• कोई दिलचस्पी नहीं!

    पठान ने कस्टमर केयर मे फोन किया।

    लड़की ने फोन उठाया: सर आपका स्वागत है मैँ आपकी क्या सेवा कर सकती हूँ?

    पठान (थोड़ा आराम से): मुझसे शादी करोगी?

    लड़की: सर आपका गलत नंबर लग गया है।

    पठान: ना सही लगा है प्लीज बताओ ना।

    लड़की: मुझे आप में कोई दिलचस्पी नहीं है।

    पठान: अरे सुनो तो अरेँज मैरिज पर स्विट्जरलैँड का और लव मैरिज पर सिँगापुर का हनीमून प्लान है।

    लड़की: मुझे आपसे शादी करने की कोई दिलचस्पी ही नही है, अपने प्लान अपने पास रखो।

    पठान: अजी सुनो तो, हिँदू फंक्शन वैडिँग पर डायमंड नैक्लेस दूँगा, मुस्लिम पर झुमके और क्रिस्चियन वैडिँग की तो सोने के कंगन।

    लड़की: चुप करो मुझे कोई दिलचस्पी ही नहीँ है आप में|

    पठान: अब समझ आया मेरा दर्द, रोज मुझे फोन और मैसेज कर कर के क्या क्या ऑफर देते हो जिनमे मेरी कोई दिलचस्पी नहीं होती!
  • पठान ही पठान को जानता है!

    पठान अपने स्कूटर पर जा रहा था, रास्ते में एक आदमी ने उससे लिफ्ट मांग ली। आगे लाल बत्ती थी पठान ने बड़ी तेजी से स्कूटर निकाल दिया पीछे बैठा आदमी डर गया।

    आदमी: पठान जी, लाल बत्ती थी।

    पठान: हम पठान हैं लाल बत्ती पर नहीं रुकते।

    फिर लाल बत्ती आई फिर निकाल दिया, आदमी और ज्यादा डर गया।

    आदमी: पठान जी मरवाओगे क्या लाल बत्ती थी।

    पठान: हम पठान हैं पठान लाल बत्ती पर नहीं रुकते।

    आगे हरी बत्ती आई तो पठान ने जोर से ब्रेक मारी और वही रुक गया।

    आदमी: पठान जी, अब तो चलो हरी बत्ती है।

    पठान: अबे मरवाएगा क्या, उधर से कोई पठान आ रहा हुआ तो?
  • मरवा दिया पठान ने!

    पठान अपनी बैलगाडी में अनाज के बोरे लादकर शहर ले जा रहा था। अभी गाँव से निकला ही था कि एक खड्डे में उसकी गाड़ी पलट गई। पठान गाड़ी को सीधी करने की कोशिश करने लगा। थोड़ी ही दूर पर एक पेड़ के नीचे बैठे एक राहगीर ने यह देखकर आवाज़ दी, "अरे भाई, परेशान मत हो, आ जाओ मेरे साथ पहले खाना खा लो फिर मैं तुम्हारी गाड़ी सीधी करवा दूंगा।"

    पठान: धन्यवाद, पर मैं अभी नहीं आ सकता। मेरा दोस्त बशीर नाराज़ हो जायेगा।

    राहगीर: अरे तुझसे अकेले नहीं उठेगी गाड़ी। तू आजा खाना खा ले फिर हम दोनों उठाएंगे।

    पठान: नहीं, बशीर बहुत गुस्सा हो जायेगा।

    राहगीर: अरे मान भी जाओ। आ जाओ तुम मेरे पास।

    पठान: ठीक है आप कहते हैं तो आ जाता हूँ।

    पठान ने जमकर खाना खाया फिर बोला, "अब मैं चलता हूँ गाड़ी के पास और आप भी चलिए। बशीर गुस्सा हो रहा होगा।"

    राहगीर ने मुस्कुराते हुए कहा, "चलो पर तुम इतना डर क्यों रहे हो? वैसे अभी कहाँ होगा बशीर?"

    पठान: गाड़ी के नीचे।
  • पठान की होशियारी!

    पठान: हकीम साहब, मेरे दोस्त की तबियत बहुत ख़राब है, उसे नींद नहीं आ रही है।
    कृपया नींद आने की कोई दवाई दे दीजिये।

    हकीम: यह लो पुड़िया और इस में से पच्चीस पैसे के सिक्के पर जितनी आये उतनी रख कर पानी से दे देना।

    अगले दिन पठान घबराया हुआ आया।

    पठान: हकीम साहब, आपने जो दवाई दी थी उसे खाकर मेरे दोस्त की मौत हो गयी।

    हकीम: वो कैसे? यह बताओ तुमने दवाई दी कैसे थी?

    पठान: आपने कहा था कि पच्चीस पैसे के सिक्के पर जितनी आये उतनी रखकर खिला देना।
    मेरे पास पच्चीस पैसे का सिक्का तो नहीं था। इसलिए मैंने पांच पैसे के सिक्के पर रखकर पांच बार दे दी!