• शेख चिल्ली की सोच!

    एक बार संता को कहीं जाना था। दरवाजा खोला तो देखा हल्की बारिश हो रही है। जाना पैदल है और बारिश बढ़ भी सकती है।

    सोचने लगा कि क्या करूँ फिर ख्याल आया कि,"पास के मिश्रा जी के घर से छाता ले लूँगा।"

    छाता लेने के लिए उनके घर की ओर चल पड़ा तो रास्ते में सोचने लगा कि,"हो सकता है मिश्रा जी घर पर न हों कोई बात नहीं भाभी जी तो इस समय घर पे ही होंगी। वैसे अच्छी औरत है पर क्या भरोसा मना कर दे।"

    अरे नहीं सात बज रहे हैं मिश्रा जी अभी घर पे ही होंगे। आदमी सही है पर मूड का कुछ कह नहीं सकते खुश है तो खुश नहीं तो फिर बस।

    अरे पर मैंने क्या करना है उसके मूड का एक छाता ही तो मांग रहा हूँ कोई जायदाद थोड़ी न मांग ली।

    वैसे भी मना नहीं करेंगे।

    कितनी बार मेरा स्कूटर मांग के ले गए हैं मैंने तो कभी मना नहीं किया, पर इंसान का क्या पता मना ना करे कोई बहाना ही बना दे।

    एक छाते के लिए बहानेबाजी,छि!! इंसान अपना वक़्त कितनी जल्दी भूल जाता है।

    ये तो अच्छी बात नहीं है। मैं भी चुप रहने वाला नहीं हूँ। होगा मिश्रा अपने घर का साला एहसान फरामोश।

    गुस्से में संता ने मुठियाँ भींच ली।

    छाता न हुआ कोई बड़ी चीज़ हो गयी। मुझे क्या चुतिया समझा है बहनचोद, नहीं देना है तो न दे। पर ये न सोच लेना की कोई हम गिरे हुए है। एक छाता नहीं खरीद सकते।

    सोचते-सोचते मिश्रा जी का घर आ गया।

    संता ने दरवाज़ा खटखटाया।

    मिश्रा जी लुंगी पहने हुए बाहर निकले, "अरे आईये आईये संता जी!"

    संता गुस्से से एकदम लाल सामने आया घुमा के मिश्रा जी के नाक पे एक घूंसा जमाया और बोला, "गांड में डाल ले अपना छाता। बहनचोद!"
  • थोड़ा समय तो लगेगा!

    संता ने ठेकेदारी का नया काम शुरू कर लिया और हर काम जल्दी-जल्दी निपटाने लगा। एक दिन जब संता घर आया तो पप्पू उसके पास आया और बोला, "पिताजी मुझे एक भाई चाहिये।"

    संता: कोई बात नहीं, बस 9 महीने इंतज़ार कर लो, तुम्हें एक भाई भी मिल जायेगा।

    पप्पू: नहीं मुझे तो अभी चाहिए।

    संता: बेटा, ऐसा कैसे हो सकता है? हर काम में थोड़ा समय तो लगता ही है न और इस काम में तो 9 महीने पक्का ही लगेंगे।

    पप्पू: आप के लिए यह मुश्किल थोड़ा है। आप तो अब ठेकेदार हो, बस 8-10 आदमी लगा दो इस काम पर फिर तो यह काम जल्दी हो जायेगा।
  • संता की होशियारी!

    एक बार संता को एक चिराग मिला। संता ने जब उस चिराग को रगड़ा तो अंदर से एक जिन प्रकट हो गया।

    जिन: कहो मेरे आका, तुम क्या चाहते हो?

    संता: तुम मेरी 100 माँगे पूरी कर दो।

    जिन: माफ़ करना, पर मैं सिर्फ 3 माँगे ही पूरी कर सकता हूँ।

    संता: पर इस समय तुम मेरे ग़ुलाम हो तो तुम्हें मेरी 100 माँगे पूरी करनी होगी।

    जिन को संता की यह बात सुन कर गुस्सा आ गया और बोला, "मैं सिर्फ 3 माँगे पूरी करूँगा। अगर मंज़ूर है तो ठीक नहीं तो मैं चला।"

    संता ने कुछ सोचा और कहा, "ठीक है। मेरी सबसे पहली माँग यह है कि तुम अपने हाथ में एक डंडा ले लो।"

    जिन ने हवा में हाथ घुमाया और हाथ में डंडा पकड़ लिया।

    संता: अब यह डंडा अपनी गांड में ले लो।

    जिन ने यह सुनकर थोड़ा घबरा गया पर उसने फिर वो डंडा अपनी गांड में ले लिया।

    संता: अब साले बता इस डंडे को बड़ा करने की मांग पूरी करेगा या मेरी 100 माँगे पूरी करेगा?"
  • संता की समझदारी!

    एक दिन संता ने अपने पड़ोस में रहने वाले आदमी से कहा, "यार तेरी बीवी बड़ी खर्चीली है।"

    पडोसी: नहीं तो, मेरी बीवी तो बहुत ही समझदार है और कभी मेरा फ़ालतू खर्चा नहीं करवाती। परन्तु तुमने ऐसा क्यों कहा?

    संता: अरे कुछ नहीं बस वैसे ही, अच्छा एक बात बता, क्या 48 साल के बाद औरत को बच्चा हो सकता है?

    पडोसी: नहीं यार ये तो बहुत ही मुश्किल है। क्यों क्या हुआ?

    संता: तो चुतिये तू अपनी बीवी को समझा ना, ऐसे ही फालतू में कंडोम खरीदने में मेरे पैसे खर्च करवाती रहती है।
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