• ज़िन्दगी के पड़ाव!

    विभिन्न आयु के छात्रो का सबसे अच्छा सामूहिक उदाहरण:

    पहली से तीसरी कक्षा तक: मुझे तो पूरा पर्चा आता था।

    चौथी से छटी कक्षा तक: यार 8 नंबर वाला प्रश्न तो बहुत मुश्किल था मैंने सिर्फ उसे ही छोड़ा है।

    सातवी से दसवी कक्षा तक: मैंने तो सिर्फ मुख्य ही प्रश्न किये हैं।

    ग्यारवी कक्षा में: मुझे लगता है पास होने के लिए चार पाठ पढ़ना बहुत है।

    बाहरवीं कक्षा: कल पेपर कौन सा है यार।

    और कॉलेज के दिनों में: सालों बता तो देते आज पेपर है, मैं तो पेन भी नहीं लाया।
  • कहानी जुगाड़ की!

    पिता लड़के से: मैंने तुम्हारी शादी के लिए एक लड़की देखी है।

    लड़का: लेकिन मैं अपनी मर्जी से शादी करूँगा।

    पिता: लेकिन वो लड़की बिल गेट्स की लड़की है।

    लड़का: यदि ऐसा है तो ठीक है।

    अगले दिन पिता बिल गेट्स के पास जाता है।

    पिता: मैंने आपकी लड़की की शादी के लिए एक अच्छा लड़का देखा है।

    बिल गेट्स: लेकिन मेरी लड़की अभी शादी के लिए छोटी है।

    पिता: लेकिन वो लड़का वर्ल्ड बैंक का वाइस प्रेसिडेंट है।

    बिल गेट्स: यदि ऐसा है तो ठीक है।

    अगले दिन पिता वर्ल्ड बैंक प्रेसिडेंट के पास जाता है।

    पिता: मैंने आपके बैंक के वाइस प्रेसिडेंट बनाने लायक एक अच्छा लड़का देखा है।

    प्रेसिडेंट: लेकिन हमारे बैंक मैं पहले से ही वाइस प्रेसिडेंट है।

    पिता: लेकिन वो लड़का बिल गेट्स का दामाद है।

    प्रेसिडेंट: यदि ऐसा है तो ठीक है।
  • बॉस का आदेश!

    एक बार कुछ लड़कियां शहर से गाँव घूमने आई थी। जब वो वापस लौट रही थी तो रास्ते में जिस बस में वे सफर कर रहीं थी, कुछ डाकुओं ने उस बस को घेर लिया। बस लूटने वाले दो डाकुओं ने पिस्तौल दिखाकर बस जंगल में रुकवा ली, तो सभी मुसाफिरों में सन्नाटा छा गया।

    एक डाकू ने अपने साथी से कहा, "हम पुरुषों को लूटेंगे और सभी औरतों को अपने साथ ले जाएँगे।"

    दूसरा डाकू जो पहले वाले से कमजोर था बोला, "नहीं, हम सारा सामान लूटेंगे, औरतों को कुछ नहीं कहेंगे।"

    यह सुन पीछे की सीट पर बैठी लड़कियों ने आपस में खुसुर - फुसुर की और फिर उनमे से एक दूसरे डाकू से बोली, "ऐ, तुम अपने बॉस का आदेश मानो। जैसा वो कह रहा है वैसा करो।"
  • आदमी तो आदमी ही हैं!

    एक व्यक्ति मरकर ऊपर पहुँचा तो स्वर्ग के द्वार पर उसे स्वयं चित्रगुप्त मिले।

    चित्रगुप्त बोले, "तुम एक शर्त पर भीतर आ सकते हो।"

    व्यक्ति: कौन सी शर्त प्रभु?

    चित्रगुप्त: तुम्हें एक शब्द जो कि फिरंगी जुबान का है, की स्पैलिंग ठीक-ठीक बतानी होगी।

    व्यक्ति: कौन सा शब्द है प्रभु?

    चित्रगुप्त: 'लव'।

    व्यक्ति: एल-ओ-वी-ई।

    चित्रगुप्त: बहुत अच्छा, तुम भीतर आ सकते हो।

    वो व्यक्ति भीतर दाखिल हो रहा था तभी चित्रगुप्त का मोबाइल बज उठा।

    चित्रगुप्त: हमें भगवान् बुला रहे है, तुम एक मिनट द्वार पर निगाह रखना हम अभी लौट के आते हैं।

    व्यक्ति: जो आज्ञा प्रभु।

    चित्रगुप्त: हमारी अनुपस्थिति में अगर कोई और प्राणी यहाँ पहुँच जाए तो उसको प्रवेश देने से पहले उससे भी 'लव' शब्द की स्पैलिंग जरुर पूछना, अगर वो भी तुम्हारी तरह स्पैलिंग ठीक बताये तो ही उसे भीतर आने देना। नहीं तो उसे सामने के द्वार से नर्क भेज देना।

    व्यक्ति: ठीक है।

    इतना कह कर चित्रगुप्त चले गए और वो व्यक्ति द्वार पर पहरा देने लगा। तभी एक स्त्री वहाँ पहुँची। वो व्यक्ति ये देखकर बहुत हैरान हुआ कि वो उसकी बीवी थी।

    वो बोला, "अरे, तुम यहाँ कैसे पहुँच गयी?"

    बीवी: तुम्हारे अंतिम संस्कार के बाद जब मैं श्मशान घाट से लौट रही थी तब बस ने मुझे कुचल दिया, उसके बाद जब मुझे होश आया तो मैं यहाँ खड़ी थी। अब हटो मुझे भीतर आने दो।

    व्यक्ति: ऐसे नहीं, भगवान के यहाँ के नियम के अनुसार पहले तुम्हें एक शब्द की स्पैलिंग ठीक-ठीक बतानी होगी, तभी तुम यहाँ अन्दर आ सकती हो। नहीं तो तुम्हें सामने के द्वार से नर्क जाना होगा।

    बीवी: कौन सा शब्द?
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    व्यक्ति: 'चेकोस्लोवाकिया'।