• एक मैनेजर पति और उसकी पत्नी की कहानी!

    पत्नी - रात का खाना आज बाहर करेगें।

    पति - ठीक है ... हम किसी साधारण रेस्तरां में चलते हैं।

    पत्नी - नहीं, रॉयल पैलेस होटल में चलते हैं।

    पति - (एक मिनट के लिए मौन) ठीक है, 7 बजे चलते हैं।

    ठीक सात बजे पति-पत्नी अपनी कार में घर से निकले। रास्ते में -

    पति - जानती हो एक बार मैंने अपनी बहन के साथ पानीपूरी प्रतिस्पर्धा की थी। मैंने 30 पानी पूरी खाई और उसे हरा दिया।

    पत्नी - क्या यह इतना मुश्किल है?

    पति - मुझे पानी-पूरी प्रतियोगिता में परास्त करना बहुत मुश्किल है।

    पत्नी - मैं आसानी से आपको हरा सकती हूँ।

    पति - रहने दो ये तुम्हारे बस का नहीं।

    पत्नी - हमसे प्रतियोगिता करने चलिये।

    पति - तो आप अपने आप को हारा हुआ देखना चाहती हैं?

    पत्नी - चलिये देखते हैं।

    वे दोनों एक पानी-पूरी स्टॉल पर रुके और खाना शुरू कर दिए ।

    25 पानी पूरी के बाद पति ने खाना छोड़ दिया।

    पत्नी का भी पेट भर गया था, लेकिन उसने पति को हराने के लिए एक और खा लिया और चिल्लाई , `तुम हार गये।`

    बिल 50 रुपये आया। और पत्नी वापस घर आते हुए शर्त जीतने की खुशी में खुश थी।

    कहानी से नैतिक शिक्षा:

    `एक प्रबंधक का मुख्य उद्देश्य न्यूनतम निवेश के साथ कर्मचारी को संतुष्ट करना होता है। कम निवेश पर मजबूत वापसी सुनिश्चित!`
  • पत्नी का हक़!

    पति: अजी सुनती हो?

    पत्नी: नहीं, मैं तो जनम की बहरी हूँ। बोलो?

    पति: मैंने ऐसा कब कहा?

    पत्नी: तो अब कह लो, पूरी कर लो एक साथ, कोई भी हसरत अगर अधूरी रह गयी हो।

    पति: अरी भाग्यवान!

    पत्नी: सुनो एक बात... आइन्दा मुझे भाग्यवान तो कहना मत, फूट गए नसीब मेरे तुमसे शादी करके और कहते हो भाग्यवान हूँ।

    पति: एक कप चाय मिलेगी?

    पत्नी: एक कप क्यों? लोटा भर मिलेगी और सुनो किसको सुना रहे हो? मैं क्या चाय बना के नहीं देती?

    पति: अरे यार कभी तो सीधे मुँह बात...

    पत्नी: बस... आगे मत बोलना, नहीं आता मुझे सीधे मुँह बात करना। मेरा तो मुँह ही टेढ़ा है, यही कहना चाहते हो ना?

    पति: हे भगवान!

    पत्नी: हाँ... माँग लो भगवान जी से एक कप चाय। मैं चली नहाने, और सुनो मुझे शैम्पू भी करना है देर लगेगी। बच्चों को स्कूल से ले आना मेरे अकेले के नहीं हैं।

    पति: अरे ये सब क्या बोलती हो?

    पत्नी: क्यों झूठ बोल दिया क्या? मैं क्या दहेज़ में ले कर आयी थी इनको?

    पति: अरे मैं कहाँ कुछ बोल रहा हूँ?

    पत्नी: अरे मेरे भोले बाबा, तुम कहाँ बोलते हो? मैं तो चुप थी। बोलना किसने शुरू किया? बताओ?

    पति: अरे मैंने तो एक कप चाय माँगी थी।

    पत्नी: चाय मांगी थी या मुझे बहरी कहा था? क्या मतलब था तुम्हारा? "अजी सुनती हो?" का क्या मतलब था बताओगे?

    पति: अरे श्रीमती जी। कभी तो मीठे से बोल लिया करो।

    पत्नी: अच्छा... मीठा नहीं बोली मैं कभी? तो ये दो-दो नमूने क्या पड़ोसी के हैं? देख लिया है बहुत मीठा बोल कर।

    बस अब और मीठा बोलने कि हिम्मत नहीं है मेरी।

    पति: भूल रही हो मैडम।

    पत्नी: क्या भूल रही हूँ?

    पति: अरे मुझे बात तो पूरी करने दो। मैं कह रहा था कि पति हूँ तुम्हारा।

    पत्नी: अच्छा मुझे नहीं पता था। सूचना के लिए धन्यवाद।

    पति: अरे नहीं चाहिए मुझे तुम्हारी चाय। बक-बक बंद करो।

    पत्नी: अरे वाह! तुम्हें तो बोलना भी आता है? बहुत अच्छे, चाय पी के जाओ। बाद में नहा लूँगी।

    पति: गज़ब हो तुम भी। पहले तो बिना बात लड़ती हो फिर बोलती हो चाय पी के जाओ।

    पत्नी: तो क्या करूँ? तुम लड़ने का मौका कहाँ देते हो? लड़ने का मन करे तो क्या पड़ोस में लड़ने जाऊँ?

    नोट - पत्नियों के अधिकारों का हनन ना करें और उन्हें लङने का मौका अवश्य दें।
  • गलत नंबर!

    एक बार एक कामकाजी महिला की पदोन्नति के बाद उसका एक बड़े शहर में तबादला हो गया तो वह अपना कार्यभार संभालने उस महानगर में पहुँच गयी।

    वहां पहुँच कर उसने देखा कि उसे कंपनी ने रहने के लिए एक फ्लैट भी दे दिया है, यह देख उसने तुरंत अपने पत्नी को इसके बारे में सूचना देने के इरादे से अपने मोबाइल पे SMS लिखा, परन्तु गलती से उसे गलत नंबर पर भेज दिया।

    जिस आदमी को वह SMS मिला वह अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार करके लौट रहा था, SMS पढ़ते ही वह आदमी बेहोश हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा क्योंकि SMS में लिखा था:

    प्रियतम,
    मैं सही-सलामत पहुंच गई हूं और यहां रहने के लिए अच्छी जगह भी मिल गई है, आप बिलकुल चिंता मत करना बस 1-2 दिन में ही आपको भी बुला लूंगी।

    आपकी प्यारी पत्नी!
  • पति-पत्नी!

    कार से किसी शादी मे जा रहे थे। रास्ते में कार पंक्चर हो गयी। बेचारा पति उतरा और स्टेपनी बदलने के काम पर लग गया। पत्नी भी उतरी और भुनुर भुनुर करने लगी।

    सुनिये उसका भुनुर भुनुर:

    देख कर तो चला ही नही सकते हो

    नुकीले पत्थर पर ही गाड़ी चढा दी

    पंक्चर तो हुआ ही डेंट भी लगा दिया

    पता नही कैसे ड्राईवर हो

    बीवी को बिठाकर भी रफ चलाते हो

    जरूर नजर इधर उधर होगी

    पता नही किसने तुमको लाईसेंस दिया

    एक काम ठीक से कर नही सकते

    पता नहीं स्टेपनी ठीक है भी कि नहीं

    अब शादी मे भी देर से पहुँचेंगे

    सोंचा था मेरी नयी साड़ी से सब जलेगी

    अब तो वरमाला के बाद ही पहुँचेंगे

    तुमसे तो मेरी कोई खुशी देखी नही जाती

    अरे बड़े अजीब आदमी हो

    कुछ कहोगे भी कि गूँगे ही बने रहोगे

    मेरी तो किस्मत ही फूटी थी कि तुम मिले

    बोलते बोलते बेचारी कांपने भी लगी

    इतने में एक साइकिल सवार आकर रूका और पूछा, "भाई साहब कुछ मदद करूँ?"

    पति: भाई तू इस मैडम से थोड़ी देर बात कर ले तो मैं ये स्टेपनी लगा लूँ।