• एक मच्छर का एक्सक्लूजिव इंटरव्यू!

    रिपोर्टर: आपका प्रकोप दिनो-दिन बढ़ता ही जा रहा है, क्यों?
    मच्छर: सही शब्द इस्तेमाल कीजिये, इसे प्रकोप नहीं फलना-फूलना कहते हैं. पर तुम इंसान लोग तो दूसरों को फलते-फूलते देख ही नहीं सकते न, आदत से मजबूर जो ठहरे।

    रिपोर्टर: हमें आपके फलने-फूलने से कोई ऐतराज़ नहीं है पर आपके काटने से लोग जान गँवा रहे हैं, जनता में भय व्याप्त हो गया है।
    मच्छर: हम सिर्फ अपना काम कर रहे हैं. श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि 'कर्म ही पूजा है'। अब विधाता ने तो हमें काटने के लिए ही बनाया है, हल में जोतने के लिए नहीं ! जहाँ तक लोगों के जान गँवाने का प्रश्न है तो आपको मालूम होना चाहिए कि `हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश विधि हाथ'।

    रिपोर्टर: लोगों की जान पर बनी हुई है और आप हमें दार्शनिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं।
    मच्छर: आप तस्वीर का सिर्फ एक पहलू देख रहे हैं। हमारी वजह से कई लोगों को लाभ भी होता है, ये शायद आपको पता नहीं ! जाइये इन दिनों किसी डॉक्टर, केमिस्ट या पैथोलॉजी लैब वाले के पास, उसे आपसे बात करने की फ़ुर्सत नहीं होगी। अरे भैया, उनके बीवी-बच्चे हमारा 'सीजन' आने की राह देखते हैं, ताकि उनकी साल भर से पेंडिंग पड़ी माँगे पूरी हो सकें. क्या समझे आप? हम देश की इकॉनोमी बढाने में महत्त्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं, ये मत भूलिये।

    रिपोर्टर: परन्तु मर तो गरीब रहा है न, जो इलाज करवाने में सक्षम ही नहीं है।
    मच्छर: हाँ तो गरीब जी कर भी क्या करेगा? जिस गरीब को आप अपना घर तो छोडो, कॉलोनी तक में घुसने नहीं देना चाहते, उसके साथ किसी तरह का संपर्क नहीं रखना चाहते, उसके मरने पर तकलीफ होने का ढोंग करना बंद कीजिये आप लोग।

    रिपोर्टर: आपने दिल्ली में कुछ ज्यादा ही कहर बरपा रखा है।
    मच्छर: देखिये हम नेता नहीं हैं जो भेदभाव करें... हम सभी जगह अपना काम पूरी मेहनत और लगन से करते हैं। दिल्ली में हमारी अच्छी परफॉरमेंस की वजह सिर्फ इतनी है कि यहाँ हमारे काम करने के लिए अनुकूल माहौल है। केंद्र और राज्य सरकार की आपसी जंग का भी हमें भरपूर फायदा मिला है।

    रिपोर्टर: खैर, अब आखिर में आप ये बताइये कि आपके इस प्रकोप से बचने का उपाय क्या है?
    मच्छर: उपाय तो है अगर कोई कर सके तो... लगातार सात शनिवार तक काले-सफ़ेद धब्बों वाले कुत्ते की पूँछ का बाल लेकर बबूल के पेड़ की जड़ में बकरी के दूध के साथ चढाने से हम प्रसन्न हो जायेंगे और उस व्यक्ति को नहीं काटेंगे।

    रिपोर्टर: आप उपाय बता रहे हैं या अंधविश्वास फैला रहे हैं?
    मच्छर: दरअसल आम हिंदुस्तानी लोग ऐसे ही उपायों के साथ आराम महसूस करते हैं। उन्हें विज्ञान से ज्यादा कृपा में यकीन होता है। वैसे सही उपाय तो साफ़-सफाई रखना है, जो रोज ही टीवी चैनलों और अखबारों के जरिये बताया जाता है, पर उसे मानता कौन है? अगर उसे मान लिया होता तो आज आपको मेरा इंटरव्यू लेने नहीं आना पड़ता।
  • नाम में क्या रखा है!

    एक पाकिस्तानी लड़के ने अमेरिकन स्कूल में एडमिशन लिया।

    टीचर: तुम्हारा नाम क्या है?

    लड़का: अहमद।

    टीचर: अब तुम अमेरिका में हो, इसलिए आज से तुम्हारा नाम जॉन है।

    लड़का घर पहुंचा।

    मां: पहला दिन कैसा रहा अहमद?

    लड़का: मैं अब अमेरिकन हूं और आगे से मुझे जॉन कहकर पुकारना।

    मां और पापा ने यह सुनते ही उसकी जमकर धुनाई कर दी।

    शरीर पर चोट के निशान लिए अगले दिन वह स्कूल पहुंचा।

    टीचर: क्या हुआ जॉन?

    लड़का: मेरे अमेरिकन बनने के 4 घंटे बाद ही मुझ पर 2 पाकिस्तानियों ने हमला कर दिया।
  • मुहावरों के आधुनिक अर्थ!

    1. खुद की जान खतरे में डालना = शादी करना

    2. आ बैल मुझे मार = पत्नी से पंगा लेना

    3. दीवार से सिर फोड़ना = पत्नी को कुछ समझाना

    4. चार दिन की चाँदनी वही अँधेरी रात = पत्नी का मायके से वापस आना

    5. आत्महत्या के लिए प्रेरित करना = शादी की राय देना

    6. दुश्मनी निभाना = दोस्तों की शादी करवाना

    7. खुद का स्वार्थ देखना = शादी ना करना

    8. पाप की सजा मिलना = शादी हो जाना

    9. लव मैरिज करना = खुद से युद्ध करने के लिए योद्धा ढूंढना

    10. जिंदगी के मज़े लेना = कुँवारा रहना

    11. ओखली में सिर देना = शादी के लिए हाँ करना

    12. दो पाटों में पिसना = दूसरी शादी करना

    13. खुद को लुटते हुऐ देखना = पत्नी की मांग पूरी करना

    14. शादी के फ़ोटो देखना = गलती पर पश्चाताप करना

    15. शादी के लिए हाँ करना = स्वेच्छा से जेल जाना

    16. शादी = बिना अपराध की सजा

    17. बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना = दूसरों के दुःख से खुश होना

    18. साली आधी घर वाली = वो स्कीम जो दूल्हे को बताई जाती है लेकिन दी नहीं जाती।
  • रिश्ते अलग बातें अलग!

    एक आदमी की बहन मरी और फ़िर भाई मरा लेकिन वो बिलकुल भी नहीं रोया।

    जब उसकी बीवी मरी तो वो फ़ूट-फ़ूट कर रोने लगा। लोगों को इस बात से बङी हैरत हुई।

    अजीब आदमी है, माँ, बाप, भाई, बहन किसी के मरने पर एक आँसू तक नहीं निकला। अब जब बीवी मरी है तो कैसे बिलख-बिलख कर रो रहा है।

    तब उस आदमी ने कहा, "मुझे गलत मत समझो भाईयो, जब बाप मरा तो बाप की उम्र वाले लोगों ने मुझे यह कहा कि चिंता न करो, हम तुम्हारे बाप के समान हैं।

    माँ के मरने पर भी उस उम्र की औरतों ने ऐसा ही कहा। भाई के मरने पर और बहन के मरने पर भी ऐसा ही सबने बोला पर अब बीवी के मरने पर किसी एक भी औरत ने यह नहीं कहा 'चिंता न करो, मैं तुम्हारी बीवी के समान हूँ'।