• प्यार भी मुश्किल है!

    'पति के साथ प्यार से कैसे रहें' इस विषय पर औरतों का एक सेमीनार हो रहा था।

    उनसे एक सवाल किया गया कि आप में से अपने पति से कौन प्यार करती हैं?

    सभी औरतों ने अपने हाथ उठा दिए।

    अगला सवाल था, "आपने अपने पति को I LOVE YOU कब बोला था?"

    किसी ने आज सुबह, किसी ने पिछले कल, किसी ने कुछ दिन पहले बताया और कुछ को तो याद भी नहीं था।

    अब उनसे अपने-अपने मोबाइल से अपने पति को 'I LOVE YOU,SWEET HEART' मैसेज भेजने को कहा गया और आपस में एक दूसरे को उनके पति के जवाब को पढ़ने के लिए कहा गया। पतियों के जवाब में मैसेज कुछ ऐसे थे:

    1. मेरे बच्चों की प्यारी माँ, तू पागल हो गई है क्या?
    2. अब क्या हो गया ? कार तो नहीं ठोक दी?
    3. क्या मतलब?
    4. ??????
    5. क्या कर दिया है तुमने? इस बार नहीं छोडूंगा तुझे।
    6. क्या खरीदने जा रही हो, डार्लिंग? कितने पैसे चाहिए?
    7. सपना तो नहीं देख रहा हूँ मैं?
    8. अरे मैडम! यह मैसेज गलती से तो मुझे नहीं भेज दया?
    9. सुबह ही तुम कह रही थी कि कहीं जाना है, ज्यादा तो नहीं पी ली है तुमने ? और अंत में एक साहब का मैसेज तो यह भी था।
    10. कौन?
  • पत्नी तो पत्नी ही होती है!

    कार से किसी शादी मे जा रहे थे। रास्ते में कार पंक्चर हो गयी। बेचारा पति उतरा और स्टेपनी बदलने के काम पर लग गया। पत्नी भी उतरी और भुनुर भुनुर करने लगी।

    सुनिये उसका भुनुर भुनुर:

    देख कर तो चला ही नही सकते हो

    नुकीले पत्थर पर ही गाड़ी चढा दी

    पंक्चर तो हुआ ही डेंट भी लगा दिया

    पता नही कैसे ड्राईवर हो

    बीवी को बिठाकर भी रफ चलाते हो

    जरूर नजर इधर उधर होगी

    पता नही किसने तुमको लाईसेंस दिया

    एक काम ठीक से कर नही सकते

    पता नहीं स्टेपनी ठीक है भी कि नहीं

    अब शादी मे भी देर से पहुँचेंगे

    सोंचा था मेरी नयी साड़ी से सब जलेगी

    अब तो वरमाला के बाद ही पहुँचेंगे

    तुमसे तो मेरी कोई खुशी देखी नही जाती

    अरे बड़े अजीब आदमी हो

    कुछ कहोगे भी कि गूँगे ही बने रहोगे

    मेरी तो किस्मत ही फूटी थी कि तुम मिले

    बोलते बोलते बेचारी कांपने भी लगी

    इतने में एक साइकिल सवार आकर रूका और पूछा, "भाई साहब कुछ मदद करूँ?"

    पति: भाई तू इस मैडम से थोड़ी देर बात कर ले तो मैं ये स्टेपनी लगा लूँ।
  • थोड़ी सी नोंक-झोंक!

    थोड़ी सी नोंक-झोंक! निवेदन है सभी शादी-शुदा पतियों से कि ये सवांद अवश्य पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।

    पति: अजी सुनती हो?

    पत्नी: नहीं, मैं तो जनम से बहरी हूँ। बोलो?

    पति: मैंने ऐसा कब कहा?

    पत्नी: तो अब कह लो, पूरी कर लो एक साथ कोई भी हसरत अगर अधूरी रह गयी हो।

    पति: अरी भाग्यवान!

    पत्नी: सुनो एक बात... अब मुझे भाग्यवान तो कहना मत, फूट गए नसीब मेरे तुमसे शादी करके और कहते हो भाग्यवान हूँ।

    पति: एक कप चाय मिलेगी?

    पत्नी: एक कप क्यों? लोटा भर मिलेगी और सुनो किसको सुना रहे हो? मैं क्या चाय बना के नहीं देती?

    पति: अरे यार कभी तो सीधे मुँह बात...

    पत्नी: बस... आगे मत बोलना, नहीं आता मुझे सीधे मुँह बात करना। मेरा तो मुँह ही टेढ़ा है, यही कहना चाहते हो ना?

    पति: हे भगवान!

    पत्नी: हाँ... माँग लो भगवान जी से एक कप चाय। मैं चली नहाने, और सुनो मुझे शैम्पू भी करना है देर लगेगी। बच्चों को स्कूल से ले आना मेरे अकेले के नहीं हैं।

    पति: अरे ये सब क्या बोलती हो?

    पत्नी: क्यों झूठ बोल दिया क्या? मैं क्या दहेज़ में ले कर आयी थी इनको?

    पति: अरे मैं कहाँ कुछ बोल रहा हूँ?

    पत्नी: अरे मेरे भोले बाबा, तुम कहाँ बोलते हो? मैं तो चुप थी। बोलना किसने शुरू किया? बताओ?

    पति: अरे मैंने तो एक कप चाय मांगी थी।

    पत्नी: चाय मांगी थी या मुझे बहरी कहा था? क्या मतलब था तुम्हारा? "अजी सुनती हो?" का क्या मतलब था बताओगे?

    पति: अरे श्रीमती जी, कभी तो मीठे से बोल लिया करो।

    पत्नी: अच्छा? मीठा नहीं बोली मैं कभी तो ये दो-दो नमूने क्या पड़ोसी के हैं? देख लिया है बहुत मीठा बोल कर। बस अब और मीठा बोलने कि हिम्मत नहीं है मेरी।

    पति: भूल रही हो मैडम।

    पत्नी: क्या भूल रही हूँ?

    पति: अरे मुझे बात तो पूरी करने दो। मैं कह रहा था कि पति हूँ तुम्हारा।

    पत्नी: अच्छा... मुझे नहीं पता था। सूचना के लिए धन्यवाद।

    पति: अरे नहीं चाहिए मुझे तुम्हारी चाय। बक बक बंद करो।

    पत्नी: अरे वाह! तुम्हें तो बोलना भी आता है। बहुत अच्छे, चाय पी के जाओ। बाद में नहा लूँगी।

    पति: गज़ब हो तुम भी। पहले तो बिना बात लड़ती हो फिर बोलती हो चाय पी के जाओ।

    पत्नी: तो क्या करूँ? तुम लड़ने का मौका कहाँ देते हो? लड़ने का मन करे तो क्या पड़ोस में लड़ने जाऊँ?

    नोट - पत्नियों के अधिकारों का हनन ना करें और उन्हें लङने का मौका अवश्य दें।
  • पैगाम-ए-मोहब्बत!

    मेरी प्यारी बेगम,

    सवाल कुछ भी हो,

    जवाब तुम ही हो।

    रास्ता कोई भी हो,

    मंजिल तुम ही हो।

    दुःख कितना ही हो,

    ख़ुशी तुम ही हो।

    अरमान कितना ही हो,

    आरजू तुम ही हो।

    गुस्सा जितना भी हो,

    प्यार तुम ही हो।

    ख्वाब कोई भी हो,

    ताबीर तुम ही हो।

    "यानी ऐसा समझो कि सारे फसाद की जड़ तुम हो और सिर्फ तुम ही हो।"