• लोग अलग सुहाग रात अलग!

    एक घर में तीन बहने रहती थी। तीनों की शादी की उम्र हो गयी थी पर उनके माता-पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो तीनों की अलग-अलग शादी करें। इसलिए उन्होंने कहा कि हम तुम तीनों की एक ही समय पर शादी कर देंगे।

    तीनों बहने इसके लिए राज़ी हो गयी तो तीनों की एक ही दिन शादी कर दी गयी। अब उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे कि वो हनीमून के लिए बाहर जाएँ तो तीनों बहनो ने यह फैंसला लिया कि वो हनीमून अपने माता-पिता के घर पर ही मनाएंगी।

    रात को जब वो हनीमून मना रही थीं तो उनकी माँ उठी और पानी लेने के लिए नीचे गयी। नीचे जाते समय जब वो पहली लड़की के कमरे के पास से गुज़री तो अंदर से चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी। माँ ने आवाज़ सुनी और आगे चली गयी। जब दूसरी लड़की के कमरे के पास से गुज़री तो हँसने की आवाज़ आ रही थी। माँ ने आवाज़ सुनी और आगे निकल गयी। तीसरी लड़की के कमरे से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी।

    अगले दिन सुबह जब तीनों बहने अपनी माँ के पास बैठी थी तो माँ ने पहली लड़की से पूछा, "तुम रात को चिल्ला क्यों रही थी?"

    लड़की: आप ही ने कहा था न जब दर्द हो रहा हो तो चिल्लाना चाहिए।

    माँ ने दूसरी लड़की से पूछा, "तुम क्यों हँस रही थी?"

    लड़की: आप ने कहा था न कि जब गुदगुदी हो तो हँसना चाहिए।

    माँ ने तीसरी लड़की से पूछा, "तुम्हारे कमरे से तो कोई आवाज़ ही नहीं रही थी, क्यों?"

    लड़की: आप ही ने कहा था जब मुँह में कुछ हो तो आवाज़ नहीं करनी चाहिए।
  • आ बैल मुझे मार!

    एक बार जीजा अपनी साली को लेकर शहर से गांव लौट रहा था। उसके हाथों में एक बाल्टी, एक छड़ी, बगल में एक मुर्गी और बकरी की रस्सी थी।

    रात चांदनी थी और साली जवान।

    अचानक साली बोली: मुझे आप के साथ चलने में डर लग रहा है। कहीं आप कुछ बदमाशी ना करने लगें।

    जीजा: अरे मैं कैसे कोई बदमाशी कर सकता हूँ। मेरे तो दोनों हाथ घिरे हुए हैं, चाह कर भी मैं कुछ नहीं कर सकता।

    साली: कैसे नहीं कर सकते? अभी अगर आप छड़ी ज़मीन में गाड़कर बकरी उसके साथ बांध दें और मुर्गी को बाल्टी के नीचे रख दें तो फिर जो चाहें कर सकते हो आप।
  • जान बची तो लाखों पाये!

    पठान बहुत ही आशावादी था। हर बात पर कहता था, "ख़ुदा ख़ैर करे, इससे भी बुरा हो सकता था।"

    उसके सारे दोस्त उसकी इस बात से बहुत परेशान थे। एक दिन उन सब ने मिलकर एक कहानी बनायी जिससे ज्यादा बुरा होना मुश्किल था।

    पठान का एक दोस्त ग़मगीन सा चेहरा बना कर बोला, "यार, कल तो बहुत ही बुरा हुआ।"

    पठान: क्यों क्या हुआ?

    दोस्त: यार कल मेरा पडोसी जब घर लौटा तो उसकी बीवी किसी गैर मर्द के साथ रंगरलियां मना रही थी। यह देख कर मेरे पडोसी ने गुस्से में आकर दोनों को गोलियों से भून दिया और फिर खुद को भी गोली मार ली।

    पठान: ख़ुदा ख़ैर करे, इससे भी बुरा हो सकता था।

    दोस्त (चिढ कर): इससे बुरा क्या हो सकता था?

    पठान: अगर यह किस्सा परसों का होता तो मरने वालों में एक नाम मेरा होता!
  • मज़ा ही मज़ा!

    एक लड़की की शादी हुई और उसकी सहेली को उसकी सुहागरात के बारे में जानने की बड़ी ही उत्सुकता थी।

    सहेली: बता ना कल रात को क्या हुआ?

    लड़की: कुछ नहीं।

    सहेली: पर कल तो तेरी सुहागरात थी, कुछ तो हुआ होगा?

    लड़की: कह रही हूँ ना कुछ नहीं हुआ।

    सहेली: अच्छा तो मुझे कल रात की सारी घटना बता।

    लड़की: रात को दस बजे मेरे पति कमरे में आये।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: उन्होंने अपना कोट उतारा और खूँटी पर टांग दिया।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर उन्होंने अपनी टाई उतारी और खूँटी पर टांग दी।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर उन्होंने अपनी शर्ट उतारी और खूँटी पर टांग दी।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर उन्होंने अपनी बनियान उतारी और और खूँटी पर टांग दी।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर उन्होंने अपनी बेल्ट उतारी और खूँटी पर टांग दी।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर उन्होंने अपनी पैंट भी उतार कर खूँटी पर टांग दी।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर उन्होंने मेरी साड़ी उतारी और खूँटी पर टांग दी।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर मेरा ब्लाउज उतारा और खूँटी पर टांग दिया।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर उन्होंने मेरा पेटीकोट भी उतारा और खूँटी पर टांग दिया।

    सहेली: फिर क्या हुआ?

    लड़की: फिर उन्होंने मेरी ब्रा भी उतार कर खूँटी पर टांग दी।

    सहेली: फिर तो जरूर कुछ मजेदार हुआ होगा?

    लड़की: हाँ हुआ था ना बहुत मजा आया।

    सहेली: क्या हुआ था?

    लड़की: इतने सारे कपड़े लादने की वजह से खूँटी टूट गई और वो सारी रात खूँटी ही ठोकते रह गए।