• सौ जमात की पढ़ाई!

    शगाई आले लड़का देखण आ रे थे।

    लड़की के बाप ने लड़के के दादा ते पुछेया: चौधरी शाब, छोरा कौथी (किस) जमात में पढ़ै सै?

    ताऊ: भाई, न्यूं तै बेरा ना अक कौथी में पढ़ै सै, पर छोरा पूरी सौ जमात पढ़ रहया सै।

    "सौ जमात? न्यूं किक्कर चौधरी?"

    "भाई आठ जमात तै म्हारे गाम के श्कूल (Middle School) में पाश करी। फेर बड्डे श्कूल (High School) में दस जमात (Matric) पाश करी। अठारह जमातां तो यो हो गी।"

    "ओर बाकी?"

    "भाई रे, बाकी ब्याशी (B.Sc) जमातां उसनै हिशार के जाट कालेज ते पाश करी। न्यू हो गया पूरा सैंकड़ा।"
  • लँगड़ाने का राज़

    हड्डियों के विशेषज्ञ दो डॉक्टर सुबह-सुबह घूमने निकले।

    आगे एक आदमी लंगड़ाता हुआ जा रहा था।

    एक डॉक्टर बोला, "लगता है इसकी टखने की हड्डी टूटी हुई है।"

    दूसरा डॉक्टर बोला, "नहीं यार, घुटने की हड्डी टूटी है।"

    दोनों में बहस होने लगी। आखिर तय हुआ कि उसी व्यक्ति से पूछा जाए।

    उसके पास जाकर एक डॉक्टर ने पूछा, "भाईसाहब, आपकी घुटने की हड्डी टूटी है या टखने की?"

    आदमी ने गौर से डॉक्टर को देखा और बोला, "मेरी न तो घुटने की हड्डी टूटी है और न ही टखने की, मेरी तो बस चप्पल टूट गयी है।"
  • हरियाणे का भी रिवाज न्यारा है!

    हरियाणे का भी रिवाज न्यारा है।
    उल्टे सीधे नाम निकालने का भी स्वाद न्यारा है;

    किसी कमजोर को पहलवान कहण का,
    दूसरे की गर्ल फ्रैंड को सामान कहण का स्वाद न्यारा है;

    पहलवान को माडू कहण का,
    और फलों में आडू कहण का।स्वाद न्यारा है;

    एक अन्धे को सूरदास कहण का,
    किसी लुगाई न गंडाश कहण का स्वाद न्यारा है।

    चादर को दुशाला कहण का,
    लंगड़े को चौटाला कहण का स्वाद न्यारा है।

    सब्जी को साग कहण का,
    और काले को नाग कहण का स्वाद न्यारा है।
  • डॉक्टर बेटे!

    एक जाट के 4 जवान छोरे थे। जाट चाह रहा था कि उनकी जल्द से जल्द शादी हो जाये। इसी के चलते उसने अपने किसी नज़दीकी से रिश्ते की बात चलाई।

    रिश्ते की बात करने लड़की वाले जाट के घर आये। सब कुछ देख परख के लड़की के पिता ने जाट से पूछा, "चौधरी साहब, लड़के क्या करते हैं?"

    चौधरी: मुझे लगता है ये चारों के चारों डॉक्टर हैं।

    लड़की का पिता: लगता है क्या मतलब? आपको इन के बारे में कुछ नहीं पता क्या? ये बात तो जँची नहीं चौधरी साहब।

    चौधरी: जँच तो मेरे भी ना रही पर बात यह है कि, मैं इन चारों से कुछ भी पूछ लूँ तो फौरन कहते हैं, "तेरे को क्या बीमारी है?"