• बुरे फंसे यार!

    आज तो कमाल ही हो गयी। सुबह-सुबह श्रीमती जी नाश्ता बना रही थी, इतने में किसी ने दरवाजा खटखटाया। श्रीमती जी ने दरवाज़ा खोला तो एक सेल्समैन दनदना के अंदर पहुँचा और पूरे कालीन पर गोबर गिरा दिया।

    श्रीमती जी गुस्से में चिल्लाते हुए, "अरे, यह क्या कर दिया। अभी तो सफाई की है और आप हो कौन?"

    सेल्समैन: मैडम मैं एक सेल्समैन हूँ, आपको यह वैक्यूम क्लीनर का कमाल दिखाने आया हूँ।

    श्रीमती जी: वैक्यूम क्लीनर का कमाल दिखाना है तो यह सारी गंदगी क्यों फैला दी?

    सेल्समैन: मैडम तभी तो इसका कमाल दिखेगा।

    सेल्समैन: क्योंकि अभी 2 मिनट में देखना यह सारी गंदगी साफ़ हो जाएगी और अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं खुद अपनी जीभ से चाट कर इसे साफ़ करूँगा।

    श्रीमती जी ने सेल्समैन की तरफ घूर कर देखा और बोली, "जीभ से मत चाटना ऐसे ही हाथ से उठा कर खाना शुरू कर दो।"

    सेल्समैन: आप ऐसा क्यों बोल रही हैं मैडम।

    श्रीमती जी: क्योंकि घर में बिजली नहीं है। अब हो जाओ शुरू।

    शिक्षा: कुछ भी करने से पहले पूरी जानकारी इकठी कर ले ताकि बाद में पछताना ना पड़े।
  • गहराई की सच्चाई!

    एक बार संता और बंता एक कोयले की खदान में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं तो मैनेजर पहले बंता को बुलाता है और उसका इंटरव्यू लेता है।

    मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले भी कभी खदान में काम किया है?

    बंता: जी हाँ।

    मैनेजर: अच्छा तो मुझे यह बताओ की उसकी गहराई कितनी थी?

    बंता: जी 20 फुट।

    बंता की बात सुन मैनेजर को गुस्सा आ जाता है तो वह उस से कहता है, "क्या बकवास कर रहे हो 20 फुट गहरी भी कोई खदान होती है, तुम झूठ बोल रहे हो इसीलिए मेरे कमरे से बहार निकल जाओ।"

    मैनेजर की बात सुन बंता बहार आ जाता है और संता को अन्दर हुई सारी बात बताता है और कहता है, "अगर मैनेजर अन्दर तुमसे खदान की गहराई के बारे में पूछे तो ज्यादा से ज्यादा बताना।"

    उसके बाद संता की बारी आती है तो मैनेजर फिर उस से वही सवाल पूछता है।

    मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले कभी खदान में काम किया है?

    संता: जी हाँ।

    मैनेजर: अच्छा तो उस खदान की गहराई कितनी थी?

    संता: जी 20,000 हज़ार फुट।

    मैनेजर: बहुत बढ़िया तो एक बात और बताओ कि इतनी गहराई में काम करते वक्त तुम किस तरह की लाईटों का प्रयोग करते थे?

    संता: जी मुझे कभी लाईटों की ज़रूरत नहीं पड़ी क्योंकि मेरी दिन की शिफ्ट होती थी।

  • गहराई की सच्चाई!

    एक बार संता और बंता एक कोयले की खदान में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं तो मैनेजर पहले बंता को बुलाता है और उसका इंटरव्यू लेता है।

    मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले भी कभी खदान में काम किया है?

    बंता: जी हाँ।

    मैनेजर: अच्छा तो मुझे यह बताओ की उसकी गहराई कितनी थी?

    बंता: जी 20 फुट।

    बंता की बात सुन मैनेजर को गुस्सा आ जाता है तो वह उस से कहता है, "क्या बकवास कर रहे हो 20 फुट गहरी भी कोई खदान होती है, तुम झूठ बोल रहे हो इसीलिए मेरे कमरे से बहार निकल जाओ।"

    मैनेजर की बात सुन बंता बहार आ जाता है और संता को अन्दर हुई सारी बात बताता है और कहता है, "अगर मैनेजर अन्दर तुमसे खदान की गहराई के बारे में पूछे तो ज्यादा से ज्यादा बताना।"

    उसके बाद संता की बारी आती है तो मैनेजर फिर उस से वही सवाल पूछता है।

    मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले कभी खदान में काम किया है?

    संता: जी हाँ।

    मैनेजर: अच्छा तो उस खदान की गहराई कितनी थी?

    संता: जी 20,000 हज़ार फुट।

    मैनेजर: बहुत बढ़िया तो एक बात और बताओ कि इतनी गहराई में काम करते वक्त तुम किस तरह की लाईटों का प्रयोग करते थे?

    संता: जी मुझे कभी लाईटों की ज़रूरत नहीं पड़ी क्योंकि मेरी दिन की शिफ्ट होती थी।
  • होशियारी के नुक्सान!

    एक बार दो दोस्त गोरखपुर से दिल्ली जा रहे थे।

    डिब्बे में भीड़ ज्यादा थी तो उन्हें सीट नहीं मिल रही थी तो सीट के लिए उन्हें शरारत सूझी।

    उन्होंने अपने बैग से रबड़ का एक सांप निकाला और चुपके से डिब्बे में छोड़ दिया और चिल्लाने लगे।
    सांप... सांप!

    थोड़ी देर में डिब्बा खाली हो गया और उन्होंने जल्दी से बिस्तर जमाकर जगह रोक ली।

    सुबह जब आंख खुली, तो पांच बजे थे और गाड़ी किसी स्टेशन पर खड़ी थी।

    उन्होंने खिड़की से बाहर झांककर रेलवे के कर्मचारी से पूछा: यह कौन सा स्टेशन है?

    जवाब मिला: गोरखपुर।

    उन्होंने पूछा: क्या गाड़ी दिल्ली नहीं गई?

    कर्मचारी बोला: गाड़ी तो दिल्ली गई, लेकिन इस डिब्बे में सांप निकलने के कारण इस डिब्बे को काट दिया गया।