• व्हाट्सएप्प के नए नियम!

    सरकार द्वारा नया नियम लागू करने से पहले एडमिन ने किये अपने नए नियम लागू।

    सभी ग्रुप मेंबर्स को सूचित किया जा रहा है कि 1 अक्टूबर 2015 से अपने इस ग्रुप के नियमों मे कुछ बदलाव किया जा रहा है। ग्रुप के नए नियम:

    1. मैसेज दोबारा करने पर 50 ₹ जुर्माना

    2. तीन-चार दिनो तक कोई मैसेज नही भेजने पर 150 ₹ दंड

    3. बिना इजाजत के ग्रुप छोडने पर 100 ₹ दंड

    4. इज़ाज़त ले कर ग्रुप छोडने पर कोई चार्ज नही होगा पर इज़ाज़त देने के एडमिन 200 ₹ घूस लेंगे

    5. बीस से ज्यादा मैसेज भेजने पर 15 ₹ प्रति मैसेज देना होगा

    6. ज्यादा चैटिंग करने वालो को एडमिन का 100 ₹ का रिचार्ज करवाना पडेगा

    7. एक साथ वीडियो की बाढ लाने वाले को हर ग्रुप मेंबर का 50 ₹ का नेट पैक रिचार्ज करवाना पडेगा

    8. एडमिन पर किसी प्रकार का कोई नियम लागू नही होगा

    9. हफ्ते के सबसे बढ़िया मैसेज को एडमिन की तरफ से 1kg मूंगफली के छिलके मिलेंगे

    10. और इस मैसेज को दूसरे ग्रुप में भेजने पर उचित इनाम भी दिया जायेगा

    धन्यवाद!
  • दिल पे मत लो यार!

    खूब लंबा-तगड़ा एक पहलवान बस में चढ़ा।

    कंडक्टर: भाई साहब, टिकट?

    पहलवान: हम टिकट नहीं लेते।

    कंडक्टर डर के मारे कुछ नहीं कर सका लेकिन कंडक्टर ने इस बात को दिल पर ले लिया। कंडक्टर जिम जाकर खूब मेहनत करने लगा। पहलवान रोज बस में चढ़ता।

    कंडक्टर रोज पूछता: भाई साहब, टिकट?

    पहलवान रोज जवाब देता: हम टिकट नहीं लेते।

    कंडक्टर ने बात को दिल पर ले ली... रातोँ की नीँद उड़ गई, ख़ून ख़ौल उठा

    5 महीने में कंडक्टर ज़िम में कसरत करके पहलवान की तरह तगड़ा हो गया।

    पहलवान फिर बस में चढ़ा।

    कंडक्टर: भाई, टिकट ले ले।

    पहलवान: हम टिकट नहीं लेते।

    कंडक्टर छाती चौड़ी करके बोला: क्यों नहीं लेता बे?

    पहलवान: पास बनवा रखा है, इसीलिए नहीं लेता।

    कुछ बातें दिल पे नही लेनी चाहिए!!
  • जीवन के कुछ अनमोल वचन!

    मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर माँगना क्योंकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का।

    मशवरा तो खूब देते हो "खुश रहा करो" कभी कभी वजह भी दे दिया करो।

    कल एक इंसान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों की दुआयें दे गया, पता ही नहीं चला कि गरीब वो था या मैं।

    गठरी बाँध बैठा है अनाड़ी साथ जो ले जाना था वो कमाया ही नहीं।

    मैं उस किस्मत का सबसे पसंदीदा खिलौना हूँ, वो रोज़ जोड़ती है मुझे फिर से तोड़ने के लिए।

    जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है।

    बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी।

    खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं।

    अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है कि माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये।

    जिन्दगी तेरी भी अजब परिभाषा है, सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है।

    खुशीयाँ तकदीर में होनी चाहिये, तस्वीर में तो हर कोई मुस्कुराता है।

    ज़िंदगी भी वीडियो गेम सी हो गयी है, एक लैवल क्रॉस करो तो अगला लैवल और मुश्किल आ जाता है।

    इतनी चाहत तो लाखो रु. पाने की भी नही होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है।

    हमेशा छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो, क्योंकि इंसान पहाड़ो से नहीं पत्थरों से ठोकर खाता है।
  • बेरोज़गारी का हाल!

    नदी में डूबते हुए आदमी ने पुल पर चलते हुए आदमी को आवाज़ लगायी। आदमी: `बचाओ-बचाओ।`

    पुल पर चलते आदमी ने नीचे देखा और उस आदमी को बचाने के लिए पुल से नीचे रस्सी फैंकी और कहा, `रस्सी को पकड़ के ऊपर आ जाओ।`

    परन्तु नदी में डूबता हुआ आदमी रस्सी नहीं पकड़ पा रहा था तो वह डर के मारे चिल्ला कर बोला, `मैं मरना नहीं चाहता, ज़िन्दगी बड़ी कीमती है कल ही तो मेरी टार्जन कंपनी में बड़ी अच्छी नौकरी लगी है।`

    इतना सुनते ही पुल पर चलते आदमी ने अपनी रस्सी खींच ली और भागते-भागते टार्जन कंपनी के दफ्तर में गया वहां के मैनेजर से बोला,` जिस आदमी को आपने कल नौकरी दी थी वो अभी-अभी डूबकर मर गया है, और इस तरह आपकी कंपनी में एक जगह खाली हो गयी है, मैं बेरोजगार हूँ इसीलिए मुझे रख लीजिये।`

    मैनेजर: `दोस्त, तुमने देर कर दी, अब से कुछ देर पहले हमने उस आदमी को रखा है, जो उसे धक्का दे कर तुमसे पहले यहाँ आया है।`