• ना निगला जाये, ना थूका जाये!

    एक बै एक जाट भाई अपनी एक नई रिश्तेदारी में चल्या गया, साथ में उसका नाई भी था।

    नई रिश्तेदारी थी, खातिरदारी में फटाफट गरमा-गरम हलवा हाजिर किया गया।

    दोनूं सफर में थक रहे थे, भूख भी करड़ी लाग रही थी। हलवा आते ही दोनूंआं नै चम्मच भरी और मुंह में गरमा-गरम हलवा धर लिया।

    ईब इतना गरम हलवा ना निगल्या जा और ना बाहर थूक्या जा। बुरा हाल हो-ग्या, आंख्यां में आंसू आ-गे।

    नाई ने हिम्मत करी और बोल्या, "चौधरी, के होया?"

    जाट बोल्या, "भाई, जब घर तैं चाल्या था, तै थारी चौधरण बीमार सी थी, बस उस की याद आ गी।"

    नाई की आंख्यां में भी पाणी देख कै जाट बोल्या, "र, तेरै के होया?"

    नाई बोल्या, "चौधरी, मन्नै तै लाग्गै सै चौधरण मर ली।"
  • हरियाणवी ही हरियाणवी को जानता है!

    एक हरियाणवी अपने स्कूटर पर जा रहा था, रास्ते में एक आदमी ने उससे लिफ्ट मांग ली। आगे लाल बत्ती थी हरियाणवी ने बड़ी तेजी से स्कूटर निकाल दिया पीछे बैठा आदमी डर गया।

    आदमी: भाई साहब लाल बत्ती थी।

    हरियाणवी: हम लाल बत्ती पर नहीं रुकते।

    फिर लाल बत्ती आई फिर निकाल दिया, आदमी और ज्यादा डर गया।

    आदमी: भाई साहब मरवाओगे क्या लाल बत्ती थी।

    हरियाणवी: हम हरियाणवी हैं हरियाणवी लाल बत्ती पर नहीं रुकते।

    आगे हरी बत्ती आई तो हरियाणवी ने जोर से ब्रेक मारी और वही रुक गया।

    आदमी: भाई साहब, अब तो चलो हरी बत्ती है।

    हरियाणवी: अबे मरवाएगा क्या, उधर से कोई दूसरा हरियाणवी आ रहा हुआ तो?
  • जाट का खूंटा!

    एक जाट ने सार्वजनिक स्थान पर भैंस बांधने के लिए खूटा गाड़ रखा था। अन्य चौधरियो ने खूटा उखाड़ने का अनुरोध किया किन्तु जाट ने बात नहीं मानी। अंत में पंचायत बुलायी गयी।

    पंचों ने जाट से कहा, "तूने खूटा गलत जगह गाड़ रखा है।"

    जाट: मानता हूँ भाई।

    पंच: खूटा यहाँ नहीं गाड़ना चाहिए था।

    जाट: माना भाई।

    पंच: खूंटे से टकरा कर बच्चों को चोट लग सकती है।

    जाट: मानता हूं।

    पंच: भैंस सार्वजनिक स्थान पर गोबर करती है, गंदगी फैलती है।

    जाट: मानता हूं।

    पंच: भैंस बच्चों को सींग पूँछ भी मार देती है।

    जाट: मानता हूं, मैंने तुम्हारी सभी बातें मानी। अब पंच लोगो मेरी एक ही बात मान लो।

    पंच: बताओ अपनी बात।

    जाट: खूंटा तो यहीं गडेगा।
  • हरियाणा की ताई!

    एक बार एक मुक़ददमे में ताई गवाह बणा दी गई। ताई जा कर खड़ी होई, दोनो वकील भी ताई के गाँव के ही थे।

    पहला वकील बोला, "ताई तू मन्ने जाने है?"

    ताई: हाँ भाई तू रामफूल का है ना, तेरा बापु घणा सूधा आदमी था पर तू निक्कमा एक नम्बर का झूठा। एर झूठ, बोल बोल कर के तूं लोग ने ठगै है। झूठे गवाह बना कर के तू केस जीते से। तेरे से तो सारे लोग परेशान है, तेरी लुगाई भी परेशान हो कर के तन्ने छोड़ गै भाज गी।

    वकील बेचारा चुप हो कर के सोचा कि मेरी तो बेज्जती हो गई अब दूसरे की कराता हूँ।

    उस वकील ने थोडी देर में दूसरे वकील की तरफ इशारा कर के पूछा, "ताई, तू इसने जाणे से के?"

    ताई: हाँ यो फुलीयो काणे का छोरा से इसके बापु ने निरे रपिये खर्च करके इने पढाया पर इसने 'आंक' नही सीखा सारी उमर छोरिया क पीछै हांडे गया। इसका चक्कर तेरी बहू से भी था।

    कोर्ट में जनता हांसन लाग गी।

    जज: आर्डर-आर्डर।

    जज ने दोनो वकील बुलाये।

    जज: अगर तुम दोनो वकीलो मे से किसी ने भी इस ताई से यो पुछा के "इस जज न जाणे से" तो मैं तुम दोनों को कंटेम्प्ट में अंदर कर दूँगा।