• गोली का खेल!

    एक आदमी नाई की दुकान पर दाढ़ी बनवाने गया। जब नाई उसके चेहरे पर ब्रश से बढ़िया क्रीम से उतना ही बढ़िया झाग बना रहा था तो उस आदमी ने अपने चेहरे के पिचके गालों की ओर इशारा करते हुए बोला, "मेरे गालों के इस गड्ढे के कारण दाढ़ी बढ़िया नहीं बन पाती और कुछ बाल छूट जाते हैं।"

    आगे से नाई बोला, "कोई बात नहीं, मेरे पास इसका इलाज है।" उसने पास के दराज में से लकड़ी की एक छोटी से गोली निकाली और उसे देते हुए बोला, "इसे अपने मुँह में मसूड़ों और गाल के बीच रख लो।"

    उस आदमी ने वह गोली मुँह में रख ली जिससे उसका गाल फूल गया और नाई ने उसकी अब तक की सबसे शानदार, सबसे बढ़िया दाढ़ी बनाई।

    गोली उसके मुह में ही फंसी हुई थी, इसलिए उस आदमी ने कठिनाई से बोलते हुए पूछा, "यदि यह गोली गलती से उसके पेट में चली जाए तो?"

    नाई बोला, "कोई बात नहीं। कल लेते आना, जैसे कि बहुत से लोग अब तक लेते आए हैं।"
  • शादी के साइड इफ़ेक्ट!

    एक दिन संता बाजार से गुज़र रहा था कि उसने देखा कि लाला जी एक दम तैयार होकर बाहर बैठे हुए हैं।

    संता: क्या बात है लाला जी, आज बहुत चमक रहे हो कोई खास बात है क्या?

    लाला जी: बस क्या बताऊँ, कल बापू ने बड़े भाई की शादी कर दी। पहले बड़े ने मज़े किये, फिर मैंने और छोटा अभी तक मज़े ले रहा है।

    संता ने सोचा इनके तो खूब मज़े हैं और चला गया।

    कुछ दिन बाद फिर वही नज़ारा था।

    संता: लाला जी आज फिर चमक रहे हो कोई खास बात?

    लाला जी: बस क्या बताऊँ कल मेरी शादी हो गयी। पहले बड़े ने मज़े किये और फिर मैंने मज़े किये और छोटा तो अभी तक मज़े ले रहा है।

    संता ने सोचा कि इनके तो सच में मज़े हैं शादी एक की होती है मज़े तीनो करते हैं।

    कुछ दिन बाद जब संता दोबारा उस राह से गुज़रा तो उसने देखा कि लाला जी के कपडे फटे हुए हैं, बाल बिखरे हुए हैं। पूरी तरह से हालत खराब है।

    संता: क्या हुआ लाला जी, आज ऐसी हालत कैसे?

    लाला जी: क्या बताऊँ, कल बापू ने मेरी बहन की शादी एक पठान से कर दी। पहले उसने बड़े की ली, फिर मेरी ली और छोटे की तो अभी तक ले रहा है!

  • ​जैसे तुम कहो!

    एक बार संता पठान के घर गया। पठान, उसकी बीवी और संता सब टेबल पर बैठे खाना खा रहे थे कि अचानक संता ने अपने पैरों में कुछ हरकत महसूस की। संता ने टेबल के नीचे देखा तो पठान की बीवी संता को छेड़ रही थी।

    संता ने पठान की बीवी की तरफ देखा तो वो संता को इशारा कर के रसोई में चली गयी।

    संता ने भी बहाना बनाया और रसोई में चला गया।

    रसोई में पठान की बीवी ने संता से पूछा, "क्या हुआ? क्या समझे?"

    संता: वही जो तुम चाहती हो।

    पठान की बीवी: तो फिर क्या इरादा है?

    संता: जैसे तुम कहो।

    पठान की बीवी: 10,000 रुपये लगेंगे।

    संता ने कुछ देर सोचा और बोला, "ठीक है, मैं कल आऊंगा।"

    अगले दिन संता पैसे लेकर आया और उसने जमकर पठान की बीवी की चुदाई की।

    शाम को जब पठान वापिस घर लौटा तो उसने बीवी से पूछा, "संता आया था क्या?"

    बीवी पहले तो यह सुनकर घबरा गयी कि कहीं पठान को पता तो नहीं लग गया फिर थोड़ी हिम्मत करके बोली, "जी हाँ, आया था।"

    पठान: चलो अच्छा है, दरसल वो मुझ से सुबह 10,000 रुपये ले गया था और बोल रहा था की शाम तक भाभी जी को घर पर दे जाऊंगा।"
  • कुछ तो समझा करो!

    दो मित्र आपस में बातें कर रहे थे।

    एक काफी उत्तेजित था और कह रहा था, "अब मैं अपनी पत्नी को तलाक दे ही दूंगा।"

    दूसरा मित्र: क्या बात हो गई?

    पहला मित्र: उसने मुझे बेवकूफ कहा है।

    दूसरा मित्र: तो तुमने कोई बेवकूफी की होगी?

    पहला मित्र: नहीं यार!

    दूसरा मित्र: फिर?

    दूसरा मित्र: कल रात जब मैं घर पहुंचा तो मैंने उसे किसी दूसरे आदमी की बाहों में देखा। जब मैंने उससे इसका मतलब पूछा तो उसने बिगड़कर कहा, "बेवकूफ कहीं के! तुम्हें तो इसका मतलब भी नहीं पता।"