• होनी को कौन टाल सकता है!

    दो भूत मरने के बाद आपस में बात कर रहे थे।

    पहला भूत: तुम कैसे मरे?

    दूसरा भूत: ठण्ड के कारण।

    पहला भूत: पर आज-कल तो गर्मी का मौसम है।

    दूसरा भूत: बस किसी चुतिये की वजह से। तुम बताओ तुम कैसे मरे?

    पहला भूत: मुझे अपनी घरवाली पर शक था। एक दिन उसको रंगे हाथों पकड़ने के लिए मैं घर जल्दी पहुँच गया। पूरा घर छान मारा लेकिन उसका आशिक़ कहीं न मिला तो शर्म के मारे मैंने आत्महत्या कर ली।

    दूसरा भूत: साले भोसड़ी के जहाँ पूरा घर देख लिया था तो फ्रिज खोल कर भी देख लेता तो आज हम दोनों ज़िंदा होते!
  • शहर और गाँव में अंतर!

    शहरी बच्चा: यार तुम मुझे परेशान कर रहे हो।

    गाँव वाला बच्चा: तूने क्या मेरी गांड लेनी कर रखी है।

    शहरी बच्चा: मैंने क्या कह दिया तुम्हें?

    गाँव वाला बच्चा: मैंने कौन सी गांड मार ली तेरी?

    शहरी बच्चा: यह किसने किया?

    गाँव वाला बच्चा: यह किसने गांड मरवाई है अपनी?

    शहरी बच्चा: मैं तुमसे बात ही नहीं करता।

    गाँव वाला बच्चा: मैं तेरी गांड भी नहीं मारता।

    शहरी बच्चा: तुम मेरे साथ ऐसे क्यों बात कर रहे हो?

    गाँव वाला बच्चा: तू मेरे लंड पे क्यों चढ़ी जा रहा है?

    शहरी बच्चा: तुम तो बहुत ही चालू हो।

    गाँव वाला बच्चा: तू बहुत बड़ा चूतिया है।
  • जान बची तो लाखों पाये!

    पठान बहुत ही आशावादी था। हर बात पर कहता था, "ख़ुदा ख़ैर करे, इससे भी बुरा हो सकता था।"

    उसके सारे दोस्त उसकी इस बात से बहुत परेशान थे। एक दिन उन सब ने मिलकर एक कहानी बनायी जिससे ज्यादा बुरा होना मुश्किल था।

    पठान का एक दोस्त ग़मगीन सा चेहरा बना कर बोला, "यार, कल तो बहुत ही बुरा हुआ।"

    पठान: क्यों क्या हुआ?

    दोस्त: यार कल मेरा पडोसी जब घर लौटा तो उसकी बीवी किसी गैर मर्द के साथ रंगरलियां मना रही थी। यह देख कर मेरे पडोसी ने गुस्से में आकर दोनों को गोलियों से भून दिया और फिर खुद को भी गोली मार ली।

    पठान: ख़ुदा ख़ैर करे, इससे भी बुरा हो सकता था।

    दोस्त (चिढ कर): इससे बुरा क्या हो सकता था?

    पठान: अगर यह किस्सा परसों का होता तो मरने वालों में एक नाम मेरा होता!
  • समझदारी का फैंसला!

    पत्नी को किसी गैर मर्द की बाहों में देख कर पति ने पत्नी को गोली मार दी।

    पति पर हत्या का मुक़दमा चलाया गया तो अदालत में जज साहब ने पति से पूछा, "तुमने अपनी पत्नी को गोली क्यों मारी?"

    पति: साहब, कोई भी गैरतमंद मर्द यही करता।

    जज: पर तुमने उसके प्रेमी को गोली क्यों नहीं मारी?

    पति: साहब, पहले तो मैं अपनी पत्नी के प्रेमी को ही गोली मारने वाला था पर फिर मैंने सोच-विचार कर अपनी पत्नी को गोली मार दी?

    जज: पर क्यों गोली मारी, यह तो बताओ?

    पति: हर हफ्ते किसी नए आदमी को गोली मारने की बजाय मैंने अपनी पत्नी को गोली मारना ही ठीक समझा!