• निजी सचिव का गुस्सा!

    एक बार एक सुंदर सी निजी सचिव गुस्से में अपने प्रबंधक के कमरे से बाहर निकली तो उसकी एक सहेली ने उस से पूछा, "अरे क्या हुआ तू गुस्से में क्यों है?"

    सचिव: जब मैं अन्दर गयी तो बॉस ने मुझे बड़े प्यार से कुर्सी पर बैठने के लिए कहा।

    सहेली: फिर?

    सचिव: फिर उन्होंने बड़े प्यार से मुझ से पूछा की क्या मैं आज शाम को फ्री हूँ।

    सहेली:फिर ?

    सचिव: मैंने खुशी के मारे हां कर दी...और...

    सहेली : और?

    सचिव: और क्या....उस कम्बख्त ने मुझे 500 पेज टाइप करने को दे दिए।
  • बनिया और कटोरा!

    एक बनिए की बाजार में छोटी सी मगर बहुत पुरानी कपड़े सीने की दुकान थी। उनकी इकलौती सिलाई मशीन के बगल में एक बिल्ली बैठी एक पुराने गंदे कटोरे में दूध पी रही थी। एक बहुत बड़ा कला पारखी बनिए की दुकान के सामने से गुजरा। कला पारखी होने के कारण जान गया कि कटोरा एक एंटीक आइटम है और कला के बाजार में बढ़िया कीमत में बिकेगा। लेकिन वह ये नहीं चाहता था कि बनिए को इस बात का पता लगे कि उनके पास मौजूद वह गंदा सा पुराना कटोरा इतना कीमती है।

    उसने दिमाग लगाया और बनिए से बोला, 'लाला जी, नमस्ते, आप की बिल्ली बहुत प्यारी है, मुझे पसंद आ गई है। क्या आप बिल्ली मुझे देंगे? चाहे तो कीमत ले लीजिए।'

    बनिए ने पहले तो इनकार किया मगर जब कलापारखी कीमत बढ़ाते-बढ़ाते दस हजार रुपयों तक पहुंच गया तो लाला जी बिल्ली बेचने को राजी हो गए और दाम चुकाकर कला पारखी बिल्ली लेकर जाने लगा।

    अचानक वह रुका और पलटकर बनिए से बोला--- "लाला जी बिल्ली तो आपने बेच दी। अब इस पुराने कटोरे का आप क्या करोगे? इसे भी मुझे ही दे दीजिए। बिल्ली को दूध पिलाने के काम आएगा। चाहे तो इसके भी 100-50 रुपए ले लीजिए।'

    कहानी में ट्विस्ट

    बनिए ने जवाब दिया, "नहीं साहब, कटोरा तो मैं किसी कीमत पर नहीं बेचूंगा, क्योंकि इसी कटोरे की वजह से आज तक मैं 50 बिल्लियां बेच चुका हूं।'

    ..बनिया आखिर बनिया होता है...इनको कोई बेवकूफ नहीँ बना सकता...
  • गुटर-गुं!

    एक बार एक आदमी अपनी प्रेमिका के साथ पार्क में बाहों में बाहें डाल कर बैठा हुआ था और कुछ बड़ी ही रूमानी बातें कर रहा था कि तभी अचानक वहां एक हवलदार आया और बोला, "आपको शर्म नहीं आती आप एक समझदार व्यक्ति होकर खुलेआम पार्क में ऐसी हरकत कर रहे हैं"।

    आदमी: देखिये हवालदार साहब आप गलत समझ रहे हैं, जैसा आप सोच रहे हैं वैसा कुछ भी नहीं है।

    हवलदार: तो कैसा है?

    आदमी: जी हम दोनों शादीशुदा हैं।

    हवालदार: अगर तुम शादीशुदा हो तो फिर अपनी ये प्यार भरी गुटरगूं अपने घर पर क्यों नहीं करते।

    आदमी: हवालदार साहब कर तो लें पर वहां मेरी पत्नी और और इसके पति को शायद अच्छा नहीं लगेगा।
  • औरत के कान!

    एक आदमी ने दुर्घटना में दोनों कान खो दिए, कोई भी प्लास्टिक सर्जन उसका समाधान नहीं कर पाया, उसने किसी से सुना कि स्वीडन में कोई सर्जन है जो इसे ठीक कर सकता है और वो उसके पास गया!

    नए सर्जन ने उस कि जांच की, थोड़ी देर सोचा और फिर कहा, मैं तुम्हें ठीक कर दूंगा!

    ओप्रशन के बाद पट्टियां खोली गयी, टांके भी खोल दिए गए और वो वापिस अपने होटल चला गया!

    अगली सुबह उसने बहुत गुस्से में सर्जन को फ़ोन किया और जोर से चिल्लाया कमीने तुमने मुझ में औरत का कान लगाया है!

    सर्जन ने कहा, तो क्या हुआ कान तो कान है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, औरत का हो या मर्द का!

    ऐसा नहीं है, आप गलत बोल रहे हैं, मैं सुन तो सब कुछ सकता हूँ, पर समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है!