं आ रहा। फिर भी गाड़ी इतनी परफेक्ट कैसे चला रहे हो?"

    संता: क्या बताऊँ यार? अपनी भूलने की आदत के कारण अब तक मेरे 180 चश्मे गुम चुके हैं।

    बंता: अरे संता मैं ड्राइविंग के बारे में पूछ रहा हूँ।

    संता: वही तो बता रहा हूँ कि चश्मे बनवा बनवा कर मैं परेशान हो गया तब मैंने गाड़ी का काँच ही चश्मे के नंबर वाला बनवाकर गाड़ी में लगवा लिया।
  • सस्ता इलाज!

    एक आदमी मनोचिकित्सक के पास गया और बोला, "डॉक्टर साहब मैं बहुत परेशान हूं। जब भी मैं बिस्तर पर लेटता हूं, मुझे लगता है कि बिस्तर के नीचे कोई है। जब मैं बिस्तर के नीचे देखने जाता हूं तो लगता है कि बिस्तर के ऊपर कोई है। नीचे, ऊपर, नीचे, ऊपर यही करता रहता हूं। सो नहीं पाता हूं। मेरा इलाज कीजिये नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा।"

    डॉक्टर ने कहा, "तुम्हारा इलाज लगभग दो साल तक चलेगा। तुम्हें सप्ताह में तीन बार आना पड़ेगा। अगर तुमने मेरा इलाज मेरे बताये अनुसार लिया तो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे।"

    मरीज: पर डॉक्टर साहब, आपकी फीस कितनी होगी?

    डॉक्टर: सौ रूपये प्रति मुलाकात।

    आदमी गरीब था इसीलिए फिर आने को कहकर चला गया।

    लगभग छ: महीने बाद वही आदमी डॉक्टर को सड़क पर घूमते हुये मिला, "क्यों भाई, तुम फिर अपना इलाज कराने क्यों नहीं आये?" मनोचिकित्सक ने पूछा।

    "सौ रूपये प्रति मुलाकात में इलाज कैसे करवाऊं? मेरे पड़ोसी ने मेरा इलाज सिर्फ बीस रूपये में कर दिया" आदमी ने जवाब दिया।

    डॉक्टर: अच्छा! वो कैसे?

    मरीज: दरअसल वह एक बढ़ई है, उसने मेरे पलंग के चारों पाए सिर्फ पांच रूपये प्रति पाए के हिसाब से काट दिये।