• आज की नारी!

    एक बार एक पति और पत्नी में लड़ाई हो जाती है, तो पति परेशान हो कर बाजार जाता है और आत्महत्या करने के इरादे से एक बोतल जहर ले कर आ जाता है।

    घर लौटकर वह अपनी पत्नी से कहता है।

    पति: बहनचोद मैं तेरी रोज की किटकिट से परेशान हो गया हूं और इसीलिए मैं अपनी जान दे रहा हूं, और इतना कहकर वह जहर की बोतल अपने मुंह में उड़ेल लेता है।

    परंतु जहर खाने के बाद उसकी मौत होने के बजाये उसकी तबियत खराब हो जाती तो पत्नी गुस्से से उससे कहती है।

    पत्नी: गांडू के बीज तू ज़िन्दगी में कोई काम ढंग से नहीं कर सकता, तुझसे सौ बार कहा है कि चीजें देखकर खरीदा कर पैसे भी गए और जिस काम के लिए जहर लाया था वो भी नहीं हुआ।
  • बुरा मान गयी!

    हम ने जुर्रत जो दिखाई तो बुरा मान गयी;

    हद हर एक मिटाई तो बुरा मान गयी;

    खुद ही कहती थी कोई तालुक ना रखो;

    कोई दूसरी फंसाई तो बुरा मान गयी;

    खुद ही कहती थी कि छू कर मुझे सोना कर दो;

    हमने मम्मे दबाये तो बुरा मान गयी;

    कहती थी हमें कि लॉलीपॉप पसंद है;

    हमने लुल्ली जो दिखाई तो बुरा मान गयी;

    ठोकने के लिए उसको हमने खटिया बिछा दी;

    बस इसी बात का बुरा मान गयी;

    खुद ही बोली कि कली से फूल मुझे बना दो;

    हमने जब कर दी चुदाई तो बुरा मान गयी!
  • खुद का जुगाड़!

    एक बार एक मरीज़ बड़ी दुखी सी हालत में डॉक्टर के पास आया।

    मरीज: डॉक्टर साहब, मेरा खड़ा नहीं होता।

    डॉक्टर: क्यों?

    मरीज़: पता नहीं डॉक्टर साहब, मैंने बहुत कोशिश की पर नाकाम ही रहा।

    डॉक्टर ने अपनी एक सेक्सी सी नर्स को अंदर बुलाया और उसे कपडे उतारने को कहा। नर्स ने अपने कपडे उतार दिए।

    डॉक्टर: देखो अब खड़ा हुआ?

    मरीज़: नहीं डॉक्टर साहब।

    डॉक्टर (नर्स से): अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दो।

    नर्स ने जैसा डॉक्टर ने कहा वैसा ही किया।

    डॉक्टर: अब देखो, अब खड़ा हुआ?

    मरीज़: जी नहीं, डॉक्टर साहब।

    डॉक्टर ने थोड़ी देर सोचा और मरीज़ से कहा, "ठीक है, तुम बाहर जाओ क्योंकि मेरा तो खड़ा हो गया है।"
  • लुकाछिपी बंद!

    पप्पू जब संता के साथ पिकनिक मना कर वापिस आया तो जीतो ने उसे पूछा: आज तो तुम्हें बहुत मज़ा आया होगा अपने पापा के साथ पिकनिक मना कर?

    पप्पू: हाँ मम्मी, अच्छा लगा। हम सब ने मिलकर लुकाछिपी खेली।

    जीतो: और कितने बच्चे थे वहाँ?

    पप्पू: बच्चा तो मैं अकेला ही था।

    जीतो: फिर तुमने लुकाछिपी किसके साथ खेली?

    पप्पू: मैं, पापा और एक सुन्दर सी आंटी।

    जीतो: आंटी?

    पप्पू: हाँ मम्मी, पर अब मैं पापा के साथ कभी नहीं खेलूंगा। उन्हें तो खेलना ही नहीं आता। जब हम खेल रहे थे तो वो आंटी एक कमरे में छिप गयी और पापा उसे ढूंढ़ने के लिए अंदर गए तो पूरे आधे घंटे बाद वापिस निकले।

    जीतो(गुस्से में आग-बबूला होते हुए): बस बेटा आज के बाद तुम्हारे पापा कभी लुकाछिपी खेल ही नहीं पाएंगे!