• बेइज़्ज़ती इसे कहते हैं!

    पप्पू एक रेस्तरां में गया। वहाँ काफी भीड़-भाड़ थी। तभी उसने देखा कि एक लड़की अकेली बैठी थी। उसके साथ वाली कुर्सी खाली थी। पप्पू ने उससे पूछा, "मिस, क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ?"

    वह लड़की जोर से चिल्लाई, "नहीं, मैं तुम्हारे साथ रात नहीं गुजार सकती।"

    वहाँ मौजूद सभी लोग पप्पू को घूर-घूर कर देखने लगे।

    पप्पू शर्म से पानी-पानी हो गया। जब वह वापस लौटने लगा तो उस लड़की ने उसका हाथ पकड़ा और धीरे से बोली, "सॉरी! दरअसल मैं Human Behavior पर रिसर्च कर रही हूँ और देखना चाहती थी कि इंसान शर्मिंदा होने के बाद कैसा महसूस करता है।"

    पप्पू फ़ौरन दो कदम पीछे हटा और जोर से चिल्लाया, "क्या? सिर्फ एक रात के दस हजार रुपये? कुछ तो कम करो।"

    लड़की हक्की-बक्की रह गई। सभी लोग उसकी ओर देख कर हँसने लगे।

    पप्पू ने धीरे से उससे कहा, "अब महसूस करो मिस, दिल खोलकर महसूस करो कि इंसान शर्मिंदा होने के बाद कैसा महसूस करता है।"
  • बुरी नज़र वाले तेरा मुंह काला!

    एक बार एक शिक्षक कक्षा में आया और बच्चों से बोला, "बच्चो मैं विज्ञान का बहुत बड़ा शिक्षक हूँ। आप मुझ से कुछ भी पूछ सकते हो।"

    यह सुन कर पप्पू ने हाथ उठा दिया और शिक्षक से बोला, "सर, जब हम उंगली में अंगूठी पहन कर उतारते हैं तो वो जगह गोरी हो जाती है, ऐसे ही जब हम जुराबें पहन कर उतारते हैं तो हमारे पैर गोरे हो जाते हैं, परन्तु जब हम चड्डी उतारते हैं तो हमारा लंड क्यों नहीं गोरा होता?"

    शिक्षक ने पप्पू को पहले तो मन ही मन गालियाँ दी फिर बोला, "बेटा वह इसीलिए क्योंकि तुम्हारा लंड हमेशा दूसरी लड़कियों को बुरी नज़र से देखता रहता है।"

    पप्पू: तो उससे हमारे लंड के काले होने का क्या ताल्लुक है?

    शिक्षक: भोसड़ी के कभी सुना नहीं 'बुरी नज़र वाले तेरा मुंह काला'।
  • पप्पू की परेशानी!

    एक दिन पप्पू बंटी से मिलने आया तो थोडा परेशान था।

    बंटी: क्या बात है? इतने परेशान क्यों हो?

    पप्पू: कुछ नहीं यार, तुम्हें तो पता है न कि कल रात मुझे एक मस्त सी आइटम मिल गयी थी।

    बंटी: हाँ-हाँ पता है मुझे जिसके कारण तू मुझे बीच रास्ते में ही छोड़ गया था।

    पप्पू: हाँ बस उसे मैं होटल में ले गया। इम्प्रेस करने के चक्कर में मैंने उसके लिए
    शैम्पेन मंगवा ली और वो एक ही गिलास में ही घूम गयी।
    बस उसके बाद पूछो मत कि रात कितनी हसीन रही।

    बंटी: अगर सारी रात मज़े किये तो फिर परेशानी क्या है?

    पप्पू: बस एक ही बात का अफ़सोस हो रहा है कि उसके साथ तो बियर से ही काम चल जाता!
  • लुकाछिपी बंद!

    पप्पू जब संता के साथ पिकनिक मना कर वापिस आया तो
    जीतो ने उसे पूछा: आज तो तुम्हें बहुत मज़ा आया होगा अपने पापा के साथ पिकनिक मना कर?

    पप्पू: हाँ मम्मी, अच्छा लगा। हम सब ने मिलकर लुकाछिपी खेली।

    जीतो: और कितने बच्चे थे वहाँ?

    पप्पू: बच्चा तो मैं अकेला ही था।

    जीतो: फिर तुमने लुकाछिपी किसके साथ खेली?

    पप्पू: मैं, पापा और एक सुन्दर सी आंटी।

    जीतो: आंटी?

    पप्पू: हाँ मम्मी, पर अब मैं पापा के साथ कभी नहीं खेलूंगा।
    उन्हें तो खेलना ही नहीं आता। जब हम खेल रहे थे तो वो आंटी एक
    कमरे में छिप गयी और पापा उसे ढूंढ़ने के लिए अंदर गए तो पूरे आधे घंटे बाद वापिस निकले।

    जीतो(गुस्से में आग-बबूला होते हुए): बस बेटा आज के बाद तुम्हारे पापा कभी लुकाछिपी खेल ही नहीं पाएंगे!