• हिसाब बराबर!

    एक बार एक मरता हुआ पति अपनी पत्नी से अपराध स्वीकारोक्ति करते हुए बोला।

    पति: प्रिये, दो साल पहले अलमारी से तुम्हारा गोल्ड सेट मैंने ही चोरी किया था।

    पत्नी (रोते हुए): कोई बात नहीं जी।

    पति: एक साल पहले तेरे भाई ने तुझे जो 1 लाख रूपए दिए थे वो भी मैंने ही गायब किये थे।

    पत्नी: कोई बात नहीं मैंने आपको माफ़ किया।

    पति: तेरी कमेटी के पैसे भी मैंने ही चोरी किये थे।

    पत्नी: कोई बात नहीं जी, आपको ज़हर भी मैंने ही दिया है इसलिए हिसाब बराबर।
  • बेरोज़गारी का हाल!

    नदी में डूबते हुए आदमी ने पुल पर चलते हुए आदमी को आवाज़ लगायी।

    आदमी: "बचाओ-बचाओ।"

    पुल पर चलते आदमी ने नीचे देखा और उस आदमी को बचाने के लिए पुल से नीचे रस्सी फैंकी और कहा, "रस्सी को पकड़ के ऊपर आ जाओ।"

    परन्तु नदी में डूबता हुआ आदमी रस्सी नहीं पकड़ पा रहा था तो वह डर के मारे चिल्ला कर बोला, "मैं मरना नहीं चाहता, ज़िन्दगी बड़ी कीमती है कल ही तो मेरी टार्जन कंपनी में बड़ी अच्छी नौकरी लगी है।"

    इतना सुनते ही पुल पर चलते आदमी ने अपनी रस्सी खींच ली और भागते-भागते टार्जन कंपनी के दफ्तर में गया वहां के मैनेजर से बोला," जिस आदमी को आपने कल नौकरी दी थी वो अभी-अभी डूबकर मर गया है, और इस तरह आपकी कंपनी में एक जगह खाली हो गयी है, मैं बेरोजगार हूँ इसीलिए मुझे रख लीजिये।"

    मैनेजर: "दोस्त, तुमने देर कर दी, अब से कुछ देर पहले हमने उस आदमी को रखा है, जो उसे धक्का दे कर तुमसे पहले यहाँ आया है।"
  • जो आप कहो!

    पति: आज खाने में क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो।

    पति: दाल-चावल बना लो।

    पत्नी: अभी कल ही तो खाये थे।

    पति: तो छोले-पूरी बना लो।

    पत्नी: नहीं वो बहुत भारी खाना हो जाता है।

    पति: अच्छा परांठे बना लो।

    पत्नी: रात को परांठे कौन खाता है?

    पति: तो फिर इडली-सांभर बना लो।

    पत्नी: उसमे तो बहुत टाइम लगेगा।

    पति: ठीक है मैग्गी ही बना लो।

    पत्नी: पर उस से पेट नहीं भरेगा।

    पति: तो फिर क्या बनाओगी?

    पत्नी: जो आप कहो!
  • राजनीती का सबक़!

    नेता का बेटा अपने पिता से बोला, "पापा मुझे भी राजनीति में आना हैं, मुझे कुछ टिप्स दो।"

    नेता: बेटा, राजनीति के तीन कठोर नियम होते हैं। चलो सबसे पहले मैं तुम्हें पहला और सबसे अहम नियम समझाता हूँ। यह कहकर नेता जी ने बेटे को छत पर भेज दिया और ख़ुद नीचे आकर खड़ा हो गया।

    नेता जी: छत से नीचे कूद जाओ।

    बेटा: पापा, इतनी ऊंचाई से कुदूंगा तो हाथ पैर टूट जायेंगे।

    नेता जी: बेझिझक कूद जा, मैं हूँ ना, पकड़ लूँगा।

    लड़के ने हिम्मत की और कूद गया, पर नेताजी नीचे से हट गए।

    बेटा धड़ाम से औंधे मुंह गिरा और कराहते हुए बोला, "आपने तो कहा था मुझे पकड़ोगे, फिर हट क्यों गए?"

    नेता जी: ये है पहला सबक, "राजनीति में अपने बाप का भी भरोसा मत करो।"