• थकान से बेहाल!

    एक बड़ी फर्म के प्रोपराइटर दुखी मुद्रा में रात को अपने मित्र के घर पहुंचे और बताया पत्नी से लड़ाई हो गई है, अंत: वह उसके पास सोने आए हैं।

    मित्र ने पूछा: पर हुआ क्या?

    प्रोपराइटर: आज जब ऑफिस से घर पहुंचा तो थका हुआ था, कुसुम ने मेरे गले में बांहें डालकर स्वागत किया और कश्मीर इम्पोरियम में नई-नई रेशमी साड़ी के लिए अठारह सौ रूपए मांगे।

    मित्र: मैं समझ गया, कंजूस आदमी हो। लखपति होकर भी तुम्हारी यह आदत नहीं गई, तुमने बचत योजना पर भाषण दिया होगा?

    प्रोपराइटर (ठंडी सांस लेते हुए): नहीं यार! मैं थकान से इतना बेहाल था कि कह गया, 'अवश्य डार्लिंग, अठारह सौ तुमसे ज्यादा हैं क्या, बस यह लेटर टाइप करके क्लर्क को दे दो।'
  • पैसों का सवाल!

    संता व्यापार के लिए विदेश गया था, वहाँ भाग्य से उसकी होटल के एक बार में एक सुंदर युवती से जान-पहचान हो गई जो बात करती-करती उसके कमरे तक चली गई। एक पैग के बाद युवती उसकी गोद में आ बैठी।

    उसने प्यार से पुछा: क्या तुम मुझसे अलिंगन करना चाहोगे?

    संता: जरुर, यह कहकर युवती को लिपटा लिया।

    युवती: क्या तुम मुझे चूमना चाहोगे?

    संता: क्यों नहीं डार्लिंग।

    संता ने दो मिनट वाला चुंबन मारा।

    युवती: और अब संभल जाओ डियर, अब पैसों का सवाल आ रहा है।
  • किस महंगी पड़ गयी!

    एक लड़के ने गाँव की एक लड़की पटाई हुई थी।

    एक दिन वो उस से गाँव मिलने गया और उसको चूम कर बोला,"जानू, जब मैं तुम्हें पहले चूमता था तो तुम आँखें बंद कर लेती थी, पर अब नहीं ऐसा क्यों?

    लड़की गुस्से से,"हरामखोर, पिछली बार जब मैंने आँखें बंद की थी तब तूने मेरे ब्लाउज में हाथ डाल कर 500 का नोट गायब कर दिया था।"
  • राजनीति का मतलब!

    बेटा: पापा पॉलिटिक्स क्या है?

    बाप: तेरी माँ घर चलाती है उसे सरकार मान लो, मैं कमाता हूँ मुझे कर्मचारी मान लो, कामवाली काम करती है उसे मजदूर मान लो तुम देश की जनता, छोटे भाई को देश का भविष्य मान लो।

    बेटा: अब मुझे पॉलिटिक्स समझ में आ गयी पापा, कल रात मैंने देखा की कर्मचारी मजदूर के साथ किचन में मज़े ले रहा था, सरकार सो रही थी, जनता की किसी को फ़िक्र नहीं थी और देश का भविष्य रो रहा था।