• कभी होंडा चलाया है!

    एक दिन एक आदमी हाई वे पर अपनी फिएट कार में 45KMPH की रफ़्तार से अपनी मस्ती में चल रहा था!

    अचानक बंता अपने होंडा में आया बोइईईईन्न्नन्न्न्नन्नन्न और गाड़ी के अन्दर झांकता हुआ चिल्ला कर पूछता है कभी होंडा चलाया है क्या? और तेजी से आगे निकल गया!

    गाड़ी वाला थोड़ा हैरान हुआ पर उसने इसकी कोई परवाह नहीं की उसे लगा की वो उसे ऐसे ही छेड़ रहा है!

    पर थोड़ी देर बाद बंता उस गाड़ी के पास आया गाड़ी के अन्दर झांकते हुए फिर से वही पूछा इस वक़्त वो कार वाला कुछ कहना चाहता था पर बंता तेजी से आगे निकल गया!

    एक दो बार जब और ऐसा हुआ तो कार वाले ने बंता को पकड़ने के लिए गाड़ी की गति बड़ा दी अभी वो थोड़ा आगे ही पहुंचा ही था की देखा बंता सड़क पर गिरा है और खून से लथपथ है!

    वह गाड़ी से नीचे उतरा और बंता का मजाक उड़ाते हुए कहने लगा, क्यों भाई कभी होंडा चलाया है क्या?

    बंता ने कहा वही तो पूछ रहा था, मैं इसमें ब्रैकें ढूँढ रहा था!
  • दो पागल!

    एक पागलखाने में संता और बंता नाम के दो पागल थे!

    एक दिन जब वे दोनों पागलों के लिये बनाये गये नहाने के तालाब के किनारे टहल रहे थे कि अचानक बंता का पैर फिसल गया और वह पानी में जा गिरा उसे तैरना नहीं आता था लिहाजा वह डूबने लगा अपने दोस्त को डूबते देख संता फौरन पानी में कूद गया और बड़ी मेहनत करके उसे जिन्दा बाहर निकाल लाया!

    जब यह खबर पागलखाने के अधिकारी को लगी तो वह आश्चर्य में पड़ गया!

    इसका मतलब संता बिलकुल ठीक हो गया है!

    उसने सोचा सचमुच संता का बहादुरी का कारनामा जिसने भी सुना उसने यही राय दी कि अब संता ठीक हो गया है!

    अब वह पागल नहीं है अधिकारी ने उसे पागलखाने से रिहा करने का निश्चय कर लिया!

    अगले दिन अधिकारी ने संता को अपने चेंबर में बुलाया और कहा संता, तुम्हारे लिये दो खबरें है एक बुरी और एक अच्छी!

    अच्छी खबर यह कि तुम्हें पागलखाने से छुट्टी दी जा रही है क्योंकि अब तुम्हारी दिमागी हालत बिल्कुल ठीक है!

    तुमने बंता की जान बचाने का जो कारनामा किया है उससे यही साबित होता है!

    बुरी खबर यह है कि बंता ने, ठीक तुम्हारे द्वारा उसकी जान बचाने के बाद बाथरूम में जाकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली! वह मर चुका है! संता ने जवाब दिया उसने खुद अपने आपको नहीं लटकाया, वह तो मैंने ही उसे सूखने के लिये वहां लटकाया था तालाब में गीला हो गया था न! तो अब मैं घर जा सकता हूं?
  • उल्लू के पट्ठे!

    संता अपने बेटे के लिए एक खिलौना रेलगाड़ी खरीद कर लाया!

    खिलौना देने के कुछ देर बाद जब वह बेटे के कमरे में गया तो देखा कि बच्चा रेलगाड़ी से खेल रहा है और कह रहा है जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए।

    रेलगाड़ी दो मिनट से ज्यादा नहीं रुकेगी!

    बच्चे के मुंह से यह भाषा सुनकर संता को गुस्सा आ गया गया!

    उसने बच्चे को जोर के दो तमाचे लगाए और फिर कभी इस तरह से न बोलने की चेतावनी दी फिर बोला, मैं दो घंटे के लिए बाजार जा रहा हूं। तब तक तुम सिर्फ पढ़ोगे, समझे!

    दो घंटे बाद बाद जब संता लौटकर आया तो बच्चे को पढ़ते हुए पाया!

    यह देखकर उसका दिल पसीज गया और उसने बच्चे को फिर रेलगाड़ी से खेलने की इजाजत दे दी!

    अबकी बार उसने बच्चे को कहते हुए सुना जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए!

    गाड़ी पहले ही एक उल्लू के पट्ठे की वजह से दो घंटे लेट हो चुकी है!
  • बस स्टेशन!

    एक बार संता और बंता लुधिआना जा रहे थे जब वो वहां पहुंचे संता पहले बस से उतरा जब बंता बस से नीचे उतरने लगा तो संता ने कहा जरा ठहरो! ये जमीन पर बिखरा हुआ क्या है?

    उसने थोड़ा सा अपनी ऊँगली पर लगाया और ऊँगली को अपने मुहं में डाल दिया अरे छि: छि:..ये तो गोबर है!

    बंता कहने लगा: अरे शुक्र.. कर पैरे नहीं लिबड़या!