• संता का रोमांस!

    एक बार संता अपनी प्रेमिका के साथ पार्क में बाहों में बाहें डाल कर बैठा हुआ था और कुछ बड़ी ही रूमानी बातें कर रहा था कि तभी अचानक वहां एक हवलदार आया और संता से बोला, " आपको शर्म नहीं आती आप एक समझदार व्यक्ति होकर खुलेआम पार्क में ऐसी हरकत कर रहे हैं"।

    संता: देखिये हवालदार साहब आप गलत समझ रहे हैं, जैसा आप सोच रहे हैं वैसा कुछ भी नहीं है।

    हवलदार: तो कैसा है?

    संता: जी हम दोनों शादीशुदा हैं।

    हवालदार: अगर तुम शादीशुदा हो तो फिर अपनी ये प्यार भरी गुटरगूं अपने घर पर क्यों नहीं करते।

    संता: हवालदार साहब कर तो लें पर वहां मेरी पत्नी और और इसके पति को शायद अच्छा नहीं लगेगा।
  • जिन्न भी हर काम नहीं कर सकता!

    एक बार संता को रास्ते में एक चिराग मिला तो उसने सोचा कि, "क्यों ना चिराग रगड़ कर देखूं शायद इसमें से कोई जिन्न ही निकल आये"।

    यह सोच कर संता ने चिराग रगडा, तो उसमे से धुंए के साथ एक जिन्न निकल कर आया और संता से बोला।

    जिन्न: क्या हुकुम है मेरे आका?

    संता: मेरे बैंक खाते में 100 करोड़ रूपए जमा करा दो।

    जिन्न: यह तो थोडा मुश्किल काम है आका कोई और हुकुम करें।

    संता: तो ठीक है मेरे घर से लेकर अमेरिका तक सीधी सड़क बना दो।

    जिन्न: आका यह काम भी थोडा नामुमकिन सा है कोई और आदेश करें?

    जिन्न की बात सुन कर संता ने ठंडी सी आह भरते हुए कहा, "अच्छा चलो कम से कम मेरी बीवी को थोड़ी सी अक्ल देकर समझदार तो बना दो"।

    संता की बात सुन कर जिन्न तपाक से बोला, "आका सड़क सिंगल लेन बनानी है या डबल लेन"?
  • अब संता क्या कहे!

    स्कूल से अपने बेटे पप्पू के काफी सारे प्रेम प्रसंगों और बुरी आदतों की शिकायतें आने के बाद एक दिन संता उसे बुलाया और कहा।

    संता: बेटा मुझे समझ नहीं आ रहा तुम्हे कैसे कहूं पर मुझे लगता की वह वक्त आ गया है जब हम दोनों स्त्री-पुरुष संबंधों के बारे में आपस में खुल कर बातचीत करें।

    संता की बात सुन पप्पू तपाक से बोला, "अरे पापा शर्माइये नहीं बताइए ना आप क्या जानना चाहते हैं"?
  • कड़क रोटी!

    एक बार संता एक दांतों के डॉक्टर के पास जाता और अपनी परेशानी बताता है।

    डॉक्टर : वो तो सब ठीक है पर आपके ये तीन दांत टूटे कैसे?

    संता: पत्नी ने कड़क रोटी बनाई थी।

    डॉक्टर: अरे तो दांत तुडवाने से अच्छा था कि आप खाने से मना कर देते।

    संता: वही तो किया था।