• असरदार इलाज़!

    एक दिन पठान थका हारा डॉक्टर के पास आया और डॉक्टर से बोला, "डॉक्टर साहब मेरे पड़ोस में बहुत सारे कुत्ते है जो रात दिन भौंकते रहते हैं जिस कारण मैं एक घड़ी के लिए भी नहीं सो पाता।"

    डॉक्टर: इसमें कोई चिंता की बात नहीं है मैं तुम्हें कुछ नींद की गोलियां दे देता हूँ वे इतनी असरदार है कि तुम्हें पता ही नहीं चलेगा कि तुम्हारे पड़ोस में कोई कुत्ता है भी या नहीं। ये दवाइयाँ तुम ले जाओ और अपनी परेशानी दूर करो।

    कुछ हफ्ते बाद पठान वापस डॉक्टर के पास आया और पहले से ज्यादा परेशान लग रहा था और डॉक्टर से कहने लगा, "डॉक्टर साहब आपकी योजना ठीक नहीं थी अब तो मैं पहले से ज्यादा थक गया हूँ।"

    डॉक्टर: मैं नहीं जानता कि ये कैसे हो गया पर जो दवाईयां दी थी वे नींद आने की सबसे बढ़िया गोलियां थी। चलो फिर भी आज मैं तुम्हें उससे भी ज्यादा असरदार गोलियां देता हूँ।

    पठान: पता नहीं ये सचमुच असर करेंगी या नहीं क्योंकि मैं सारी रात कुतों को पकड़ने में लगा रहता हूँ और मुश्किल से अगर एक-आध को पकड़ भी लूँ तो उसके मुँह में गोली डालना बहुत मुश्किल हो जाता है।
  • अच्छा पडोसी!

    पठान अपनी बेगम को हॉस्पिटल में दाखिल करवाने गया तो वहां उसे उसका सिंधी दोस्त मिल गया।

    सिंधी: अरे तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

    पठान: वो मैं तुम्हारी भाभी को यहाँ दाखिल करवाने लाया हूँ।

    सिंधी: क्यों क्या हुआ भाभी को?

    पठान: ओए क्या बताऊँ यार, बाथरूम में नहा रही थी और अचानक चक्कर खा कर गिर गयी। सिर ज़मीन से जा टकराया, खून ही खून बस यार।

    सिंधी: ओह यार यह तो बहुत बुरा हुआ। अब कैसी हैं?

    पठान: अब तो ठीक है। डॉक्टर ने कहा कि अगर और थोडी देर हो जाती तो कोमा में जा सकती थी।

    सिंधी: फिर भाभी ने आवाज लगाई कैसे?

    पठान: ओ पागल, आवाज कहाँ से लगाती, बेहोश पडी थी वो।

    सिंधी: फिर तुम्हें कैसे पता चला?

    पठान: अरे वो तो अच्छा हुआ सामने वाले मकान से खान उसको नहाते हुए देख रहा था। उसी ने आकर हमको बताया वरना ना जाने क्या हो जाता? खुदा भला करे उस खान का, वरना आज-कल तू बता यार अच्छा पडोसी कहाँ मिलता है?
  • देरी के लिए खेद!

    पठान अपने बेटे के लिए एक खिलौना रेलगाड़ी खरीद कर लाया।

    खिलौना देने के कुछ देर बाद जब वह बेटे के कमरे में गया तो देखा कि बच्चा रेलगाड़ी से खेल रहा है और कह रहा है कि जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए। रेलगाड़ी दो मिनट से ज्यादा नहीं रुकेगी।

    बच्चे के मुंह से यह भाषा सुनकर पठान को गुस्सा आ गया। उसने बच्चे को जोर से दो तमाचे लगाए और फिर कभी इस तरह से न बोलने की चेतावनी दी और बोला, "मैं दो घंटे के लिए बाजार जा रहा हूं। तब तक तुम सिर्फ पढ़ोगे, समझे।"

    दो घंटे बाद बाद जब पठान लौटकर आया तो बच्चे को पढ़ते हुए देखा। यह देखकर उसका दिल पसीज गया और उसने बच्चे को फिर रेलगाड़ी से खेलने की इजाजत दे दी।

    अबकी बार उसने बच्चे को कहते हुए सुना जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए। गाड़ी पहले ही एक उल्लू के पट्ठे की वजह से दो घंटे लेट हो चुकी है।
  • मैं कौन हूँ?

    पठान ट्रेन में एक सीट पर अकेला लेटा हुआ था।

    एक यात्री आया और बोला, "भाई साइड में हो जायें, मुझे भी बैठना है।"

    पठान: तुझे पता नहीं मैं कौन हूँ?

    यात्री डर के दूसरी जगह पर जाकर बैठ गया।

    फिर एक पहलवान आया और बोला, साइड में हो जा छोटू मुझे भी बैठना है।

    पठान ने उसे भी रोब दिखाते हुए बोला, "तुझे पता नहीं मैं कौन हूँ?"

    पहलवान ने पठान की गर्दन पकड़ के उठा लिया और बोला, "हाँ, बोल तू कौन है?"

    पठान: जी मैं 'बीमार' हूँ, 2 दिन से तेज़ बुखार है।