• पप्पू का शिक्षक-प्रेम!

    एक बार एक शिक्षक ने क्लास में बच्चों से एक सवाल पूछा।

    शिक्षक: बच्चों अगर तुम देखो की तुम्हारे स्कूल के सामने एक बदमाश बम रख कर जा रहा है तो तुम क्या करोगे?

    शिक्षक का सवाल सुन कर बच्चे एक दूसरे का मुंह ताकने लगे पर जवाब किसी को नहीं सुझा, तो आखिरी बेंच पर शिक्षक ने देखा की पप्पू बैठा हुआ मुस्कुरा रहा है। पप्पू को मुस्कुराता हुआ देख कर शिक्षक ने उस से पूछा, "बेटा पप्पू क्या तुम जवाब जानते हो"?

    पप्पू: जी मास्टरजी जवाब तो मेरे पास है पर मैं बताउंगा नहीं क्योंकि उसके बाद आप मुझे मारोगे।

    शिक्षक: नहीं बेटा नहीं मारूंगा तुम जवाब बताओ।

    पप्पू: मास्टरजी पहले तो हम कुछ देर इंतज़ार करेंगे कि पुलिस आकर उस बम को निष्क्रिया कर दे और अगर पुलिस नहीं आयी तो हम चुपचाप वह बम लाकर स्टाफ रूम में रख देंगे।
  • पप्पू की प्रेमकथा!

    पप्पू अपने दोस्त बंटी से अपनी नयी बनी गर्लफ्रेंड की तारीफ़ कर रहा था।

    पप्पू: कसम से इस बार जो गर्लफ्रेंड बनायी है बहुत मस्त है, पहले वाली तीनो से ज्यादा मस्त।

    बंटी: अच्छा वो कैसे?

    पप्पू: देख मेरी पहली वाली गर्लफ्रेंड दिल्ली से थी एक बार उसको जब मैंने टेडी बियर गिफ्ट किया तो वो बोली, " ओ माइ गोड वाऊ सो क्यूट।"

    बंटी: दूसरी वाली?

    पप्पू: वो लुधियाना से थी, जब उसको मैंने टेडीबियर गिफ्ट किया तो वो बोली, " ओ जी रब दी सौ किन्ना सोना टेडी है।

    बंटी: और तीसरी वाली?

    पप्पू: वो लखनऊ से थी जब उसको टेडी दिया तो वो बोली, " या अल्लाह! कितना खूबसूरत तोहफा है।"

    बंटी: और जो अब है?

    पप्पू: वो हरियाणा से है जब मैंने उसको टेडी दिया तो बोलती, "रे बावड़ी पूँछ ! यो के दे दिया भालू शा।
  • पप्पू की संस्कृत

    संस्कृत की क्लास मे गुरूजी ने पूछा, "पप्पू, इस श्लोक का अर्थ बताओ। 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"

    पप्पू: राधिका शायद रस्ते में फल बेचने का काम कर रही है।

    गुरू जी: मूर्ख, ये अर्थ नही होता है। चल इसका अर्थ बता, 'बहुनि मे व्यतीतानि, जन्मानि तव चार्जुन'।

    पप्पू: मेरी बहू के कई बच्चे पैदा हो चुके हैं, सभी का जन्म चार जून को हुआ है।

    गुरू जी: अरे गधे, संस्कृत पढता है कि घास चरता है। अब इसका अर्थ बता, 'दक्षिणे लक्ष्मणोयस्य वामे तू जनकात्मजा'।

    पप्पू: दक्षिण में खडे होकर लक्ष्मण बोला जनक आज कल तो तू बहुत मजे में है।

    गुरू जी :अरे पागल, तुझे 1 भी श्लोक का अर्थ नही मालूम है क्या?

    पप्पू: मालूम है ना।

    गुरु जी: तो आखिरी बार पूछता हूँ इस श्लोक का सही सही अर्थ बताना, 'हे पार्थ त्वया चापि मम चापि!' क्या अर्थ है जल्दी से बता?

    पप्पू: महाभारत के युद्ध मे श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन से कह रहे हैं कि...

    गुरू जी उत्साहित होकर बीच में ही कहते हैं, "हाँ, शाबाश, बता क्या कहा श्रीकृष्ण ने अर्जुन से?

    पप्पू: भगवान बोले, 'अर्जुन तू भी चाय पी ले, मैं भी चाय पी लेता हूँ। फिर युद्ध करेंगे'।

    गुरू जी बेहोश!
  • अच्छा शिक्षक!

    एक बार गणित के शिक्षक ने पप्पू को बुलाया और अपनी कापी चेक कराने के लिए कहा।

    पप्पू: मास्टरजी मैंने तो होमवर्क किया ही नहीं।

    मास्टर: तुम्हारा तो पढने में मन ही नहीं लगता, अब बताओ की होमवर्क ना करने का तुम्हारे पास क्या बहाना है?

    पप्पू: जी मास्टर जी वो कल आपने जो गुणा-भाग समझाया था ना वो मुझे समझ नहीं आया।

    मास्टर: नालायक तुम्हे वह सामान्य सा गुणा-भाग समझ नहीं आया, मैं जब तुम्हारी उम्र का था तो 15-15 अंकों वाला गुणा-भाग चुटकियों में कर देता था।

    पप्पू: कर देते होंगे मास्टर जी, क्योंकि आपको पक्का कोई अच्छा टीचर पढाता होगे।