• पप्पू की वकालत की क्लास!

    प्रोफेसर (वकालत की क्लास में): अगर तुम्हें किसी को संतरा देना हो तो क्या बोलोगे?

    पप्पू: यह संतरा लो।

    प्रोफेसर: नहीं, एक वकील की तरह बोलो।

    पप्पू: मैं एतद् द्वारा अपनी पूरी रुचि और बिना किसी के दबाव में इस फल को, जो संतरा कहलाता है, उसके छिलके, रस, गूदे और बीज समेत धारक को देता हूं और साथ ही इस बात का सम्पूर्ण अधिकार भी कि इसे लेने वाला इसे काटने, छीलने, फ्रिज में रखने या खाने के लिए पूरी तरह अधिकार रखेगा और साथ ही यह भी अधिकार रखेगा कि इसे वह दूसरे को छिलके, रस, गूदे और बीज के बिना या उसके साथ दे सकता है और इसके बाद मेरा किसी भी प्रकार से इस संतरे से कोई संबंध नहीं रह जाएगा।
  • परीक्षा के दौरान!

    अध्यापिका पप्पू से: तुम इतने परेशान क्यों हो?

    पप्पू ने कोई जवाब नहीं दिया।

    अध्यापिका: क्या हुआ, क्या तुम अपना पेन भूल आये हो?

    पप्पू फिर चुप।

    अध्यापिका ने फिर से सवाल किया: रोल नंबर भूल गए हो?

    पप्पू इस बार भी चुप।

    अध्यापिका फिर से: हुआ क्या है, कुछ तो बताओ क्या भूल गए?

    पप्पू गुस्से से: ओये! चुप कर मेरी माँ, यहाँ मैं पर्ची गलत ले आया हूँ और तुझे पेन-पेंसिल और रोल नंबर की पड़ी हुई है।
  • फिर पांच!

    पप्पू: दादी मुझे नींद नहीं आ रही तो चलो हम बातें करते हैं।

    दादी: ठीक है।

    पप्पू: दादी क्या हम हमेशा 5 ही रहेंगे आप, माँ, पापा बहन और मैं?

    दादी: नहीं बेटा आपकी शादी हो जायेगी तो हम 6 हो जायेंगे।

    पप्पू: फिर बहन की शादी हो जायेगी और वो चली जायेगी तो हम फिर पांच हो जायेंगे।

    दादी: फिर आपका बेटा हो जायेगा तो हम फिर से 6 हो जायेंगे।

    पप्पू: दादी फिर आप मर जाओगी तो हम फिर से 5 हो जायेंगे।

    दादी: सो जा कम्बखत, कुत्ते मेरा दिमाग मत खा।
  • फर्क तो है!

    एक बार एक शिक्षक कक्षा में बच्चों को पड़ा रहा था।

    तभी अचानक उसके दिमाग में एक सवाल आया तो उसने पप्पू से पूछा," बेटा पप्पू एक बात बताओ कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर के कामों में क्या फर्क होता है?"

    पप्पू: मास्टर जी, अगर बस का कंडक्टर सो जाए तो किसी का टिकट नहीं कटेगा और अगर ड्राइवर सो जाए तो सबका टिकट कट जायेगा।