• सास से प्यार!

    यह एक जग प्रसिद्ध सच है कि सभी बहुओं को अपनी सास से परेशानी रहती है।

    ऐसे ही एक दिन सभी बहुएं इकट्ठी हुई और उन्होंने फैसला किया कि, वे सब अपनी सास से माफ़ी मांगेगी और कहेंगी, उन्होंने जो भी किया उनसे वो गलती से हुआ।

    एक हफ्ते बाद सभी बहुओं ने पिकनिक जाने का कार्यक्रम बनाया, जिसमें पूरे परिवार के साथ अपनी अपनी सास को भी ले गयी।

    सारी सास एक ही बस में थी जो सबसे आगे चली थी रास्ते में उनकी बस का एक्सिडेंट हो गया।

    और सभी सास मर गयी, सारी बहुएं जोर-जोर से बिलख-बिलख कर रो रही थी।

    पर एक बहु को शायद कुछ ज्यादा ही दुःख हुआ वो जमीन पर हाथ पटक पटक कर रो रही थी। सभी उसे सांत्वना देकर कह रहे थे, कम से कम तुम्हारी सास बिना किसी चिंता के मरी है। तुम्हारा उससे कोई झगड़ा नहीं था पर वो अभी भी जोर-जोर से चिल्ला रही थी।

    जब वो बार-बार बोलने पर चुप नहीं हो रही थी तो एक औरत ने उसे पूछा, "तुम इतना क्यों चिल्ला रही हो, क्या तुम्हारी सास ज्यादा खास थी?"

    उस औरत ने अपने आप को थोड़ा संभाला और सिसकते हुए कहा, "नहीं, उनसे बस छूट गयी है।"
  • डॉक्टर से तो बढई भला!

    एक बार एक आदमी डॉक्टर के पास गया और बोला;

    आदमी: डॉक्टर साहब, मैं बहुत परेशान हूँ, जब भी मैं बिस्तर पर लेटता हूँ तो मुझे लगता है की बिस्तर के नीचे कोई है। जब मैं बिस्तर के नीचे देखने जाता हूँ तो लगता है ऊपर कोई है। नीचे, ऊपर, नीचे, ऊपर यही करता रहता हूँ, सो नहीं पता। मेरा अच्छा सा इलाज़ कीजिये नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा।

    डॉक्टर: तुम्हारा इलाज़ लगभग दो साल तक चलेगा, तुम्हे हफ्ते में तीन बार आना पड़ेगा, और अगर तुमने मेरे बताये अनुसार इलाज़ किया तो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे।

    आदमी: डॉक्टर साहब, पर आपकी फीस कितनी होगी?

    डॉक्टर: 100 रुपये एक बार आने के और 200 रुपये एक महीने की दवाई के।

    आदमी गरीब था, इसीलिए फिर आने का कह कर चला गया।

    6 महीने बाद वही आदमी डॉक्टर को सड़क पर घूमते हुए मिला तो डॉक्टर ने उस से पूछा," क्यों भाई, तुम अपना इलाज़ करवाने क्यों नहीं आये?"

    आदमी: "डॉक्टर साहब जिस इलाज के आप 300 रुपये मांग रहे थे, वह मेरे पडोसी ने सिर्फ 20 रूपए में कर दिया"।

    डॉक्टर ने हैरानी से पूछा: अच्छा वो कैसे?

    आदमी: "जी वो एक बढई है, और उसने मेरे पलंग के चारो पाँव सिर्फ 5 रुपये प्रति पाँव के हिसाब से काट दिए"।
  • मेहनत करे मुर्गी अण्डा खाए फ़क़ीर!

    एक बार एक किसान का घोडा बीमार हो गया। उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया बोला, "आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक नहीं तो हमें इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फ़ैल सकती है।"

    यह सब बातें पास में खड़ा एक बकरा भी सुन रहा था।

    अगले दिन डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी चला गया। उसके जाने के बाद बकरा घोड़े के पास गया और बोला, "उठो दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे।"

    दूसरे दिन डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया।

    बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला, "दोस्त तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो नहीं तो तुम मारे जाओगे। मैं तुम्हारी मदद करता हूँ। चलो उठो"

    तीसरे दिन जब डॉक्टर आया तो किसान से बोला, "मुझे अफ़सोस है कि हमें इसे मारना पड़ेगा क्योंकि कोई भी सुधार नज़र नहीं आ रहा।"

    जब वो वहाँ से गए तो बकरा घोड़े के पास फिर आया और बोला, "देखो दोस्त, तुम्हारे लिए अब करो या मरो वाली स्थिति बन गयी है। अगर तुम आज भी नहीं उठे तो कल तुम मर जाओगे। इसलिए हिम्मत करो। हाँ, बहुत अच्छे। थोड़ा सा और, तुम कर सकते हो। शाबाश, अब भाग कर देखो, तेज़ और तेज़।"

    इतने में किसान वापस आया तो उसने देखा कि उसका घोडा भाग रहा है। वो ख़ुशी से झूम उठा और सब घर वालों को इकट्ठा कर के चिल्लाने लगा, "चमत्कार हो गया। मेरा घोडा ठीक हो गया। हमें जश्न मनाना चाहिए। आज बकरे का गोश्त खायेंगे।"

    शिक्षा: मैनेजमेंट को भी कभी पता नहीं चलता कि कौन सा कर्मचारी कितना योग्य है।
  • गज़ब का इंसाफ!

    एक शख़्स ने दो निकाह किये थे और वो अपनी दोनों बीवीयों से बहुत प्यार करता था। दोनों ही के साथ बड़ा इंसाफ़ का मामला भी रखता था।

    तक़दीर का फ़ैसला देखिए कि दोनों ही बीवियों का एक ही वक़्त में इंतक़ाल हो गया।

    शौहर ने इंसाफ़ के तक़ाज़े से ये चाहा कि दोनों को एक ही वक़्त और एक ही साथ ग़ुस्ल दिया जाए (नहलाया जाये)।

    इसलिए उसने ग़ुस्ल देने वालियाँ दो औरतें बुलवाईं ताकि एक ही वक़्त में दोनों को एक साथ ग़ुस्ल दिया जाए।

    फिर दफ़न के लिये घर से एक ही वक़्त में एक साथ निकालने का तय किया।

    इत्तेफ़ाक़ से उस घर में एक ही दरवाज़ा था। शौहर ने क्योंकि एक ही वक़्त में दोनों बीवियों का जनाज़ा निकालने का तय किया हुआ था इसलिए आनन-फानन में तुरन्त ही एक और नया दरवाज़ा बनवाने का फ़ैसला किया।

    दरवाज़ा बनाने वाला बुलाया गया, और दूसरा दरवाज़ा बनवा कर एक ही वक़्त में दोनों के जनाजो को घर से निकाला।

    दफ़न कर के जब घर सब वापस आये तो सबने उसके बीवीयों के साथ रहन-सहन की तारीफ की और उसने अपने इंसाफ़ पर अल्लाह का शुक्र अदा किया कि उसने मुझे सही इंसाफ़ करने की तौफ़ीक़ दी।

    रात में एक बीवी को शौहर ने अचानक ख़्वाब में देखा। वो बड़ी ही ग़मज़दा आवाज़ में कह रही थी, "मैं आप से नाराज़ हूँ। अल्लाह आप को माफ़ नहीं करेगा।"

    शौहर ने पूछा, "लेकिन क्यों? ख़ुदा की बंदी आखिर क्या हुआ?"

    इस पर उसकी बीवी ने जवाब दिया, "आपने अपनी दूसरी बीवी को नये दरवाज़े से निकाला और मुझे पुराने दरवाज़े से।"