• पुलिस और पत्नी में समानताऐं:

    1. ना इनकी दोस्ती अच्छी और ना ही दुश्मनी।

    2. इनसे बनाकर रखना मजबूरी है।

    3. इनका पता नहीं कब बिगङ जाऐं।

    4. अगर ये प्यार से बात करे तो अलर्ट हो जाऐं।

    5. दोंनों ही खतरनाक धमकी देते हैं।

    6. इनसे बहस में जीतना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

    7. ये पहला हिसाब याद रखते हैं।

    8. अपने राज कभी नहीं खोलते।

    9. इनको जबरदस्ती तारीफ चाहिए।

    10. इनसे पंगा लेना खतरनाक साबित हो सकता है।

    11. विरोध मौका देखकर करते हैं।

    12. सुन भले ही लें आपकी लेकिन करेंगे मन की ही।

    13. ये दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं।

    14. प्यार में लेकर भी वार करते हैं।

    15. दोंनों ही रौब से काम लेते हैं।

    16. अपना राज इन्हें बताना खतरनाक साबित हो सकता है।

    17. इनकी नजर जेब पर ही रहती है।
  • रिश्ते अलग बातें अलग!

    एक आदमी की बहन मरी और फ़िर भाई मरा लेकिन वो बिलकुल भी नहीं रोया।

    जब उसकी बीवी मरी तो वो फ़ूट-फ़ूट कर रोने लगा। लोगों को इस बात से बङी हैरत हुई।

    अजीब आदमी है, माँ, बाप, भाई, बहन किसी के मरने पर एक आँसू तक नहीं निकला। अब जब बीवी मरी है तो कैसे बिलख-बिलख कर रो रहा है।

    तब उस आदमी ने कहा, "मुझे गलत मत समझो भाईयो, जब बाप मरा तो बाप की उम्र वाले लोगों ने मुझे यह कहा कि चिंता न करो, हम तुम्हारे बाप के समान हैं।

    माँ के मरने पर भी उस उम्र की औरतों ने ऐसा ही कहा। भाई के मरने पर और बहन के मरने पर भी ऐसा ही सबने बोला पर अब बीवी के मरने पर किसी एक भी औरत ने यह नहीं कहा 'चिंता न करो, मैं तुम्हारी बीवी के समान हूँ'।
  • चस्का!

    सत्तर वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद एक बुड्ढा प्रत्येक एक वर्ष बीतने पर अपनी ही पत्नी से शादी करता था...

    बिना किसी रोक-टोक के सारा कार्यक्रम सम्पन्न हो जाता और फिर अगले वर्ष सब कुछ वैसे ही दोहराया जाता...

    पूरे गाँव में ये बात कौतुहल का विषय बन गयी...

    आखिर में जब एक व्यक्ति से नहीं रहा गया तो उसने पूछ ही लिया:

    बुढ़ऊ जै का बात भई
    हर साल ब्याह कत्त हो....
    हर साल फेरे लेवत हो......

    बुड्ढा- "बस एक ही शब्द सुनवे की खातिर..."

    "कौन सो शब्द.."

    बुड्ढा - जब पंडित कहत है:-
    "लड़के को बुलाओ"
    बस कसम से मजा आ जात है।
  • चोरी!

    कंडक्टर को किराया देने के लिए मै जैसे ही जेब में हाथ डालने लगा , साथ बैठे अजनबी ने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा "नहीं भाई साहब आपका किराया मैं देता हूँ" मैने कहा कि मै अपना किराया खुद ही देता हूँ!

    लेकिन अजनबी मेहरबान हो रहा था और उसने मेरा किराया दे दिया। अगले स्टाप पर अजनबी बस से उतरा और मै अपनी जेब से कुछ निकालने लगा तो सर थाम कर बैठ गया क्योंकि उस अजनबी ने मेरी जेब काट ली थी।

    दूसरे दिन मैने उस अजनबी को बाजार में जा पकड़ा! वह चोर मुझे गले लगाकर रोने लगा "साहब जी मुझे माफ कर दीजिए आपसे चोरी करने के बाद मेरी बेटी मर गई! मैने दिल बड़ा करते हुए चोर को माफ कर दिया। चोर चला गया लेकिन उसने गले मिलते समय फिर से मेरी जेब साफ कर गया था।

    कुछ दिनों बाद मै अपनी मोटरसाइकिल से कहीं जा रहा था कि रास्ते में फिर उसी चोर ने रोक लिया। चोर ने रोते हुए माफी मांगी और चोरी किये हुए सारे पैसे भी लौटा दिये। फिर वो चोर मुझे पास के रेस्टोरेंट में ले गया , मुझे चाय नाश्ता कराने के बाद चला गया और जब मै अपनी मोटरसाइकिल के पास आया तो देखा चोर इस बार मेरी मोटरसाइकिल पे ही हाथ साफ कर गया था!

    बिल्कुल यही हाल अपने देश की सरकारों का है। भोली भाली जनता इन पर विश्वास करती हैं और ये हर बार जनता को नये नये तरीकों से लूटते हैं!